सिरसा। आनंद विहार कॉलोनी निवासी दिवांश कंबोज को फर्जी दस्तावेज बनाकर कनाडा भेजने मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में आरोपी कुश कालेर और सुख संधू को गिरफ्तार कर दिया। दोनों को रविवार को अदालत में पेश किया गया। यहां से आरोपियों को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। रिमांड के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि दिवांश कम्बोज के नंबर मेरिट के अनुसार नहीं थे। इसलिए उन्होंने फोटोशॉप से एडिट कर मार्कशीट में 80 प्रतिशत अंक किए थे। इसके आधार पर ही उसका दाखिला कनाडा में हुआ।
इसके मामले में सुबह पुलिस आरोपियों को लेकर शिनाख्त के लिए एमसी मार्केट स्थित उनके कार्यालय पर लेकर गई थी। और आस पड़ोस के लोगों से एजेंसी के बारे जानकारी हासिल की। बता दें कि दिवांश कंबोज ने एमसी मार्केट 92 व 93 नंबर कार्यालय का पता एफआईआर में दर्ज करवाया था। इस पते पर ताला लगा हुआ था। यहां किसी एजेंसी का कोई कार्यालय नहीं चल रहा था। फ्लेक्स बोर्ड उतारकर खाली प्लाट में डाल दिए गए थे। आस पड़ोस के लोगों ने बताया कि एजेंसी के कर्मचारी कुछ दिनों से कार्यालय से सामान दूसरे कार्यालय में शिफ्ट कर रहे थे। इसी से जाहिर होता है कि एजेंसी के नुमाइंदों का पहले से अंदेशा था कि कभी भी इस मामले में पुलिस उन तक पहुंच सकती है। इस मामले में सवाल खड़ा होता है कि नकली मार्कशीट पूर्व में पकड़ में क्यों नहीं आई, जबकि बोर्ड से इन दस्तावेजों की जांच करवाई जाती है।
परिजनों ने साधी चुप्पी
दिवांश कंबोज के परिजनों ने इस मामले में ज्यादा कुछ बताने से इनकार कर दिया। दिवांश के परिजनों ने बस इतना बताया कि दिवांश कनाडा गया हुआ है। उसकी ओर से शिकायत दी गई है। इसके अतिरिक्त वह कुछ नहीं बता सकते है।
यह है मामला
पत्र में शिकायतकर्ता सिरसा के आनंद विहार निवासी दिवांश कम्बोज पुत्र जगदीश कुमार ने बताया कि वह हाल में नियाग्रा कॉलेज, वेलैंड, ओंटारियो कनाडा में पढ़ रहा है। मार्च 2018 में सिरसा के सेंट्रल सीनियर सेकेंडरी से मैट्रिक की परीक्षा भिवानी बोर्ड से पास की थी। इसके बाद वीएन बाल मंदिर से सीनियर सेकेंडरी 2020 में सीबीएसई बोर्ड से 12वीं पास की। इसके बाद उसने कनाडा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सोची। किसी ने उसे एमसी मार्केट स्थित हेलर स्टर्न इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड नाम के एजेंट की जानकारी दी, जो स्टडी वीजा लगवाता था। कंपनी के एजेंट ने उसके दस्तावेज लिए और व्यवस्था के नाम पर खर्च होने वाले रुपयों की मांग की। उसने सभी दस्तावेज और रुपये स्टर्न इमिग्रेशन प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिए। एजेंसी ने उसका 25-11-2022 से 31-12-2024 का स्टडी वीजा लगवा दिया। वीजा लगने के बाद 27-11-2022 को कनाडा पहुंच गया। इसके बाद कनाडा में नियाग्रा कॉलेज, बुलेवार्ड, वेलैंड, ओंटारियो में पढ़ाई शुरू कर दी। हाल ही उसे पता चला कि एजेंसी ने जाली दस्तावेजों के आधार पर उसका वीजा लगवाया था। कंपनी ने उसके मूल दस्तावेजों की जगह जाली दस्तावेज कनाडा दूतावास में जमा करवाए थे। उसकी मांग है कि मामले की जांच कराई जाए और जालसाजी और धोखाधड़ी का अपराध करने के लिए एजेंट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। शहर थाना प्रभारी प्रदीप कुमार ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है। इसकी जांच इकोनॉमिक्स सेल कर रही है।