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यूपी, बिहार और झारखंड से नहीं आए मजदूर, धान रोपाई का बना संकट

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धान की रोपाई के लिए तैयार किया गया खेत। संवाद - फोटो : Sirsa
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। अब धान की रोपाई का समय चल रहा है, लेकिन धान की रोपाई के लिए मजदूरों का टोटा होने के कारण किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष नाम मात्र ही मजदूर दूसरे राज्यों में जिले में पहुंचे हैं। ऐसे में धान की रोपाई करवाने के लिए किसानों को स्थानीय मजदूरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जिले में हर वर्ष 40 हजार से अधिक मजदूर धान की रोपाई करने के लिए जिले के अलग- अलग स्थानों पर पहुंचते थे। यह सभी मजदूर झारखंड, यूपी और बिहार से ही जिले में काम करने के लिए आते हैं, लेकिन इन वर्ष इन सभी राज्यों से नाम मात्र मजदूर ही जिले में पहुंचे हैं। ऐसे में किसानों को इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय मजदूरों की संख्या कम होने के कारण स्थिति खराब हो रही है। स्थानीय मजदूरों ने मजदूरी के रेट भी अब बढ़ा दी दिए हैं।
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बारिश के बाद एक साथ शुरू हुआ धान रोपाई का कार्य
जिले में करीब चार दिन पहले हुई बारिश के बाद से किसानों ने धान की रोपाई का काम शुरू कर दिया। धान की रोपाई के लिए मजदूर न मिलने से किसानों को बार बार मजदूरों के लिए एक जगह से दूसरी जगह पर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहीं डिंग रोड के किसान हरविंद्र सिंह, मुनीष कुमार, राम सिंह, दलेर सिंह, सोनू ने बताया कि उन्होंने धान की रोपाई के लिए जमीन तैयार कर दी है। लेकिन अभी तक उन्हें मजदूर नहीं मिल पाए। जिससे उनकी रोपाई का काम भी लेट हो रहा है।
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स्थानीय मजदूरों के बढ़े मजदूरी के रेट
बीते वर्ष किसानों ने प्रति एकड़ अनुसार 3200 तक मजदूरी दी थी, लेकिन इस वर्ष मजदूरी बढ़कर 4200 से 4500 तक भी पहुंच गई है। कई मजदूर काम के लिए इससे भी अधिक मजदूरी मांग रहे हैं। मजदूरी के रेट बढ़ने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। मजबूरी में किसान बढ़े हुए रेट देने को भी तैयार हो रहे है। वहीं किसान यूपी, बिहार और झारखंड में रहने वाले मजदूरों के भी लगातार संपर्क साधे हुए हैं, ताकि उनके पहुंचने के बाद किसानों को इसका लाभ मिल सके।
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