गोहाना। गांव खानपुर कलां स्थित भगत फूलसिंह महिला विश्वविद्यालय की कर्मचारी संघर्ष समिति (शिक्षक एवं गैर-शिक्षक) के बैनर तले कर्मचारियों ने 4 माह से वेतन नहीं मिलने के विरोध में विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर शुक्रवार को धरना दिया।
धरने की अध्यक्षता समिति की अध्यक्ष डॉ. राजेश व संचालन सचिव प्रो. डॉ. सुमन ने किया। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को जुलाई से अक्तूबर तक का वेतन नहीं दिया गया है। वेतन नहीं मिलने के कारण वह काली दिवाली भी मना चुके हैं।
कर्मचारी संघर्ष समिति की अध्यक्ष डॉ. राजेश व प्रो. डॉ. सुमन ने बताया कि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुदेश, कुलसचिव प्रो. शिवालिक यादव को कई बार लिखित व मौखिक रूप से लंबित वेतन को जारी करवाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
कुलपति ने समिति को 27 अक्तूबर को कर्मचारियों से 10 दिन का समय देने की मांग की थी ताकि वह उनका लंबित वेतन दिलवा सकें। पहले भी दिवाली से पहले वेतन जारी करवाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उन्हें वेतन मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के वेतन वितरण में एक साल से अनियमितताएं बरती जा रही हैं। पहले भी नवंबर 2024 में तीन माह का एक साथ वेतन दिया गया था। ऐसे में कर्मचारी वर्ग विवश होकर धरना देने को मजबूर है।
समिति के सदस्यों ने बताया कि जब तक नियमित वेतन नहीं होगा, तब तक हमारा धरना प्रतिदिन दोपहर 3 से 4 बजे विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर जारी रहेगा।
सभी बच्चों को पढ़ने व अतिरिक्त जिम्मेवारियों को पूरा करते हुए यह रोष प्रदर्शन जारी रहेगा। वेतन नहीं मिलने, मजबूरन धरने के कारण विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय के नाम पर लोन देने से कतराने लगे बैंक
कर्मचारियों ने बताया कि सरकार एक ओर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात करती है लेकिन उत्तर भारत के एकमात्र महिला विश्वविद्यालय में महिलाएं व पुरुष कर्मचारी वेतन न मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। यहां तक कि बैंक भी अब विश्वविद्यालय के नाम पर लोन देने से कतराने लगे हैं। कई कर्मचारियों के बैंक लोन की ईएमआई न भर पाने के कारण उनके सिविल स्कोर भी प्रभावित हो चुके हैं, जिससे भविष्य में उन्हें वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। वेतन न मिलने के कारण समस्त कर्मचारी, उनके परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
ऋण, बच्चों की फीस, स्वास्थ्य बिल, घरेलू खर्च में हुए असमर्थ
कर्मचारी संघर्ष समिति की उप अध्यक्ष डॉ. इशानी, प्रो. सुरेंद्र मोर, प्रो. कृष्ण कुमार, मीडिया प्रभारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि सरकार विश्वविद्यालय के करीब 1355 कर्मचारियों के लिए 120 करोड़ रुपये सेलरी के लिए आवंटित करती है। इसमें 800 शिक्षक व गैर-शिक्षक कर्मचारी व 555 हरियाणा कौशल रोजगार निगम के कर्मचारी शामिल हैं। एक माह का वेतन करीब 9 करोड़ है। इस बार विश्वविद्यालय को अपर्याप्त बजट मिला है लेकिन एक वर्ष से वेतन की अनियमितताओं, लगातार 4 माह से वेतन लंबित रहने के कारण कर्मचारी ऋण, बच्चों की स्कूल फीस, स्वास्थ्य बिल, घरेलू खर्च जैसे आवश्यक दायित्व पूरे नहीं कर पा रहे हैं।
-मुझे अक्तूबर 2024 से वेतन नहीं मिला है। फार्मेसी विभाग में ईमानदारी से कार्य कर रहा हूं। 65 वर्ष की उम्र हो गई है, अगर वेतन नहीं मिलेगा तो आगे काम कैसे चलेगा। कुलपति से मांग है कि वह मामले में हस्तक्षेप कर कर्मचारियों को वेतन दिलवाएं। -डॉ. अरुण कुमार गुप्ता, फार्मेसी विभाग
-विश्वविद्यालय में कर्मचारियों के वेतन को लेकर एक वर्ष से अनियमितता बरती जा रही है। नवंबर 2024 में 3 माह का वेतन दिया गया था। अब जुलाई 2025 से वेतन नहीं मिला है। इस बार काली दिवाली मनाने पर विवश थे, घर में कुछ लाने के लिए पास कुछ नहीं था। वेतन न आने से कर्मचारियों का बजट बिगड़ चुका है। सभी परेशान हैं। -प्रियंका, कर्मचारी
-शिक्षक एवं गैर-शिक्षक का चार से वेतन नहीं मिला है। कई बार शिकायत दी जा चुकी है। दिवाली से पहले आश्वासन मिला था, लेकिन फिर भी काली दिवाली मनानी पड़ी। वेतन न मिलने का कारण सरकार की ओर से बजट नहीं मिलना बताया जा रहा है। हम शांतिप्रिय लोग है, लेकिन सभी के घरों में आर्थिक संकट आ चुका है। सरकार तक बात पहुंचाने के लिए रोजाना 3 से 4 धरना देंगे। -डॉ. यक्षिता बंसल, मैनेजमैंट विभाग
-सरकार ने वर्ष 2006 में उत्तर भारत का एकमात्र महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां में बनाया। इसमें 6 से 7 हजार छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। धरना देकर आमजन को भी जागरूक किया जाएगा। हमारी किसी से व्यक्तिगत परेशानी नहीं है, लेकिन कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन प्रदान किया जाए। सरकार से मांग है कि वह समय से कर्मचारियों को वेतन मुहैया करवाए। -प्रो. कृष्ण, मैनेजमैंट विभाग