फोटो :37:पांची गुजरान में स्थित इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग एवं चार्जिंग स्टेशन। संवाद
सोनीपत। जितना सामान्य ट्रक 103 रुपये में चलता है, उतनी दूरी तय करने में इलेक्ट्रिक ट्रक में 12 रुपये का खर्चा आता है। ऐसे में व्यय कम होने की स्थिति में आम जनता को ट्रांसपोर्ट में बचत होगी। फिलहाल नए विकल्प का आगाज अभी एक ही कंपनी ने किया है। अब कंपनी के हाथ में है कि इलेक्ट्रिक ट्रकों से ट्रांसपोर्ट में वह रेट में क्या बदलाव करती है।
गांव पांची गुजरान में देश के पहले वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग एवं चार्जिंग स्टेशन के स्थापित होने के बाद ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में बड़ा बदलाव बदलाव होने की उम्मीद है। इसके संकेत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी दे चुके हैं। यह तभी संभव है जब ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़ी अन्य कंपनियां डीजल की बजाय, बैटरी से संचालित ट्रकों के सड़क पर उतरें।
प्रतिस्पर्धा की स्थिति में कंपनियां ट्रांसपोर्ट के रेट कम करने के लिए विवश होंगी। ऐसे में इलेक्ट्रिक ट्रक को सड़कों पर लाना होगा। यहां ध्यान देने योग्य है कि बैटरी स्वैपिंग स्टेशन से ट्रकों की बिक्री नहीं है, बल्कि यह कंपनी का उपक्रम है। यहां से बैटरी से संचालित ट्रकों को चार्जिंग एवं कम समय में बैटरी बदलने की सुविधा मिलेगी।
पहले चरण में कंपनी ने 115 इलेक्ट्रिक ट्रकों की बुकिंग की है। इनमें 15 ट्रक आ गए हैं। अगले वर्ष 100 ट्रकों की डिमांड और की गई है। सोनीपत के बाद अगला इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग एवं चार्जिंग स्टेशन करनाल में स्थापित करने की योजना है।
इलेक्ट्रिक ट्रकों के संचालन में डीजल ट्रकों से 90 फीसदी तक भले ही कम खर्च आता है, लेकिन कीमत में 50 लाख तक का अंतर हैं। ट्रांसपोर्ट के खर्च में तत्काल कुछ कहना ठीक नहीं है, लेकिन पर्यावरण के क्षेत्र में सुधार जरूर होगा। एक साल में सड़कों पर बहुत बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक ट्रक दौड़ते देखे जाएंगे।
- राकेश, जीएम