सोनीपत। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में विद्यार्थियों के साथ बड़ा खेल किया जा रहा है। जहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों से इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 3500 रुपये हर साल लिए जाते हैं। जिसके लिए वहां निजी कंपनी का वाई फाई सिस्टम लगवाया गया है जो अधिकतर ठप रहता है तो उससे एक विद्यार्थी को केवल 34 एमबी ही डाटा दिया जाता है। जिससे विद्यार्थी कुछ भी पढ़ाई करने के लिए एक पेज डाउनलोड करते हैं तो वह डाटा खत्म हो जाता है। जबकि बीएसएनएल ने केवल 98 रुपये महीने में अनलिमिटेड इंटरनेट देने के लिए दावा कर दिया है और इसके लिए वीसी को पत्र तक भेजा गया है। इस तरह जहां 291 रुपये महीने के खर्च करने के बावजूद विद्यार्थियों को खानापूर्ति के लिए केवल 34 एमबी डाटा मिल रहा है, जबकि 98 रुपये में अनलिमिटेड डाटा मिल सकता है। इसके बावजूद निजी कंपनी को बढ़ावा देने का खेल चल रहा है और बीएसएनएल के टेंडर की फाइल को दबा दिया गया है।
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में विद्यार्थियों को मोबाइल व लैपटॉप में इंटरनेट सुविधा देने के लिए वाई फाई सिस्टम शुरू किया गया था। जिसके लिए यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले लगभग 4 हजार विद्यार्थियों से 3500 रुपये एक साल के लिए गए जो हर महीने के हिसाब से 291 रुपये पड़ रहे हैं। लेकिन अब यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। क्योंकि उन्होंने यूनिवर्सिटी में इंटरनेट की मदद से पढ़ाई करने के लिए 3500 रुपये दिए थे और उसके बावजूद वह इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण है कि यूनिवर्सिटी में एक निजी कंपनी का वाई फाई सिस्टम लगवा दिया गया जो एक विद्यार्थी को केवल 34 एमबी डाटा देती है। यूनिवर्सिटी में वाई फाई से इंटरनेट लॉग इन करते ही साफ कहा जाता है कि वह केवल 34 एमबी डाटा इस्तेमाल कर सकते हैं। जब विद्यार्थी कोई भी विषय से संबंधित एक पेज डाउनलोड कर लेते हैं तो इंटरनेट तुरंत बंद हो जाता है। ऐसे में विद्यार्थी परेशान हो गए हैं और इसको लेकर ही विद्यार्थियों ने बुधवार को रोष भी जताया। क्योंकि वह इंटरनेट को पढ़ाई के लिए इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं और उनके 3500 रुपये भी चले गए हैं।
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निजी कंपनी के नाम पर हो रहा खेल, विज्ञापन से भी कमाई
यूनिवर्सिटी में इस समय एक निजी कंपनी का वाई फाई सिस्टम लगा हुआ है और उसके सहारे ही इंटरनेट चलाया जा रहा है। इस समय वह कंपनी ट्रायल के तौर पर यूनिवर्सिटी को फ्री में सुविधा उपलब्ध करा रही है। लेकिन विद्यार्थियों का कहना है कि ऐसी सुविधा उनको नहीं चाहिए, जिससे उनको कुछ फायदा ही नहीं हो। जब वह इंटरनेट के सहारे कुछ पढ़ाई तक नहीं कर सकते हैं और वह एक पेज डाउनलोड करते ही बंद हो जाता है तो ऐसी कंपनी का इंटरनेट उनको नहीं चाहिए। वहीं वाई फाई लॉगइन करते ही निजी कंपनियों के विज्ञापन शुरू हो जाते हैं और इस समय भले ही इंटरनेट ट्रायल के तौर पर यूनिवर्सिटी को फ्री उपलब्ध कराया जा रहा हो, लेकिन चार हजार विद्यार्थियों के नाम पर विज्ञापन के सहारे कमाई हो रही है। वहीं एक सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि जब इस समय फ्री में इंटरनेट सुविधा यूनिवर्सिटी को मिल रही है तो विद्यार्थियों से रुपये क्यों लिए गए हैं।
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बीएसएनएल की 98 रुपये में अनलिमिटेड इंटरनेट की फाइल दबाई
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में वाई फाई के सहारे इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ठेका छोड़ा जाना है और उसके लिए डेढ़ महीने पहले टेंडर मांगा गया था। यूनिवर्सिटी में कोई भी टेंडर रजिस्ट्रार या किसी भी अधिकारी के पद के आधार पर मांगा जाता है। लेकिन यूनिवर्सिटी में यह टेंडर एक नाम से मांगा गया है। जिसमें बीएसएनएल व निजी कंपनी ने टेंडर डाले और बीएसएनएल ने केवल 98 रुपये प्रति माह में अनलिमिटेड इंटरनेट सुविधा देने का टेंडर डाल दिया। जिससे मामला फंस गया और निजी कंपनी के मुकाबले बीएसएनएल का टेंडर कम होने के कारण उसे ही मिलना लाजमी है। इस कारण डेढ़ माह से वह फाइल ही दबी हुई है, जबकि विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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यूनिवर्सिटी को इस समय इंटरनेट फ्री मिल रहा है। लेकिन यह जरूर है कि डाटा कम था और उसको एक जीबी तक करने के लिए मैने कहा था। क्योंकि कंपनी ने काफी रुपया यूनिवर्सिटी में खर्च किया है तो उसपर तुरंत कोई फैसला लेना ठीक नहीं होगा। यह पूरा मामला मेरी जानकारी में आया हुआ है। इसमें डाटा बढ़वाया जाएगा और ऐसा नहीं होता है तो इसका कोई दूसरा समाधान निकाला जाएगा। विद्यार्थियों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
-प्रो. राजेंद्र अनायत, वीसी मुरथल यूनिवर्सिटी
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मुरथल यूनिवर्सिटी में कोई निजी कंपनी इंटरनेट उपलब्ध करा रही है तो उसमें इतना कम डाटा मिलने से विद्यार्थियों को कोई फायदा ही नहीं हो रहा है। बल्कि वह कंपनी उस डाटा को शुरूआत में निजी विज्ञापनों के प्रचार में खत्म कर देती है और वह यूनिवर्सिटी से बड़ा फायदा उठा रही है। वहां वाई फाई के लिए टेंडर मांगे गए थे तो बीएसएनएल व उस निजी कंपनी ने टेंडर डाले हैं। जिनमें बीएसएनएल का टेंडर इतना कम है कि वह निजी कंपनी अनलिमिटेड इंटरनेट इतना कम कभी नहीं दे सकती है। इस कारण ही टेंडर की फाइल दबाई जा रही है, जबकि यूनिवर्सिटी भी सरकारी है और बीएसएनएल भी सरकारी है। वहां से आने वाला रुपया भी सरकार के पास ही जाएगा।
-वाईके त्यागी, एजीएम बीएसएनएल