हरियाणा के सोनीपत में गन्नौर के बादशाही रोड स्थित घर के अंदर बनी फैक्टरी में चार साल से कैंसर की नकली दवा बनाने का धंधा चलता रहा, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। यहां से हर माह कैंसर की नकली दवा तैयार कर गाड़ियों में लोड होकर भेजी जाती रही। घर में चल रही दवा कंपनी पर अधिकारी नियमानुसार निगरानी नहीं रख सके। फूड सप्लीमेंट के नाम पर स्टेरॉयड खिलाया जाता रहा।
कंपनी की तरफ से वार्षिक रिपोर्ट तक प्रस्तुत नहीं की गई। दवा बनाने के लिए कच्चा माल खरीदे या तैयार माल की बिक्री की जानकारी की रिपोर्ट तक फैक्टरी में नहीं मिली। सोनीपत में पहले भी तीन दवा कंपनियों में नशीला पदार्थ मिल चुका है। उसके बाद भी अफसर सतर्क नहीं हुए।
दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम और ड्रग विभाग के गाजियाबाद, नोएडा व बुलंदशहर के अधिकारियों ने कैंसर की नकली दवा बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी थी। जिसके बाद पता लगा था कैंसर की नकली दवा सोनीपत के गन्नौर में बादशाही रोड पर बनाकर भेजी जा रही थी। टीम ने यहां छापा मारकर कार्रवाई करते हुए बादशाही रोड स्थित आरडीएम बायोटेक कंपनी से मालिक रामकुमार को गिरफ्तार किया था।
वह फूड सप्लीमेंट बनाने के नाम पर घर के अंदर ही फैक्टरी चला रहा था। फैक्टरी में नियम अनुसार दवा व खाद्य पदार्थ की निर्माता कंपनियों का निरीक्षण करना होता है। दवा व फूड सप्लीमेंट के निर्माण और इनको बनाने के लिए प्रयुक्त कच्चे माल की जांच करनी होती है। उनके सैंपल लेकर जांच को भेजे जाते हैं। उसके बावजूद सामने आया है कि अधिकारी जांच ही नहीं करते हैं। जिले में कई बार गड़बड़ी सामने आने के बावजूद अधिकारियों ने निरीक्षण जरूरी नहीं समझा।
आसपास के लोगों ने बताया कि पहले वह तीन मंजिला घर में पहली मंजिल पर अपने माता-पिता, पत्नी व दो बच्चों, भाई-भाभी के रहते थे। उनके भाई-भाभी के पास कोई बच्चा नहीं था। लोगों ने बताया कि परिवार के सदस्य कम ही बाहर आते थे। दो साल पहले रामकुमार अपने परिवार को लेकर यहां से चला गया था। उसके बाद वह दिन में कुछ घंटे ही आकर यहां पर दवा बनाता था। घर में ग्राउंड फ्लोर पर फैक्टरी थी और तीसरी मंजिल को गोदाम के रूप में प्रयोग किया जाता था।
सोनीपत में पहले भी पकड़ी गई थी फैक्टरी
गृह मंत्री अनिल विज के निर्देश पर सोनीपत में 25 मई को छापा मारा गया था। छापा मार कार्रवाई में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए), आयुष विभाग और हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एचएसएनसीबी) की संयुक्त टीमों ने रात को राई, कुंडली और मुरथल की पांच आयुर्वेदिक फैक्ट्रियों में छापा मार कार्रवाई की थी। उस दौरान राई स्थित फैक्टरी में 67 किलो भांग घन बरामद किया गया था।
वहीं कुंडली में अफीम के कोटे का गलत प्रयोग कर दवाई बनाई जाती मिली पकडी गई थी। दोनों फैक्टरी मालिकों को गिरफ्तार किया गया था। टीम राई औद्योगिक क्षेत्र में स्थित वर्ल्ड ऑफ हेम्प ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड में पाया था कि 12 टन हेंप (भांग) का कोटा लिया था और उसका दुरुपयोग कर बिना अनुमति के दो टन भांग का एक्सट्रैक्शन (निष्कर्षण) विधि से 67 किलोग्राम भांग घन बना दिया। वहीं रिडले लाइफ साइंस प्राइवेट लिमिटेड कुंडली में छापा मारा था। वहां अफीम के कोटे का गलत इस्तेमाल होना पाया गया। यह कंपनी अफीम से औषधि बनाने और उससे बनी औषधि की बिक्री का कोई पुख्ता सुबूत नहीं दिखा सकी।
इस दौरान दो अन्य कंपनियों भारतीय आयुर्वेदिक फार्मेसी कुंडली और सुखदर्शन आयुर्वेदिक फार्मेसी राई की जांच में टीमों को निर्माण, टेस्टिंग और बिक्री के रिकॉर्ड का पालन होता नहीं मिला था। उसके बाद भी अधिकारियों ने अन्य में जाकर जांच नहीं की।
कफ सिरप की कंपनी के घटनाक्रम से भी नहीं लिया सबक
गाम्बिया में भी कफ सिरप पीने से 66 बच्चों की मौत हो गई थी। वह दवा भी सोनीपत के कुंडली में स्थित कंपनी में बनी थी। उसके बाद भी कोई सबक नहीं लिया गया। पता लगा था कि उस कंपनी में भी लंबे समय से जांच नहीं हुई थी। बताया जा रहा है कि जिले में इस तरह की 50 से अधिक कंपनी है। जिनका समय पर निरीक्षण नहीं होता।
तीन-चार दिन में तैयार माल की गाड़ी भेजी जाती
क्षेत्र में रहने वाली महिला ने बताया कि फैक्टरी से तीन-चार दिन में एक गाड़ी तैयार माल लेकर जाती था। यहां दवा बनाने के लिए 15 से 20 दिन में मक्की का आटा व अन्य सामान आता था।
सभी दवा निर्माता कंपनियों को मानक का पालन करने के निर्देश दिए हैं। टीम बनाकर कंपनियों का निरीक्षण किया जा रहा है। कंपनियों को कच्चे माल की खरीद और तैयार माल की रिपोर्ट नियमित रूप से प्रस्तुत करनी होती। मामले में आयुर्वेद विभाग की टीम कार्रवाई कर रही है।
-वीरेंद्र सिंह गहलावत, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी, एफडीए