फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीमा विवाद में पांच दशक से झुलस रहे यूपी-हरियाणा के किसान

विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान पांच दशक से सीमा विवाद की आग में झुलस रहे हैं। यूपी व हरियाणा के किसानों के बीच यमुना खादर की करीब 4500 हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद है। दोनों तरफ के करीब 47 गांव के किसानों के बीच सीमा विवाद चल रहा है और अभी तक करीब दो दर्जन से अधिक बार खूनी संघर्ष होने से कई की जान जा चुकी है।
विज्ञापन

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शासन-प्रशासन ने विवाद को सुलझाने में ठोस रुचि भी नहीं दिखाई है। अचानक बवाल होने पर शासन-प्रशासन के लोग सक्रिय जरूर होते हैं। बाद में बिना विवाद निपटाए मामले को अधर में छोड़ दिया जाता है। दिसंबर, 2019 में विवाद निपटाने के लिए कदम बढ़ाते हुए सीमांकन कराया गया, लेकिन अभी तक पूरे क्षेत्र में पिलर नहीं लगाए जा सके हैं। अब फिर से जाजल व निवाड़ा के किसान आमने-सामने आ गए हैं।
प्रदेश के सोनीपत व पानीपत जिलों के किसानों का यूपी के बागपत व शामली जिले के किसानों संग करीब पांच दशक से यमुना खादर की जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। हरियाणा व यूपी के बीच यमुना है और इससे ही दोनों प्रदेशों का सीमांकन होता है। यमुना की धारा कई बार बदलने से हरियाणा की जमीन यूपी की ओर चली गई तो यूपी की जमीन हरियाणा की ओर आ गई। उस जमीन पर कब्जे के लिए ही यह विवाद चल रहा है। इस विवाद के बढ़ने पर केंद्र ने 1974 में तत्कालीन कृषि मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया और दीक्षित अवॉर्ड के तहत दोनों प्रदेश की जमीन पर पिलर लगवाए गए। उस समय यमुना की धार को आधार मानकर सीमांकन कर दिया गया था। उस समय तय हुआ था कि यूपी के किसानों की जमीन हरियाणा की ओर है तो उस पर हरियाणा के किसान काबिज होंगे और हरियाणा के किसानों की जमीन यूपी की ओर है तो उस पर यूपी के किसान काबिज होंगे। उस पर कब्जा दिलवाने की कार्रवाई प्रशासन को करनी थी, लेकिन उस पर कब्जा नहीं दिलवाया गया और यह विवाद लगातार बढ़ता गया।
विज्ञापन

इस विवाद को लेकर कई बार खूनी संघर्ष तक हुआ है। इसमें करीब 30 मुकदमे भी दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक यह विवाद नहीं सुलझा है। इस विवाद को सुलझाने के लिए कई बार दोनों प्रदेशों के अधिकारियों की बैठक भी हुई, लेकिन उसके बावजूद किसी ने ठोस रुचि नहीं दिखाई।
वर्ष 2019 में सीमांकन कराने के बाद पूरे क्षेत्र में पिलर नहीं लगाए गए
यूपी-हरियाणा के किसानों के बीच सीमा विवाद में लगातार खूनी संघर्ष होने पर दिसंबर 2019 में यूपी के बागपत जिले में सोनीपत, पानीपत, बागपत, शामली जिले के अधिकारियों की बैठक हुई। उस बैठक में निर्णय लिया गया कि सीमांकन कराया जाएगा और उस पर पिलर लगाकर विवाद खत्म किया जाएगा। अब तक कुछ हिस्से में ही पिलर लगाए गए हैं।
सोनीपत व बागपत के इन गांवों के बीच चल रहा विवाद
सोनीपत के बेगा, चंदौली, पबनेरा, ग्यासपुर, मीमारपुर, जैनपुर, टिकौला, नांदनौर, असदपुर, गढ़मिर्कपुर, मनौली, दहीसरा, भैरा बांकीपुर, जाजल आदि गांव के किसान सीमा विवाद की आग में झुलस रहे हैं तो यूपी के बागपत जिले के बागपत, निवाड़ा, सिसाना, गौरीपुर जवाहर नगर, नैथला, निनाना, लुहारी, कौताना, खेड़ी प्रधान, खेड़ा इस्लामपुर, छपरौली, टांडा, काकौर, बदरखा, जागौस, काठा, पाली, नंगला बहलोलपुर, मवीकलां, सुभानपुर, सांकरौद आदि गांव सीमा विवाद का दंश झेल रहे हैं। किसान लगातार अधिकारियों के पास चक्कर काट रहे हैं। उसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती है और हर बार केवल आश्वासन मिलता है।
फसल बुआई और कटाई के समय होता है संघर्ष
सीमा विवाद में यूपी व हरियाणा के किसानों के बीच फसल बुआई व कटाई के समय सबसे ज्यादा संघर्ष होता है। वर्ष 1997 में सांकरौद के यमुना खादर में सोनीपत के भैरा बांकीपुर के ओमपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसको लेकर काफी बवाल हुआ था और अफसरों को बंधक बनाया गया था। वर्ष 1997 में यमुना खादर में दोनों तरफ के किसानों के बीच हुई फायरिंग में बागपत के कुर्डी गांव के विशंभर की मौत हो गई थी। वर्ष 1997 व 98 में खुर्मपुर व नंगला बहलोपुर गांव के किसानों के बीच जमकर बवाल हुआ था। उस समय कई को गोली लगी थी। उसके बाद भी जाजल व निवाड़ा के किसानों के बीच बवाल हुआ तो खुर्मपुर व नंगला बहलोलपुर के किसानों में झगड़ा हुआ। अप्रैल, 2021 में नगला बहलोलपुर के अनिल की हत्या हो गई। वहीं जाजल व निवाडा के लोगों के बीच कई बार संघर्ष हो चुका है। इनके अलावा भी फसल बुआई व कटाई के समय बवाल होता रहा है।
किसान पंचायत भी हुई, नहीं हुआ समाधान
हरियाणा और यूपी के किसानों के बीच यमुना नदी को लेकर चल रहे सीमा विवाद के समाधान के लिए नवंबर, 2020 में गांव जाजल में किसान पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत में फैसला किया गया कि यमुना से सटे गांवों में 21-21 किसानों की समिति बनेगी। पंचायत में कहा गया था कि अकेले सोनीपत जिले के 17 गांवों की 1500 एकड़ से ज्यादा जमीन को लेकर यूपी के बागपत जिले के किसानों के साथ चल रहे विवाद को सुलझाने पर जोर रहेगा। लेकिन विवाद सुलझ नहीं सका।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें