सोनीपत। किसानों के धरनास्थलों से कोरोना फैलने के आरोप लगाए गए तो संयुक्त किसान मोर्चा के नेता भड़क गए। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को स्वास्थ्य सुविधाएं देने में नाकाम होने के कारण इस तरह के आरोप लगाने की बात कही। किसान नेताओं ने यहां तक कहा कि सरकार ऑक्सीजन तक की पूर्ति नहीं कर सकी और इस कारण ही लोग मर रहे हैं। ऐसे में सरकार को किसानों पर कोरोना फैलाने के आरोप लगाने की जगह स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं बॉर्डर पर ईद की नमाज अदा की गई तो संयुक्त किसान मोर्चा की 26 मई को बैठक करके बड़ा फैसला लेने की बात कही गई।
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए किसानों के कारण कोरोना फैलने का झूठ बोल रही है। किसान पिछले कई महीने से धरने पर बैठे हुए हैं और कोरोना यहां से फैलता तो यहां हॉटस्पॉट बन जाता। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार हर स्तर पर फेल साबित हुई है और कोरोना महामारी में स्वास्थ्य सुविधाएं तक मरीजों को नहीं मिल रही है। बल्कि इस महामारी के बीच चुनाव कराकर लोगों को मौत के मुंह में धकेल दिया और अब गांवों में हालात खराब हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को साफ कहा जा चुका है कि वह अपने जांच व वैक्सीनेशन सेंटर बनाए और जिसको उनपर जाना होगा, वह खुद चला जाएगा।
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार बार-बार कोरोना के नाम पर किसान आंदोलन को तोड़ना चाहती है। इस तरह सरकार अपनी नाकामी छुपा रही है, क्योंकि सरकारी की नाकामी के कारण बुरा हाल हुआ है। गुरनाम चढूनी ने आरोप लगाया कि सरकार एक सप्ताह में ऑक्सीजन प्लांट बना सकती है, लेकिन उसके बावजूद प्लांट नहीं बनाए गए तो यह सरकार की बड़ी लापरवाही है। अब इस तरह की लापरवाही को छुपाने के बहाने ही सरकार ढूंढ रही है। किसान नेताओं ने कहा कि 26 मई को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी, जिसमें आंदोलन को लेकर अगली रणनीति बनाई जाएगी और बड़ा फैसला लिया जाएगा।