कुंडली बॉर्डर पर कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलनरत किसानों को झटका लगा है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत मांग रहे किसानों को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने रास्ता रोकने को लेकर सख्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब उन प्रभावित लोगों को कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर रास्ता खुलने की उम्मीद बंध गई है, जो लंबे समय से रास्ता खुलवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार ने उच्च स्तरीय कमेटी का गठन भी किया था, जिसने किसानों व उद्योगपतियों की बैठक बुलाई थी, लेकिन किसान इस बैठक में नहीं पहुंचे थे।
किसान कुंडली बॉर्डर पर 10 माह से अधिक समय से डटे हुए हैं। ऐसे में कुंडली-सिंघु बॉर्डर को भी बंद किया गया, जिससे आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है। कुंडली बॉर्डर पर वर्तमान में आठ से दस हजार किसान झोपड़ी व अन्य संसाधनों के सहारे बैठे हैं। किसान लगातार कह रहे हैं कि रास्ता दिल्ली पुलिस ने कंटीले तार लगाकर रोक रखा है। करीब 6 माह से रास्ता खुलवाने के लिए आंदोलन चला रहे राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच के प्रधान हेमंत नांदल ने कहा कि सरकार के सामने वह कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब सुप्रीम कोर्ट ने रास्ता रोकने को लेकर फटकार लगाई है, तो इससे ऐसा लगने लगा है कि किसान उनकी समस्या के बारे में जरूर सोचेंगे और एनएच-44 पर रास्ता खुल सकेगा।
दिल्ली से सीधा संपर्क टूटने से बढ़ी मुसीबत
किसानों के आंदोलन से प्रभावित कुंडली व राई क्षेत्र के दर्जनों गांवों का लिंक दिल्ली से सीधे तौर पर टूट गया है। 10 माह से इन गांवों में न केवल कामकाज प्रभावित है, बल्कि नौकरियों पर जाने वाले लोगों को बड़ा चक्कर लगाकर लिंक मार्गों से पहुंचना पड़ता है। ऐसे में न केवल खर्च बढ़ गया है, बल्कि बहुत से लोगों का रोजगार भी छूट गया है। गांव कुंडली, नांगल कलां, सबौली, नाथूपुर, जाखौली, सेवली, प्रीतमपुरा, अटेरना, मनौली, बढ़खालसा, राई, बीसवां मील, बढ़मलिक, जठेड़ी आदि गांवों के अधिकतर ग्रामीणों का कामकाज दिल्ली पर आधारित है, लेकिन 10 माह से इन लोगों के लिए दिल्ली दूर हो गई है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि एक तरफ का भी रास्ता खुल जाए तो उन्हें ज्यादा परेशानी न हो।
पांच हजार फैक्टरियों में कच्चे माल से लेकर तैयार माल पहुंचाने में हो रही दिक्कत
एनएच-44 बंद होने से आसपास के लोग व उद्योगपति परेशान हैं। कुंडली से लेकर बड़ी औद्योगिक क्षेत्र तक के उद्योगों पर आफत है। उद्योगपतियों का कहना है कि 10 माह में सोनीपत जिले के उद्योगों को 50 हजार करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार की हाई लेवल कमेटी की बैठक से उद्योगपतियों को कुछ उम्मीद बंधी थी, लेकिन बैठक में किसानों के नहीं पहुंचने से उम्मीद धूमिल हो गई थी। अब फिर से उद्योगपतियों को लगने लगा है कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद किसान रास्ता खोलने पर विचार कर सकते हैं।
वर्जन
किसानों ने जब से कुंडली-सिंघु बॉर्डर बंद किया है, तभी से उद्योगों में कच्चा माल मंगवाने व तैयार माल भेजने की दिक्कत शुरू हो गई। ट्रांसपोर्ट की परेशानी बढ़ गई है। जर्जर रास्तों से लंबा चक्कर लगाकर बड़ी गाड़ियां औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंच पा रही हैं, जिससे खर्च दोगुने से तीन गुना हो गया है। सालभर में सोनीपत के उद्योगों को 50 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद काफी उम्मीदें हैं।
- राकेश देवगन, प्रधान, राई औद्योगिक मेन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन
किसानों के आंदोलन का सबसे ज्यादा असर कुंडली औद्योगिक क्षेत्र पर हुआ है। यहां सालभर से सड़कें बंद पड़ी हैं, जिससे लिंक मार्ग जर्जर हो चुके हैं। बारिश के कारण लिंक मार्ग तालाब नजर आते हैं। 30 प्रतिशत से ज्यादा फैक्टरियां बंद पड़ी हैं और अधिकतर पलायन कर चुकी हैं। कई फैक्टरियों में तो माल पहुंच ही नहीं पा रहा। अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से हमें बेहतरी की उम्मीद दिख रही है।
- सुभाष गुप्ता, पदाधिकारी कुंडली औद्योगिक एसोसिएशन
वर्जन
सरकार किसानों के आंदोलन के खिलाफ लगातार अलग-अलग साजिश रच रही है, लेकिन कामयाब नहीं हो रही। खासकर कुंडली-सिंघु बॉर्डर के धरने से सरकार घबराई हुई है। इसलिए रास्ता खुलवाने के लिए नया षड्यंत्र रचा जा रहा है। किसानों को बदनाम करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। अदालत हमेशा सरकार व कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में फैसला सुनाती है। अब किसानों के रास्ते बंद किए जाने को गलत ठहराया जा रहा है। जनवरी में एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के आंदोलन को जायज ठहराया था।
- प्रेम सिंह भंगु, वरिष्ठ सदस्य एवं कानूनी सलाहकार, संयुक्त किसान मोर्चा
कुंडली बॉर्डर पर सड़क पर बनी किसानों की झोपड़ी। संवाद- फोटो : Sonipat