सोनीपत। हीमोफीलिया के मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। जिला नगारिक अस्पताल में फैक्टर-8 उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को अन्य जिलों में जाना पड़ रहा है। जिले में हीमोफीलिया के 54 मरीज पंजीकृत हैं। अस्पताल में एक सप्ताह से फैक्टर खत्म होने के कारण चक्कर काटने पड़ रहे हैं। फैक्टर न मिलने से मरीजों को दर्द सहन नहीं हो रहा।
इन मरीजों का खुद ही रक्त बहने लगता है। ऐसे में इन्हें फैक्टर 8 और 9 के इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं, ताकि रक्त बहने से रुक जाए। हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें खुद रक्त बहना शुरू हो जाता है। इसमें रोगी के शरीर में किसी कारण या अकारण भी रक्त बहना शुरू हो जाता है। हीमोफीलिया के मरीजों को जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन में इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। सप्ताह में लगभग एक से दो बार जाना पड़ता है। रक्त बहने पर आपातकालीन विभाग में ही हीमोफीलिया के रोगियों को जीवनरक्षक टीका यानी फैक्टर इंजेक्शन लगाया जाता है।
जिला अस्पताल में हीमोफीलिया के 54 मरीज पंजीकृत हैं। इसमें 90 फीसदी से ज्यादा मरीज फैक्टर आठ के हैं। उन्हें समय-समय पर अस्पताल पहुंचकर हीमोफीलिया की दवा लेने के साथ ही इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। मेडिकल हिस्ट्री के मुताबिक उन्हें डोज दी जाती है। हीमोफीलिया पीड़ितों को चोट लग जाए और खून का रिसाव बंद न हो तब फैक्टर की जरूरत पड़ती है। एक सप्ताह से जिला अस्पताल में फैक्टर की कमी है। इलाज के लिए पहुंच रहे पीड़ितों को रेफर करना पड़ रहा है। आशंका जताई कि अगर कोई पीड़ित गंभीर हादसे का शिकार हो जाए तो उसकी जान बचाना मुश्किल होगा।
लड़कों को ज्यादा होती है बीमारी
उप सिविल सर्जन ने बताया कि हीमोफीलिया बीमारी लड़कों में ज्यादा पाई जाती है। चोट लगने पर स्थिति गंभीर हो जाती है। चोट लगने पर खून का बहना बंद नहीं होता है। इससे मरीज की मौत भी हो सकती है। हीमोफीलिया अनुवांशिक बीमारी है। रक्त में विशेष प्रोटीन की कमी होती है। इससे मरीज में खून का थक्का जमाने वाला प्रोटीन फैक्टर नहीं बनता। इसकी वजह से चोट लगने पर लगातार खून बहता रहता है।
अस्पताल में हीमोफीलिया के फैक्टर खत्म हो गए हैं। सरकार को फैक्टर मंगाने के लिए मांग भेजी गई है। मुख्यालय से फैक्टर मिलने के लिए हीमोफीलिया के मरीजों को लगाने शुरू कर दिए जाएंगे। इसके बाद मरीजों की परेशानी खत्म हो जाएगी।
- डाॅ. नीरज यदव, उप सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग