सोनीपत। जिले में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से रविवार को हुई बारिश व ओलावृष्टि से कई गांवों में फसल में काफी नुकसान हुआ है। मंडी में भी खुले में पड़ा धान भीग गया, हालांकि दोपहर बाद धान सुखाने के बाद बिक्री शुरू की गई और करीब 13 हजार क्विटंल धान बिक गया। उधर, ओलावृष्टि व बारिश से सोनीपत व खरखौदा के आधा दर्जन से अधिक गांवों में काफी नुकसान हुआ है। कई गांवों में तो 75 से 90 फीसदी तक धान की फसल बर्बाद हो गई। इसे लेकर किसानों ने डीसी से मिलकर मुआवजे की मांग की है।
सोनीपत के गांव झरोठ, झरोठी, ककरोई, रोहट, खेड़ी दहिया, खांडा, नकलोई, निरथान, फतेहपुर, बिधलान, चौलका, कंवाली, थाना कलां, थाना खुर्द, भठगांव, सरगथल, कांसड़ा, कासंडी आदि में रविवार को ओलावृष्टि से फसल पर वितरित असर पड़ा था। वहीं जिले के अधिकतर क्षेत्रों में बारिश भी हुई। सोनीपत ब्लाक में जहां 16 एमएम बारिश हुई वहीं खरखौदा ब्लाक में 6 एमएम बारिश हुई। अन्य में हल्की बारिश दर्ज की गई। बारिश और ओलावृष्टि से धान व कपास की फसल पर काफी प्रतिकूल असर पड़ा। ऐसे में सोमवार सुबह ही किसान मुआवजे की मांग के लिए जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंच गए।
किसानों ने फसल बीमा कंपनी के खिलाफ जताया रोष
भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी बीमा कंपनी के खिलाफ भी रोष प्रकट किया। भारतीय किसान यूनियन के सत्यवान नरवाल ने बताया कि खरीफ सीजन में धान, बाजरा, कपास आदि फसलों का बीमा संबंधित योजना के तहत बीमा किया है। किसानों के खाते से प्रीमियम काटा गया है। परंतु अब जब किसानों को बारिश और ओलावृष्टि की वजह से नुकसान झेलना पड़ा है तो बीमा कंपनी किसानों की शिकायत लेने में आनाकानी कर रही हैं। भारतीय किसान यूनियन ने कृषि विभाग व संबंधित बीमा कंपनी द्वारा करवाई जाने वाली क्रॉप कटिंग प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने सरकार से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। इस दौरान ब्रहम सिंह दहिया, श्रद्धानंद सोलंकी, हरिप्रकाश, ईश्वर सिंह दहिया, देवेन्द्र सिसाना, बलबीर सिंह, राजेश दहिया, नरेन्द्र भदाना, लेखराम, छत्तर सिंह, राजेन्द्र, कर्मबीर, आनंद, जयसिंह, रामसिंह, राजबीर आदि मौजूद थे।
विधायक के साथ डीसी से मिले खरखौदा क्षेत्र के किसान
खरखौदा क्षेत्र क गांवों के किसानों ने विधायक जयवीर सिंह के साथ आकर उपायुक्त ललित सिवाच को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए स्पेशल गिरदावरी करवाते हुए तत्काल मुआवजा देने की मांग की है। विधायक ने कहा कि वर्तमान में बारिश का पानी खेतों में भरा है। जिसमें धान, बाजरा व कपास के साथ ही अन्य फसल प्रभावित हुई हैं। कई खेतों में घुटनों तक पानी भरा है। जिसमें धान में 100 फीसदी तक नुकसान हुआ है। किसानों के नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। वहीं खांडा व चौलका के किसानों ने सोमवार को एसडीएम खरखौदा से मिलकर खेतों से पानी निकासी करवाने की मांग की है, ताकि वह आगामी फसल की बुआई कर सकें।
धान की कटाई के साथ गेहूं की बिजाई भी प्रभावित होगी
किसान सुरेंद्र, देवेंद्र, रणबीर, दयानंद ने बताया कि धान की फसल पूरी तरह पानी में डूबी है। अगर एक-दो दिन में निकासी नहीं हुई तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। साथ ही अब गेहूं की बिजाई पर संकट गया है। ऐसे हालात में गेहूं की बिजाई में काफी देरी होगी। जिससे गेहूं के उत्पादन भी असर पड़ेगा।
सोनीपत मंडी में बिका 12,800 क्विंटल धान
बारिश के चलते हालांकि सोमवार को धान की बिक्री दोपहर के समय शुरू हो सकी। इससे पहले किसान अपने धान को सुखाते नजर आए। मंडी में सोमवार को 11 हजार क्विंटल बासमती धान की बिक्री की गई और 1800 सौ क्विंटल पीआर धान की बिक्री हुई।
किसान बोले-
खेतों में पानी भरा होने के साथ ही ओलावृष्टि से भी अब नुकसान हुआ है। तत्काल विशेष गिरदावरी कर मुआवजा दिया जाए। जिससे किसान को आर्थिक संकट से बचाया जा सके।
- मुकेश
पानी व ओलावृष्टि से फसल नष्ट हो गई है। खेत में नष्ट हुई फसलों को खेतों से बाहर निकालने में भी किसान को पैसा खर्च करना होगा। सरकार को तत्काल प्रभाव से मुआवजा देना चाहिए।
- देवेंद्र
प्राकृति आपदा ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालात ऐसे हैं कि अब सरकार से ही उम्मीद की जा सकती है। सरकार को मुआवजा राशि देने के साथ ही खेतों में जमा पानी की भी निकासी करवानी चाहिए।
-देवेंद्र कुमार
बारिश व ओलावृष्टि से फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। खेतों में अभी भी घुटनों तक पानी भरा है। ऐसे में अगर एक-दो दिन में निकासी नहीं हुई तो फसल 100 फीसदी तक बर्बाद हो जाएगी। साथ ही गेहूं की बिजाई भी नहीं हो सकेगी।
- युद्धवीर
वर्जन -
मंडी में धान की फसल भीगने का ज्यादा असर नहीं हुआ। सोमवार को 12800 क्विंटल धान की बिक्री हुई है। किसानों ने फसल पर तिरपाल डाल लिया था। जिसके चलते नुकसान से बचाव हो गया।
- जितेंद्र कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी सोनीपत
वर्जन-
बारिश व ओलावृष्टि से खेतों में फसल को नुकसान है। किसानों को अपने खेतों में भरे पानी को तुरंत निकालना चाहिए। जिससे नुकसान को कम किया जा सकता है।
- डॉ. अनिल सहरावत, जिला कृषि उप निदेशक, सोनीपत