हरियाणा में एक महिला द्वारा अखबार में विज्ञापन देकर अपने कोख में पल रहे बच्चे का सौदा करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
महिला से बठिंडा के युवक ने जब नकली ग्राहक बनकर बात की तो बच्चे की कीमत छह लाख रुपये मांगी गई।
महिला यमुनानगर की है और खुद को साढ़े सात माह की गर्भवती बताती है। उसका कहना है कि मकान बनाने के लिए वह यह कर रही है।
युवक ने इसकी शिकायत और बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग कार्रवाई के अनुरोध के साथ यमुनानगर के डीसी मकरंद पांडुरंग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेजी है।
डीसी मकरंद ने कहा कि उनके पास इस बारे में एक संस्था की ओर से शिकायत आई है। मामले की जांच करवाई जा रही है।
यमुनानगर के बुड़िया इलाके की रहने वाली एक महिला ने पिछले दिनों एक समाचार पत्र में विज्ञापन देकर अपने अजन्मे बच्चे को गोद देने की पेशकश की है।
इस विज्ञापन के बाद उस महिला के पास अब तक 500-600 कॉल्स आ चुकी है। मामले का खुलासा तब हुआ, जब नौजवान वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष सोनू माहेश्वरी ने नकली ग्राहक बनकर विज्ञापन में दिए मोबाइल नंबर पर बात की।
दूसरी तरफ जिस महिला ने फोन उठाया उसने बताया कि उसके पहले से तीन बेटे हैं। वह मकान बनाना चाह रही है और इसी के लिए उसे छह लाख रुपये चाहिए।
अगर कोई बेऔलाद उसे इतनी रकम दे सके तो वह अपना बच्चा उसे गोद दे देगी। सोनू के हामी भरते ही उसने पंजाब नेशनल बैंक का अपना अकाउंट नंबर देते हुए इसमें सौदे के एडवांस के रूप में दस हजार रुपये जमा कराने को कहा।
यमुनानगर के उपायुक्त के मकरंद पांडुरंग ने कहा कि उनके पास इस बारे में एक संस्था की ओर से शिकायत आई है। मामले की जांच करवाई जा रही है।
कानूनन जुर्म है बच्चे को बेचना :
महिलाओं से जुड़े मामलों की जानकार और चाइल्ड हेल्पलाइन की डायरेक्टर डॉ. अंजू वाजपेयी का कहना है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को बेचना गलत है। अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम के तहत यह कानूनन जुर्म है। यदि कोई औरत अपनी संतान की परवरिश में असमर्थ है तो उसे बच्चा पैदा ही नहीं करना चाहिए।