बडागुढ़ा। नौकरी के लिए अपना पुश्तैनी कार्य खेतीबाड़ी छोड़ना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन सिरसा जिला के गांव रघुआना में कुछ अलग ही देखने को मिला। जहां 2 दोस्तों ने निजी बैंक की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर सब्जी उत्पादन कर उसको बेचने का कार्य शुरू कर दिया। आज ये दोनों दोस्त इस कारोबार से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। दोनों दोस्त सालाना लाखों रुपये के पैकेज पर कार्य कर रहे थे। अब दोनों दोस्त क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
बता दें कि 35 वर्षीय मंदीप सिंह बीए करने के बाद एक निजी बैंक में एग्रीकल्चर लोन विभाग में उपप्रबंधक के पद पर कार्यरत था। उसकी सालाना इनकम 6 लाख रुपये के आसपास थी। मंदीप सिंह के पास 9 एकड़ भूमि है, जिसमें उसका छोटा भाई काश्त करता था। खेती में खर्च अधिक और आमदनी कम देखकर मंदीप ने खेत में कुछ नया करने की सोचते हुए नौकरी छोड़ने का मन बना लिया। जब इस बात का जिक्र उसने अपने परिवार से किया तो सबने कहा कि अच्छी खासी नौकरी छोड़कर भला खेती कौन करता है। वैसे भी खेती तो हो ही रही है।
इस पर मंदीप के लिए फैसला लेना काफी कठिन हो गया, फिर उसने स्वयं की सुनी और नौकरी छोड़कर सब्जी का उत्पादन शुरू कर दिया। हालांकि खेती के बारे में मंदीप को कोई अधिक ज्ञान नहीं थी, लेकिन कुछ कर गुजरने के जज्बे के साथ उसने इस क्षेत्र से जुड़े अन्य किसानों व सोशल मीडिया का सहारा लेकर ट्रायल के तौर पर 2 एकड़ में गोभी, पेठा, कद्दू, तोरी व टिंडा की खेती शुरू कर दी। संवाद
जिस जगह पर की नौकरी वहां की गलियों में बेच रहा सब्जी
मंदीप सिंह गांव रघुआना, बडागुढ़ा व पन्नीवाला मोटा सहित आस-पड़ोस के गांवों में अपने दोस्त के साथ ट्रैक्टर पर गलियों में जा-जाकर सब्जी बेचता है। सबसे बड़ी बात ये है कि मंदीप सिंह जिन गांवों में सब्जी बेच रहा है उन गांवों में कभी उनकी बैंक के डिप्टी मैनेजर के तौर पर ड्यूटी होती थी। मंदीप सिंह ने कहा कि जब वह सब्जी लेकर प्रथम दिन निकला था तो लोगों ने उसे हैरत भरी निगाहों से देखा। मंदीप सिंह ने प्रथम दिन 4200 रुपये की सब्जी बेचकर जब अपने परिवार को पैसे थमाए तो सभी अचंभित नजर आए। मंदीप सिंह इस समय खेती में हर वर्ष 3 फसल लेकर बैंक के पैकेज से अच्छी आय ले रहा है। उसने भिंडी व टिंडा सहित कुछ अगेती सब्जियां भी बो रखी हैं, जिनकी शुरुआती दौर में बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
मंदीप को देख दोस्त ने भी छोड़ दी नौकरी
मंदीप सिंह के गांव का ही दोस्त 35 वर्षीय जगमीत सिंह भी एक निजी बैंक में एग्री कलेक्शन एग्जीक्यूटिव के पद पर नौकरी करता था। उसका सालाना पैकेज करीब सवा दो लाख रुपये का था। जगमीत के पास स्वयं की 8 एकड़ भूमि है। मंदीप सिंह व जगमीत सिंह दोनों बचपन के अच्छे दोस्त हैं। एक ने जब नौकरी छोड़कर खेती में हाथ आजमाए तो दूसरे ने भी नौकरी छोड़कर खेती करने की सोची। इस बात पर जगमीत के परिजनों ने मना करते हुए कहा कि जमीन ठेके पर दे देंगे, नौकरी नहीं छोड़नी, लेकिन मंदीप की तरह जगमीत ने भी खुद की सुनी और नौकरी को अलविदा कह ट्रायल के तौर पर डेढ़ एकड़ भूमि में सब्जी बो दी। जगमीत ने प्रथम दिन सब्जी बेचकर 1500 रुपये कमाए।
दोनों दोस्त एक ही ट्रैक्टर पर बेचते हैं सब्जी
मंदीप व जगमीत दोनों भले ही अलग-अलग खेती करते हैं, लेकिन दोनों सब्जी बेचने का कार्य एकसाथ करते हैं। वे दोनों सुबह से ही एक ही ट्रैक्टर पर सब्जी लादकर बेचने के लिए निकल जाते हैं। दोनों ने बताया कि उन्हें उक्त कार्य में किसी तरह की कोई झिझक नहीं है और न ही नौकरी छोड़ने का कोई मलाल। वे किसी के अधीन नहीं बल्कि स्वयं का कारोबार कर रहे हैं।
सामान्य खेती के साथ कुछ नया कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है
मंदीप व जगमीत ने कहा कि किसानों को सामान्य खेती में कुछ नवाचार जरूर करना चाहिए। कम जगह में एक वर्ष में कई फसलें ली जा सकती हैं। किसान सब्जी जरूर बोएं। अगर अगेती सब्जी बाजार में उतारी जाए तो अच्छे दाम मिल सकते हैं। दूसरा अगर किसान खुद की फल-सब्जियों की खुद ही मार्केटिंग करे तो बेहतर है। उन्होंने कहा कि बहुत से किसान सब्जियों की खेती करते हैं, लेकिन जिला स्तर पर कोई प्रशिक्षण केंद्र न होने की वजह से उनको पूरी जानकारी नहीं मिल पाती।