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स्वच्छता रैंकिंग : 132 पायदान लुढ़का सोनीपत, देश में 235वां स्थान मिला

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सोनीपत में सब्जी मंडी के पास सड़क किनारे उठान नहीं होने के कारण लगा कूड़े का ढेर। संवाद - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। स्वच्छता रैंकिंग के मामले में एक वर्ष में सोनीपत शहर 132 पायदान पिछड़ गया है। एक साल पहले जहां सोनीपत को स्वच्छता रैंकिंग में 103वां स्थान मिला था, वहीं शनिवार को जारी हुई वर्ष 2021 की रैंकिंग में यह लुढ़कर देश में 235वें स्थान पर पहुंच गया है। एक साल पहले तक निगम बिना सरकार के चल रहा था, जबकि एक साल पहले की निगम की पहली सरकार बन गई थी। दिसंबर में हुए चुनावों के उपरांत निगम को मेयर और पार्षद मिल गए थे। वह शहर की समस्याओं के लिये आवाज उठा रहे हैं, इसके बावजूद निगम की स्वच्छता रैंकिंग इस 1 साल में 132 पायदान लुढ़क गई है। इसका सबसे बड़ा कारण शहर में सड़कों पर लगे रहने वाले कूड़े के ढेर हैं। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित शौचालयों पर ताले लटके रहते हैं।
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स्वच्छ भारत अभियान के तहत वर्ष 2017 से शहरों को रैंकिंग देने की शुरुआत की गई थी। उस समय स्वच्छ भारत अभियान की रैंकिंग में सोनीपत 243वें स्थान पर आया था। वर्ष 2018 में सोनीपत की रैंकिंग में सुधार हुआ और यह 156वें पायदान पर पहुंच गया था। वर्ष 2019 में स्वच्छता सर्वेक्षण में सोनीपत शहर पिछड़कर देश में 161वें स्थान पर चला गया था। उसके बाद वर्ष 2020 में काफी सुधार के बाद देश में सोनीपत को 103वां स्थान मिला था। लेकिन इस बार यह 235वें स्थान पर पहुंच गया है। सोनीपत में अधिकारियों की अनदेखी के कारण सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। शहर के सार्वजनिक स्थानों पर बनाए गए शौचालयों पर ताले लटके रहते है। जिसके चलते सोनीपत पिछड़ गया।
बैठक में मेयर व पार्षद सफाई व्यवस्था पर उठा चुके सवाल
डीआरडीए हॉल में 10 सितंबर को हुई निगम की हाउस की बैठक में मेयर निखिल मदान व पार्षदों ने सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इससे पहले हुई बैठकों में भी ठेका कंपनी को लचर सफाई व्यवस्था का जिम्मेदार ठहराया गया था। इस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की बातें भी कही गई थी, लेकिन अभी तक इस कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कंपनी पर तय की गई राशि से अधिक राशि लोगों से वसूलने के भी आरोप लगे थे। इन सबके बावजूद कंपनी का काम ना तो लोगों को पसंद आ रहा और न ही शहर की सरकार को। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर सफाई का ठेका उसी कंपनी को देना बड़ा सवाल है। शहर में 8 डंपिंग प्वाइंट बनाए जाने थे, जबकि 50 से अधिक डंपिंग प्वाइंट कूड़ा इकट्ठा करने की बजाय फैलाने का काम ही कर रहे हैं। एक अन्य कंपनी को आधे शहर का ठेका दिए जाने के बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है।
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यहां कमजोर रह गए
- कचरा उठान में पीछे रह गए। निगम के सभी घरों से कचरा उठाया जाना था, उसमें भी असफल रहे।
- वैसे तो सोनीपत को ओडीएफ प्लस प्लस का सर्टिफिकेट मिला हुआ है। इसके बावजूद सार्वजनिक शौचालयों पर ताला लटका रहता है।
- राजनीति की वजह से शहर स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ा है। एकजुट होकर काम नहीं हुआ।
- ठेका कंपनी की ओर से काम बेहतर नहीं हुआ, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। साथ ही सफाई के मामले में हालात नहीं सुधर पाते।
वर्जन
इस साल मुरथल में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की शुरुआत कर दी गई है। अब शहर के साथ पानीपत से भी कूड़ा पहुंच रहा है। अगले वर्ष होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण के बाद सोनीपत शहर में बेहतर परिणाम होंगे। पूरे निगम क्षेत्र में डोर टू डोर कूड़ा उठान शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद लोगों को कूड़ा फेंकने बाहर नहीं जाना पड़ेगा। शौचालयों की सफाई व्यवस्था बेहतर रखी जाएगी।
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- सतपाल सैनी, मुख्य सफाई निरीक्षक नगर निगम
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