संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से हरियाणा के सोनीपत में कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन स्थगित करने के बाद उनसे असहमत होकर कुंडली बॉर्डर पर धरनारत कुछ किसान बुधवार को प्रदर्शन के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंच गए। जिसका पता लगते ही दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और बस में बैठाकर वापस कुंडली बॉर्डर पर ले आए।
उन्हें कुंडली थाना पुलिस के हवाले कर दिया। कुंडली थाना पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को उनके सामान व तंबुओं के साथ उनके घरों को रवाना कर दिया। रवाना किए जाने वाले किसानों में जंतर-मंतर से लाए गए 7 किसान भी शामिल हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा की सरकार के साथ बातचीत के बाद सहमति बनाते हुए 9 दिसंबर को किसान आंदोलन को स्थगित कर दिया था। जिसके बाद किसानों ने घर वापसी की थी। उसके बाद भी किसानों के एक जत्थे ने मोर्चा के फैसले पर असहमति जताते हुए कुंडली बॉर्डर पर ही सत्याग्रह करने का निर्णय लिया था। सुनवाई न होने पर इन प्रदर्शनकारियों ने खुद को जंजीरों में बांधकर 30 जनवरी को जंतर मंतर पर जाने का प्रयास किया था।
कुंडली बॉर्डर पर किसानों का सामान कैंटर में डलवाती पुलिस। संवाद
लेकिन सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। उसके बाद बुधवार को सात किसान गुपचुप तरीके से जंतर-मंतर पर पहुंच गए और वहां पर प्रदर्शन करने लगे। सूचना मिलने पर दिल्ली पुलिस ने किसान सतनाम, नीमा सिंह, राजेश, प्रदीप, कुलदीप, मालीराम व अंशु को हिरासत में ले लिया और कुंडली बॉर्डर पर लाकर कुंडली थाना पुलिस के हवाले कर दिया।
इधर, कुंडली थाना पुलिस ने प्रशासन से बातचीत कर इन्हें व उनके बाकी किसान साथियों को सामान समेत उनके ठिकानों पर रवाना कर दिया। इस दौरान बाकायदा हर किसान के साथ पुलिस कर्मचारी भी उन्हें छोड़ने के लिए रवाना हुए।
कैंटर में सामान लादकर किया रवाना
बुधवार शाम को डीएसपी वीरेंद्र राव व एसएचओ रवि कुमार की टीम कुंडली पहुंच गई। पुलिस ने कैंटर में धरना स्थल से सामान समेटा। किसानों को फिर से बस में बैठाकर पंजाब के लिए रवाना कर दिया। किसानों ने वीडियो वायरल कर पुलिस कार्रवाई के बारे में बताया। किसान नेता सतनाम सिंह ने कहा कि उन्होंने 2 फरवरी को दिल्ली जंतर- मंतर पर प्रदर्शन करने का अपना वादा पूरा कर दिया है।
दिल्ली व हरियाणा की पुलिस ने उनके साथ सौतेला व्यवहार किया है। उनका धरना जबरदस्ती समाप्त कराया जा रहा है। यदि उनके पास किसानों की ताकत होती तो पुलिस यह हिम्मत कभी नहीं करती। एसकेएम के कुछ नेताओं सरकार के साथ मिलकर किसानों के साथ धोखा किया है। इसी की सजा पूरे देश के किसान भुगत रहे हैं।