डबवाली। एसएस जैन स्थानक में ठाणा-7 के सुमित्रा महाराज के पावन सानिध्य में जैन समाज ने 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक बड़े श्रद्धा भाव से मनाया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने जप, तप और साधना के माध्यम से अहिंसा, संयम और करुणा को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
सुमित्रा महाराज और सुप्रिया महाराज ने भगवान पार्श्वनाथ के जीवन-चरित्र, तप, करुणा और अहिंसा के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का जीवन क्षमा, संयम और समता का संदेश देता है और यह दिखाता है कि महापुरुष जन्म से नहीं, बल्कि अपने पुरुषार्थ और साधना से महान बनते हैं।
महासाध्वी सुमित्रा महाराज ने प्रवचनों में कहा कि संसार में केवल उन्हीं महापुरुषों की जन्म जयंती मनाई जाती है जिन्होंने जन्म-मरण की अनंत परंपरा को समाप्त कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को वैर-भाव और द्वेष के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए आपसी प्रेम, सहिष्णुता और सद्भाव अपनाने का आह्वान किया। जैन सभा के प्रधान सुभाष जैन ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ के जन्म कल्याणक पर किए गए जप, तप और साधना समाज के लिए मंगलकारी हैं।