केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रदूषण कम करने के लिए पहल शुरू कर दी गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदेश के 14 जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में रखे जनरेटर और एंबुलेंस में बदलाव की योजना है। प्रदूषण कम करने के लिए एंबुलेंस को इलेक्ट्रिक वाहन में तब्दील किया जाएगा। साथ ही जेनरेटरों में रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से सभी सिविल सर्जन को निर्देश जारी कर 28 अक्तूबर तक रिपोर्ट मांगी गई है।
सभी सरकारी अस्पताल व सामुदायिक केंद्रों में जनरेटरों की सुविधा है। बिजली गुल होने के बाद मरीजों की सुविधा के लिए इन जनरेटरों का इस्तेमाल किया जाता है। डीजल जनरेटरों से निकलने वाले धुएं से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाने का निर्णय लिया है। साथ ही सभी एंबुलेंसों को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील किया जाएगा। इसको लेकर बोर्ड की ओर से इन प्रक्रिया को शुरू करने के लिए कदम उठाया गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने पिछले सप्ताह सोनीपत, पानीपत, करनाल, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, झज्जर, रोहतक, चरखी दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, जींद के सिविल सर्जनों के अलावा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की थी।
उस दौरान सभी जनरेटरों व एंबुलेंस का डाटा मांगा गया था। इसको लेकर सभी सिविल सर्जनों की तरफ से अपने-अपने जिले के अस्पतालों में रखे जनरेटरों व एंबुलेंस का डाटा 28 अक्तूबर तक भेजा जाना है। एंबुलेंस के इलेक्ट्रिक वाहन में तब्दील होने के बाद पेट्रोल व डीजल से छुटकारा मिलेगा।
अस्पतालों में होगी चार्जिंग स्टेशनों की सुविधा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एक अक्तूबर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू हो चुका है। अब बोर्ड की तरफ से एनसीआर के सभी सरकारी अस्पतालों में रखे जनरेटर से होने वाले प्रदूषण को कम करने व एंबुलेंस को इलेक्ट्रिक वाहन में तब्दील करने की योजना है। बोर्ड के पास डाटा उपलब्ध होने के बाद बजट का आंकलन किया जाएगा। एंबुलेंस को चार्ज कराने के लिए सभी अस्पतालों में चार्जिंग स्टेशनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी जनरेटर व एंबुलेंस का डाटा मांगा है। सोनीपत में 36 एंबुलेंस व 11 जनरेटर हैं। 28 अक्तूबर तक एनसीआर के सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को डाटा भेजना है। प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से बोर्ड की ओर से जनरेटरों में रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाया जाएगा। साथ ही एंबुलेंस को इलेक्ट्रिक वाहन में बदला जाएगा। इसमें से कितनी एंबुलेंस इलेक्ट्रिक होंगी और कितने जनरेटर में उपकरण लगेगा यह निर्णय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से लिया जाएगा।- डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन
एंबुलेंस को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने व डीजल जनरेटरों में रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कदम उठाया है। डाटा उपलब्ध होने के बाद बोर्ड टेंडर आवंटित करेगा। इसके बाद धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
- रविंद्र यादव, उपमंडल अभियंता राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड