सोनीपत। जिले में अक्सर देखा जाता है कि किसान धान की कटाई करने के बाद बचे हुए अवशेष को जला देते हैं। इससे प्रदूषण फैलने के साथ ही हादसा होने का डर रहता है। इस पर रोक लगाने के लिए उपायुक्त सुशील सारवान ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 लागू करने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश 21 सितंबर से 31 दिसंबर तक प्रभावी रहेंगे।
जिले के किसानों ने 90 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की खेती की है। जिले में धान की कटाई शुरू हो गई है। गेहूं की बिजाई में देरी न हो इसलिए किसान धान की पराली को खेत से उठाने के बाद डंठल में आग लगा देते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ जाता है।
किसान पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करते हैं। पराली जलाना गलत है। साथ ही आगजनी की घटनाओं से संपत्ति और मानव जीवन को भी खतरा बना रहता है। इसे लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी पराली जलाने पर प्रतिबंध संबंधी निर्देश जारी किए थे जिसमें उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान है।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति इन आदेशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ भारतीय सुरक्षा संहिता की धारा 223 तथा वायु संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जुर्माने का भी प्रावधान
कृषि उप निदेशक डॉ. पवन शर्मा ने बताया कि फसल अवशेषों में आग लगाने की घटना को रोकने के लिए जुर्माना भी लगाया जाएगा। 2 एकड़ में अवशेष जलाने पर पांच हजार, 5 एकड़ तक 10 हजार व 5 एकड़ से अधिक पर 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। पुलिस में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
पिछले साल खरीफ सीजन में सोनीपत जिले में सैटेलाइट से 70 लोकेशन आगजनी की मिली थी, जिनमें 17 लोकेशन पर कृषि विभाग को फसल अवशेषों में आगजनी मिली थी।
पराली जलाने के नुकसान
पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति घटती है।
वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है।
जमीन में कई मित्र कीट मर जाते हैं।
वायु में सल्फर डाइआक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड व अन्य कण मिलकर बीमारियां फैलाते हैं।
कार्बन मोनो आक्साइड की मात्रा बढ़ने से सड़क पर धुआं फैलता है जिससे हादसा होने का डर रहता है।