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जज्बा: अपने हौसलों से दूसरों के जीवन में भर रहे रंग, दूसरों का जीवन संवारने को ही बना लिया लक्ष्य

Fri, 18 Mar 2022 12:47 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

युवावस्था में मौज-मस्ती को त्याग दूसरों का जीवन संवारने को ही जीवन का लक्ष्य बना लिया। ये लोग कड़े परिश्रम से अनेक बच्चों का जीवन संवार चुके हैं।
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आरती साहू। सोनू मित्तल। अमित लाठिया। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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सबके लिए जीवन के अलग-अलग रंग होते हैं। एक गरीब के लिए जीवन उसकी रोटी और मामूली जरूरतों को पूरा करने तक सीमित है। उसी तरह होनहार विद्यार्थियों के लिए किताबें ही उनका जीवन हैं। अमीर व्यक्ति के लिए अपनी संपत्ति को बढ़ाना जीवन है। मतलब जिसका जैसा जीवन, उसकी वैसी ही दुनिया है। इन सबके बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने दुनिया को अपने जीवन से हटकर देखा।

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रंगों के पर्व होली पर हम आपको हरियाणा के सोनीपत जिले के ऐसे ही कुछ लोगों से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जो अपने हौसलों से दूसरों के जीवन में रंग भर रहे हैं। इन लोगों के लिए भी एशो-आराम भरी जिंदगी के सभी रास्ते खुले थे, लेकिन इन्होंने जरूरतमंदों की मदद करने को ही जीवन का लक्ष्य बना लिया। 

झुग्गियों में ज्ञान के दीप जला रहीं आरती साहू 
जिस उम्र में युवा मौज-मस्ती करते हैं, उस उम्र में सिक्का कॉलोनी निवासी आरती साहू झुग्गी-झोपड़ियों में ज्ञान की रोशनी फैला रही हैं। स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन (एसएसएफ) के साथ जुड़कर आरती अब तक सैकड़ों बच्चों का जीवन संवार चुकी हैं। व्यवसायी अशोक कुमार साहू व गृहिणी सरोजनी साहू की लाडली आरती साहू ने बताया कि वर्ष 2017 में स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन के बारे में सुना था, जो गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहा है।
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शुरुआत में विश्वास नहीं हुआ, खुद जाकर देखा तो इतनी प्रभावित हुई कि खुद को इनके साथ जोड़ने से नहीं रोक सकी। 26 जनवरी 2017 को संस्था के साथ जड़ने के बाद झुग्गी-झोपड़ियों, ईंट भट्टों पर रहने वाले बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रयास किए। आरती बताती हैं कि शुरुआत में मम्मी-पापा कहते थे कि रोजाना जाने की क्या जरूरत है, दूसरे पढ़ा लेंगे।

जब उन्होंने एसएसएफ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में खुद जाकर देखा तो उसके बाद उनकी विचारधारा ही बदल गई। उसके बाद तो मैं किसी दिन नहीं जाती थी तो वे खुद कहते थे आज बच्चों को पढ़ाने क्यों नहीं जा रही। आज मैं गुरुग्राम की एक कंपनी में कार्य करती हूं, लेकिन सप्ताह के अंतिम दिन और बीच में जब भी समय मिलता है, इन बच्चों को पढ़ाने पहुंच जाती हूं। यही नहीं मेरी जितनी भी सहेलियां हैं, सबको इन बच्चों का जीवन संवारने में सहयोग करने के लिए प्रेरित करती हैं।

आरती बताती हैं कि शुरुआत में स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन में संस्थापक नितिन जैन सहित 4 सदस्य ही थे। पांच बच्चों को पढ़ाने से शुरू किया गए अपने सफर में हमने कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन हौसला नहीं छोड़ा। आज संस्था में 708 सदस्य हैं, जो झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। हम अब तक 1510 से अधिक विद्यार्थियों का जीवन संवार चुके हैं। 

जरूरतमंदों को शिक्षा के साथ संस्कार दे रहीं सोनू मित्तल 
अपनी खुशी के लिए तो हर इंसान प्रयास करता है, लेकिन दूसरों को खुशी देने में जो आत्मिक शांति मिलती है, उसका बखान नहीं किया जा सकता। यह कहना है कि सोनीपत की काठ मंडी निवासी सोनू मित्तल का। वह बताती हैं कि जब मैं बीए प्रथम वर्ष में थी, तब शादी कर दी। पढ़ने का शौक दबकर रह गया। शादी के बाद दो बच्चे हुए, जिनकी परवरिश में ही समय बीतता चला गया, लेकिन पढ़ाई का जज्बा अंदर ही दबा रहा।

एक दिन छोटे-छोटे बच्चों को अपने माता-पिता के साथ काम करते देखा। जब उनके माता-पिता से पूछा तो उन्होंने पैसा न होने की बात कही। उसी दिन से इन बच्चों को पढ़ाने की ठानी। शादी के 10 साल बाद स्नातक पूरी की और पढ़ाई के जुनून को उड़ान देने के लिए गरीब बच्चों को पढ़ा शुरू किया। इसके लिए पति अरुण मित्तल ने पूरा सहयोग दिया।

छह सालों से सैकड़ों बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने वाली सोनू कहती हैं कि इन छह सालों में जरूरतमंदों को नि:शुल्क शिक्षा देने के साथ ही अच्छे संस्कार देने का भी काम किया। इन बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलवाने से लेकर उनकी पढ़ाई खर्च व स्कूल पोशाक तक का खर्च खुद ही वहन कर रही हूं।

वह ऐसे बच्चों को ढूंढती हैं, जो स्कूल में नहीं जाते। उनके माता-पिता को पढ़ाई का महत्व बताते हुए बच्चों को उन्हें क-ख-ग का ज्ञान करवाकर इनके जीवन से अशिक्षा के अंधियारे को दूर भगाकर शिक्षा की लौ जला रही हैं। सोनू कहती हैं कि जब तक संभव होगा मैं नि:शुल्क यह सेवा करती रहूंगी और दूसरों को भी शिक्षा व स्वच्छता के लिए प्रेरित करती रहूंगी। सोनू मित्तल के इन्हीं प्रयासों को देखते हुए अनेक बार इन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।

जरूरतमंदों के मसीहा बने दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल अमित लाठिया
वेस्ट राम नगर निवासी दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल अमित लाठिया जरूरतमंदों के लिए मसीहा बने हुए हैं। वह बच्चों को न सिर्फ नि:शुल्क कोचिंग दे रहे हैं, बल्कि अपने खर्च पर उनके खाने-पीने, रहने व दूसरी जगह कोचिंग दिलवाने की भी व्यवस्था कर रहे हैं। करीब 8 साल में उनके पास कोचिंग ले रहे 90 से अधिक युवा विभिन्न स्थानों पर सरकारी नौकरी में सेवा दे रहे हैं।

मूलरूप से गोहाना के गांव लाठ निवासी अमित लाठिया बताते हैं कि उन्होंने जीवन में कड़ा संघर्ष किया है। आर्थिक तंगी के चलते कोचिंग के पैसे जुटाने के लिए चाय की दुकान पर काम किया और देर रात तक पढ़ाई कर दिल्ली पुलिस में चयनित हुए। जीवन में जिन परिस्थितियों का सामना किया, उनसे किसी और को न जूझना पड़े, इसलिए वह 12 घंटे की ड्यूटी के बाद जरूरतमंदों को नि:शुल्क कोचिंग देते हैं।

बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पांच लाख का लोन भी लिया। अमित बताते हैं शादी में आठवां फेरा अपनी कमाई का पांच-पांच प्रतिशत जीवनभर गरीबों की भलाई में लगाने के लिए लिया था। उस फेरे में लिए वादे को मैं और मेरी पत्नी मंजू आज भी निभा रहे हैं। 

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