तीन हजार एकड़ में फैले आईएमटी-मानेसर के 2,200 उद्योग बारूद के ढेर पर हैं। सिर्फ औद्योगिक यूनिटें ही नहीं यहां की ग्रुप हाउसिंग सोसायटी का भी यही हाल है। पिछले कुछ वर्षों से आग के कारण तकरीबन 50 फैक्ट्रियां जलकर पूरी तरह से राख हो चुकी हैं। उद्यमियों की मांग पर तीन वर्ष पूर्व फायर स्टेशन के लिए आईएमटी सेक्टर-8 में सवा एकड़ भूमि तो उपलब्ध करा दी लेकिन आज तक फायर स्टेशन नहीं बन सका।
उद्यमियों की शिकायत है कि सरकार ने जो जमीन फायर स्टेशन के लिए अलॉट की है वह मानकों के अनुरूप नहीं है। नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया के अनुसार फायर स्टेशन के लिए न्यूनतम ढाई एकड़ जमीन की जरूरत होती है। हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव किशन कपूर बताते हैं कि आईएमटी-मानेसर में फायर स्टेशन का न होना उद्योग जगत के लिए बहुत बड़ा बैक ड्रॉ है।
आईएमटी मानेसर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव मनोज त्यागी ने बताया कि फायर स्टेशन की आईएमटी-मानेसर में बहुत जरूरत है। ढाई एकड़ जमीन का मुद्दा मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया गया। इसके बाद तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई। इसमें डीजीएम मानेसर एस्टेट, डीजीएम आईए और एसटीपी उद्योग विहार एचएसआईआईडीसी शामिल हैं। त्यागी ने बताया कि इस कमेटी ने अभी फायर स्टेशन का इस्टीमेट बना कर भेजा है। मगर फायर स्टेशन कहां बनेगा इसके लिए जमीन अभी तक तय नहीं हो पाई है।
हाईराइज बिल्डिंग को भी खतरा
आईएमटी-मानेसर में तकरीबन 50 ग्रुप हाउससिंग सोसायटी हैं। यहां नौ से 12 मंजिल बिल्डिंग की भी संख्या अच्छी खासी हैं। सेक्टर-1 में यह सबसे अधिक हैं। यही नहीं सेक्टर-8 में बहुमंजिला आईटी कैंपस भी है। इन सभी को आग से काफी खतरा है। अगर यहां आग लग जाए तो प्रशासन के पास कोई विकल्प नहीं है।