उप प्रधानमंत्री स्वर्गीय देवीलाल चौटाला परिवार के दो युवराजों ने पंचायती चुनाव से सियासी शिखर पर पहुंचने की ठानी है। गुरुवार को बिजली मंत्री रणजीत सिंह चौटाला के बेटे गगनदीप (चाचा) ने सिरसा के वार्ड नंबर 6 से जिला परिषद के लिए नामांकन भरा। वह पहली बार भाजपा के सहारे चुनावी मैदान में उतरे हैं।
इससे पहले इनेलो महासचिव अभय सिंह चौटाला के बेटे कर्ण सिंह चौटाला (भतीजा) भी उसी वार्ड से शनिवार को पर्चा भर चुके हैं। इस चुनाव में ताल ठोकने वाले दोनों उम्मीदवार चाचा-भतीजे हैं। इसलिए इस रोचक जंग पर पूरे हरियाणा की नजर रहेगी।
बता दें कि इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला भी जिला परिषद के चेयरमैन रह चुके हैं। उसके बाद वह विधायक बने। उनकी पत्नी कांता सिंह चौटाला भी जिला परिषद का चुनाव लड़ चुकी हैं। वह भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य चौटाला से हार गई थीं। ऐसे में अभय सिंह चौटाला अपनी राजनीतिक विरासत बेटे कर्ण सिंह चौटाला को सौंपने की तैयारी में हैं।
इनेलो नेता कर्ण सिंह पिछले चुनाव में वार्ड नंबर-16 से पार्षद बनकर उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वह दूसरी बार इस चुनाव में भाग्य आजमा रहे हैं। इस वार्ड में उनकी पार्टी की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। वह इस चुनाव में जीत हासिल कर चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। दूसरी ओर रणजीत सिंह कैबिनेट मंत्री पर रहते हुए अपने बेटे गगनदीप को सियासी विरासत देना चाहते हैं।
रणजीत सिंह खुद निर्दलीय हैं। इसलिए वह भाजपा के सहारे चुनावी जंग जीतकर बेटे को आगे बढ़ाना चाहते हैं। विभिन्न कार्यक्रमों में वह भाजपा की लगातार तारीफ करते रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस चुनाव के सहारे वह भाजपा में अपना विश्वास बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि वह मानते हैं कि परिवार में बच्चों की नादानी की वजह से यह पंचायत चुनाव लड़ना पड़ रहा है।