सोनीपत। छोटूराम आर्य महाविद्यालय (सीआरए) में शनिवार को राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों, सिद्धांतवादियों ने भारत में चुनावी गतिशीलता ‘अवसर और चुनौतियां’ विषय पर अपने विचार रखे। भारत की चुनाव प्रक्रिया में सुधार के उपाय सुझाए। निदेशक, उच्चतर शिक्षा से स्वीकृति मिलने पर भारत जागरूकता अभियान राष्ट्रीय मंचन की शुरुआत टीकाराम एजुकेशन सोसाइटी के प्रधान सुरेंद्र सिंह दहिया ने की। राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रो. रणबीर सिंह गुलिया (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, राजनीति शास्त्र विभाग, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक) बतौर मुख्यातिथि पहुंचे।
मुख्यातिथि डॉ. रणबीर सिंह गुलिया ने कहा कि आचार संहिता का सख्ती से पालन किया जाए ताकि लोगों की चुनाव में मान्यता बनी रहे। मुख्य वक्ता डॉ. कुशल पाल (एचओडी राजनीति शास्त्र विभाग, दयाल सिंह कॉलेज, करनाल) ने कहा कि लोकतंत्र व चुनाव दोनों अलग-अलग हैं। अक्सर लोग दोनों को एक ही मान बैठते हैं। जिस कारण जागरूकता के अभाव में चुनाव प्रक्रिया में सुधार सिरे नहीं चढ़ पाते हैं। इस दौरान उन्होंने नोटा को वैज्ञानिक विधि द्वारा सफल बनाने के भी सुझाव दिए। कार्यक्रम में चेयरपर्सन की भूमिका में डॉ. राजेश हुड्डा (एचओडी कानून विभाग, भगत फूल सिंह विश्वविद्यालय, खानपुर कलां, सोनीपत) ने भी इस विषय में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान सीआरए महाविद्यालय के प्रोफेसर विक्रम तुषीर को सर्वश्रेष्ठ कागज प्रस्तुति (बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन) के पुरस्कार से नवाजा गया।
सीआरए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह व कार्यक्रम की निरीक्षक डॉ. ऊषा दहिया ने ऑनलाइन आकर अतिथियों का स्वागत किया। राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी को सफल बनाने में तकनीकी सहायक समूह में प्रो.अजमेर सिंह, प्रो. श्वेता, डॉ. तमन्ना, प्रो. रितु, विशाल व कार्यक्रम कमेटी में प्रो. विक्रम तुषीर, प्रो. कीर्ति, प्रो. कविता, डॉ. पूनम व डॉ. नवीन कुमार का सहयोग रहा।