संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि यूपी की भाजपा सरकार विरोध कर रहे किसानों के बढ़ते समर्थन को रोकने और आरोपियों को बचाने के लिए अलोकतांत्रिक और सत्तावादी प्रयास कर रही है। इसकी एसकेएम कड़े शब्दों में निंदा करता है। एसकेएम ने यूपी सरकार पर तानाशाहीपूर्ण तरीके से काम करने का भी आरोप लगाया है।
संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने सोमवार को कुंडली बॉर्डर स्थित आंदोलनस्थल पर कहा कि चश्मदीद बताते हैं कि कैसे यह जानलेवा हमला पूर्व नियोजित लगता है जिसे यूपी पुलिस ने सुनियोजित तरीके से क्रियान्वित किया था। यह बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों को अंधाधुंध तरीके से कुचलने के लिए पुलिस ने खुद ड्राइव कर रहे मंत्री के बेटे के वाहनों को अनुमति देने के लिए बैरिकेड हटा दिए। पुलिस ने आशीष मिश्रा टेनी को मौके से भगाया और बताया जा रहा है कि उसने भागते हुए गोली चला दी। चश्मदीद गवाह बताते हैं कि एसकेएम नेता तजिंदर सिंह विर्क को विशेष रुप निशाना बनाया गया। डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि दिन भर की घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता हों या राजनीतिक नेता सभी को लखीमपुर खीरी जाने से रोकने के लिए कई अलोकतांत्रिक तरीके अपनाए। धारा 144 लगाई गई और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। यूपी सरकार ने कुछ लोगों को विशेष हवाई अड्डों से आने और जाने से रोक दी। पंजाब व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों को आने की इजाजत नहीं दी गई। एसकेएम नेता गुरनाम सिंह चढूनी और बूटा सिंह बुर्जगिल को यूपी पुलिस द्वारा लखीमपुर खीरी पहुंचने से रोका गया है। एसकेएम उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार के इन सभी अलोकतांत्रिक उपायों की निंदा करता है।
एसकेएम बोला, हमने नहीं खटखटाया न्यायालय का दरवाजा
संयुक्त किसान मोर्चा एक बार फिर स्पष्ट करता है कि उसने वर्तमान आंदोलन या 3 कृषि कानूनों से संबंधित मामलों पर कभी भी सर्वोच्च न्यायालय या अन्य न्यायालयों का दरवाजा नहीं खटखटाया है। एसकेएम का मानना है कि 3 कानूनों के संबंध में मामला संवैधानिकता का है। साथ ही साथ कृषि आजीविका पर इसके प्रभाव का भी है जो केंद्र सरकार के दायरे में आता है। एसकेएम का हमेशा से मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा अपनाए गए किसान-विरोधी नीति निर्देशों को दर्शाने वाले 3 केंद्रीय कानूनों को केंद्र सरकार द्वारा ही निरस्त किया जा सकता है। इस दिशा में संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बातचीत फिर से शुरू करने की मांग की है। उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता का एसकेएम से कोई लेना-देना नहीं है।
भाजपा के बिछाए जाल से बचकर रहे किसान
एसकेएम ने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल से इस्तीफे की भी मांग करते हुए सभी किसानों और नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि किसानों के संघर्ष का इतिहास शांति ही रहा है। एसकेएम ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वह हिंसा और सांप्रदायिक राजनीति द्वारा आंदोलन को पटरी से उतारने के भाजपा द्वारा बिछाए जा रहे जाल में न फंसें।
कुंडली बॉर्डर पर निकाला पैदल रोष मार्च
लखीमपुर खीरी की घटना के विरोध में सोमवार को कुंडली बॉर्डर पर एसकेएम नेता डॉ. दर्शनपाल, जगजीत दल्लेवाल, सतनाम सिंह बहरू, अवतार सिंह महलो, बलदेव सिंह सिरसा व अभिमन्यु कुहाड आदि ने मुख्य मंच से मुख्य कार्यालय तक पैदल रोष मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया।
सीएम के खिलाफ प्रदर्शन करते भाकियू नेता।- फोटो : Sonipat