गोहाना को जिला बनाने की फाइल सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दी है। प्रदेश की भाजपा सरकार गोहाना को जिला बनाने के लिए गंभीर नहीं है। छह माह से उपमंडल को जिला बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन से कोई पत्राचार नहीं किया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा 2019 में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तरह विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गोहाना में रैली करके जिला बनाने का कार्ड खेल सकती है, क्योंकि गोहाना की धरती से दिया गया राजनीतिक संदेश पूरे प्रदेश में असर करता है।
बता दें कि करीब तीन दशकों से गोहाना को जिला बनाने का लालीपॉप देकर वोट हथियाई जा रही हैं। मौजूदा भाजपा सरकार ने भी दादरी, हांसी और गोहाना को जिला बनाने के लिए कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी, लेकिन सीएम ने रैली कर दादरी को जिला बनाने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही गोहाना व हांसी का इंतजार और बढ़ गया।
1826 में गोहाना को मिला था तहसील का दर्जा
वर्ष 1826 में गोहाना को तहसील का दर्जा दिया था। वर्ष 1966 में हरियाणा को राज्य का दर्जा मिलने के बाद गोहाना को कभी रोहतक जिला तो कभी सोनीपत जिला के साथ जोड़ा गया। गोहाना को जिले का दर्जा दिलाने के लिए वर्ष 2006 में क्षेत्र के लोगों ने जिला बनाओ संघर्ष समिति गठित की गई। समिति के अध्यक्ष जयपाल मलिक के नेतृत्व में आंदोलन शुरू किया गया।
जिला बनाना इसलिए जरूरी
यहां दो विधानसभा क्षेत्र गोहाना व बरोदा हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 84 गांव शामिल हैं। आबादी के हिसाब से गोहाना हरियाणा के पंचकूला और पलवल जिले से बड़ा है। आबादी तीन लाख से अधिक तथा क्षेत्रफल 1011 वर्ग किमी से अधिक है।
अब क्या है स्थिति
गोहाना में एसडीएम व डीएसपी ही बैठते हैं। लोगों को डीसी या एसपी से कार्य के सिलसिले में मिलने के लिए सोनीपत जाना पड़ता है। गोहाना में एडीजे की कोर्ट नहीं है। इसलिए गोहाना के वकील और केस से जुड़े लोगों को सोनीपत कोर्ट में जाना पड़ता है। गोहाना से सोनीपत की दूरी करीब 38 किलोमीटर है। जब अधिकारी गोहाना में बैठेंगे तो लोगों का समय पैसा दोनों की बचत होगी।
कितना एरिया होगा, अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं
गोहाना को जिला बनाने पर अन्य क्षेत्र कौन से शामिल होंगे, अभी यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। गोहाना से सबसे अधिक क्षेत्र जींद जिले का जुड़ा हुआ है। इसलिए जब भी जिला बनाने का सिलसिला शुरू होता है तो जींद जिले के जुलाना और सफीदों क्षेत्र को जोड़ने की चर्चा शुरू हो जाती है। दोनों ही क्षेत्र के लोगों ने इसका विरोध भी किया है। ऐसे में गोहाना उपमंडल को ही जिले का दर्जा दिया जाता है तो जिले की सीमा मुख्यालय से 15 से 18 किलोमीटर तक ही रहेगी। जिला बनाने के लिए क्षेत्रफल आबादी कितनी होनी चाहिए, इसकी कोई सीमा तय नहीं है। इसलिए गोहाना को जिला बनाने में सरकार को कोई बाधा नहीं है। गोहाना जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयपाल मलिक ने बताया कि वर्ष 1995 में पंचकूला को जिला बनाया गया। उस समय एक ही हल्का कालका था, जिसकी आबादी करीब 1.27 लाख थी। क्षेत्रफल करीब 897 वर्ग किमी है। वहीं, जबकि गोहाना की आबादी तीन लाख से अधिक है।
ये बोले नेता
गोहाना के साथ हर मामले में भेदभाव कर रही है सरकार : जगबीर
कांग्रेस विधायक जगबीर सिंह मलिक का कहना है कि सरकार गोहाना के साथ हर मामले में भेदभाव कर रही है। लाठ-जौली गांव में रेल कोच फैक्टरी बनाई जानी थी, लेकिन सरकार ने यहां का प्रोजेक्ट रद्द कर दिया। अब दोबारा जमीन मांगी गई तो यहां जिक्र तक नहीं किया गया। इसी प्रकार गोहाना को जिला बनाने में भेदभाव किया जा रहा है। जब सरकार ने गोहाना, दादरी व हांसी को जिला बनाने की सिफारिश की थी तो दादरी के साथ ही गोहाना व हांसी को भी जिला बनाया जाना चाहिए था। सरकार उन इलाकों के साथ भेदभाव कर रही है, जहां भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विकास कार्य कराए।
सरकार गोहाना के प्रति गंभीर : जांगड़ा
गोहाना में सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे रामचंद्र जांगड़ा का कहना है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर गोहाना के विकास को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि गोहाना में रैली कर मुख्यमंत्री ने अभी कुछ दिन पहले ही करोड़ों रुपयों की सौगात दी थी। जहां तक गोहाना जिला बनाने की बात है, यह मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है। मुख्यमंत्री ने बिना मांग किए गोहाना को जिला बनाने की सिफारिश कर रखी है। कमेटी को इसका कार्य सौंपा गया है।
किलोई को गोहाना से जोड़कर बना दें जिला
वैसे तो गोहाना के साथ बिना कोई क्षेत्र जोड़े इसे जिला बनाया जा सकता है। लेकिन सरकार अगर एरिया जोड़ना चाहती है तो किलोई को इसके साथ जोड़ना चाहिए। एक तो क्षेत्र का किलोई के लोगों के साथ लगाव अधिक है। दूसरा किलोई के गांव भी गोहाना सीमा से जुड़े हुए है। भाजपा सरकार से पूरी उम्मीद है कि गोहाना को जिला का दर्जा मिलेगा। लेकिन सरकार पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं होने के कारण जिला बनने की संभावनाएं कम नजर आ रही हैं।
जयपाल मलिक, अध्यक्ष गोहाना जिला बनाओ संघर्ष समिति
छह माह से नहीं कोई पत्राचार : एसडीएम
एसडीएम अजय कुमार का कहना है कि गोहाना को जिला बनाने संबंधी छह माह से सरकार के साथ कोई पत्राचार नहीं हुआ है। यह सरकार का काम है कि कब किस क्षेत्र को जिला बनाना है या नहीं। सरकार ने अप्रैल माह में उनसे जो रिपोर्ट मांगी थी, वह सरकार के पास बनाकर भेज दी थी। रिपोर्ट में गोहाना के क्षेत्रफल, आबादी व अन्य जानकारी मांगी गई थी। अब यदि सरकार कोई अन्य जानकारी मांगेगी तो तुरंत उपलब्ध करा दी जाएगी।
प्रॉपर्टी डीलरों की हालत कमजोर
गोहाना को जिला बनाने की चर्चा के बाद प्रॉपर्टी डीलरों ने काफी जमीनें खरीद रखी हैं। अब गोहाना को जिला बनाने की संभावनाएं कम होने से उनमें हड़कंप मचा हुआ है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने गोहाना को जिला नहीं बनाया तो वे बर्बाद हो जाएंगे। काफी से प्रॉपर्टी बाजार ठंडा पड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि गोहाना को अविलंब जिला बनाया जाए।