फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पेपर सॉल्वर गैंग: अभ्यर्थियों का डाटा जुटाने के लिए एमडीयू रोहतक में रहता था सुशील, कैंटीन व दूध की दुकान पर बैठता था

Sat, 12 Mar 2022 08:02 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

आरोपी अभ्यर्थियों के फार्म भरवाने के बहाने भी संपर्क करता था पहले से भी आपराधिक रिकॉर्ड है। आरोपी सतीश और अमित भी युवकों को पेपर सॉल्व कराने के नाम पर संपर्क करते थे।
विज्ञापन
पेपर सॉल्वर गैंग के आरोपी एसटीएफ के साथ। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा में पेपर सॉल्वर गैंग के तीनों आरोपी अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनके पेपर सॉल्व कराने के लिए सौदा करते थे। आरोपी सुशील ने तो अभ्यर्थियों से संपर्क के लिए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (मदवि) रोहतक में डेरा डाल रखा था। उसने अपनी लैब भी बना रखी है। इसके साथ ही उसके साथी सतीश व अमित भी अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के लिए संपर्क कर उन्हें गैंग से जोड़ते थे। 

विज्ञापन


एसटीएफ सोनीपत प्रभारी इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने बताया कि पानीपत में दर्ज मुकदमे में गिरफ्तार आरोपी सुशील, सतीश और अमित पेपर सॉल्वर गैंग से लंबे समय से जुड़े हैं। आरोपी हैकिंग सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से पैसे लेते हैं। आरोपी सुशील गैंग से जुड़ने के बाद अभ्यर्थियों का डाटा एकत्रित करने के लिए रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में रहने लगा था।

आरोपी कभी कैंटीन में बैठने लगता तो कभी दूध के बूथ पर। वह अभ्यर्थियों को फार्म भरने में मदद करता था। इसी दौरान बहाने से वह उनसे पेपर सॉल्व कराने का सौदा करता था। इसके लिए वह गैंग के अन्य सदस्यों से भी मिलवाता था। एसटीएफ प्रभारी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि सुशील का पहले आपराधिक रिकॉड रहा है। वह हत्या के प्रयास व लूट के मामलों में नामजद रह चुका है। आरोपी छह माह से फरार चल रहे थे। 
विज्ञापन


एक ही गांव के हैं डाकिया अमित और सतीश 
गिरफ्तार आरोपी अमित और सतीश एक ही गांव के हैं। वे दिल्ली में कोचिंग लेते हुए रोबिन गैंग के सदस्यों से मिले थे। उसके बाद उनके साथ जुड़कर पेपर सॉल्वर गैंग के साथ काम करने लगे। सतीश की जहां अपनी लैब है, वहीं अन्य में हिस्सा भी है। अमित 2016 से डाक विभाग में डाकिया है। एसटीएफ पता लगा रही है कि वह विभाग में आने वाले परीक्षा प्रवेश पत्रों पर लिखे पते देखकर अभ्यर्थियों से संपर्क तो नहीं करता था। इसे लेकर रिमांड के दौरान पूछताछ की जाएगी। 

सोनीपत से जयपुर तक लैब का लगा पता 
पुलिस जांच में सामने आया है गिरफ्तार आरोपी सतीश और सुशील की अपनी लैब के साथ अन्य लैबों में साझेदारी है। आरोपियों का करीब 22 लैब में अलग-अलग प्रतिशत शेयर है। उनकी लैब सोनीपत, पानीपत, दिल्ली व जयपुर में हैं। 

गैंग में 100 सक्रिय सदस्य, 300 की संलिप्तता का लगा पता 
एसटीएफ प्रभारी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि मामले में गैंग के करीब 100 सक्रिय सदस्य हैं। गैंग में शामिल करीब 300 लोगों का पता लग चुका है। 29 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें पांच अभ्यर्थी भी शामिल हैं। अब अन्य अभ्यर्थियों पर शिकंजा कसा जाएगा। 

रूस के आरोपियों को पकड़ने के लिए इंटरपोल की लेंगे मदद 
सतीश देशवाल ने बताया कि मामले में पूरी लैब को हैक करने के आरोपी रूस से मिले थे। अब उनकी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल की मदद ली जाएगी। उनको रेड कॉर्नर जारी कराकर लुक आउट नोटिस जारी कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में तीन मुकदमे एसटीएफ के पास दर्ज हैं। जिसमें पानीपत के साथ ही रेवाड़ी व धारूहेड़ा के मुकदमे हैं। इसके साथ ही सीबीआई, दिल्ली स्पेशल सेल व पंजाब पुलिस भी अपने मामलों में जांच कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें