देश की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर थेहड़ में रहने वाले हजारों लोग एक बार फिर घर से बेघर होने के करीब पहुंच गए हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस महेश ग्रोवर की अदालत में सरकार की तरफ से हरियाणा के अतिरिक्त महा अधिवक्ता ने जवाब दाखिल कर दिया है।
अतिरिक्त महा अधिवक्ता हितेश पंडित ने हाईकोर्ट को बताया कि जो भी लोग अनधिकृत रूप से रह रहे हैं, उन्हें चार महीने की अवधि के भीतर हटा दिया जाएगा। 20 जनवरी 2016 को सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में यह जवाब दाखिल किया गया, जिससे अमल में लाने के लिए अप्रैल ही बचा है।
सिरसा के थेहड़ में करीब 25 हजार लोग रहते हैं। थेहड़वासियों के सिर पर बेघर होने की तलवार वर्ष 2012 से ही लटक रही है। थेहड़ की जमीन पर अपना दावा करते हुए पुरातत्व विभाग ने अदालत में याचिका दायर करके इसे कब्जा मुक्त करवाने का अनुरोध किया था। इसके बाद अदालत ने जिला प्रशासन से थेहड़ से अनाधिकृत निर्माण हटाने का आदेश दिया।
जिला प्रशासन की तरफ से थेहड़ के 450 लोगों को नोटिस जारी करके 26 अक्टूबर 2012 तक अपने मकान खाली करने का हुकम सुनाया। जिलाधीश की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि 20 अक्टूबर तक कब्जा न हटाने पर बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे और 26 अक्तूबर को मकानों को गिराकर कब्जा ले लिया जाएगा, जिससे लोगों में हड़कंप मच गया था।
थेहड़वासी सड़कों पर उतर आए और सिरसा में प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। थेहड़वासियों ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आठ नवंबर तक स्टे लगा दिया और साथ ही हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। सरकार की तरफ से मिले जवाब के बाद स्टे हटा लिया गया। 20 जनवरी 2016 को हरियाणा के अतिरिक्त महा अधिवक्ता हितेश पंडित ने हाईकोर्ट बताया कि आज से चार महीने के बीच अनाधिकृत निर्माण हटा दिया जाएगा।
थेहड़ में जिन मकान मालिकों ने प्रशासन की तरफ से नोटिस पकड़ाया गया, वहां करीब पांच हजार लोग रहते हैं। दशकों पहले थेहड़ पर जब लोग मकान बना रहे थे, तब क्यों नहीं उन्हें रोका गया। सरकार ने थेहड़वासियों को हर प्रकार की सरकारी सुविधाएं दी हैं। नगर परिषद की तरफ से यहां रहने वालों से हाउस टैक्स वसूल किया जाता है। सरकार गरीबों को उजाड़ने का काम किसी भी सूरत में न करें। थेहड़ के लोग मर जाएंगे, लेकिन किसी भी सूरत में थेहड़ खाली नहीं करेंगे। एक साजिश रची जा रही है, जिसके तहत सरकार के जवाब की भनक अभी तक उन्हें नहीं लगी। समय अवधि पास आ चुकी है, सरकार नहीं चाहती कि किसी को उच्चतम न्यायालय जाने का मौका तक मिले। एडवोकेट संजू बाला, प्रधान थेहड़ संघर्ष समिति
ग्यारहवीं शताब्दी तक लोहे का एक दुर्ग था थेहड़
वर्तमान में शहर के उत्तरी दिशा में मिट्टी के टीले के रूप में थेहड़ विद्यमान है, यह टीला ग्यारहवीं शताब्दी तक लोहे का एक दुर्ग था। दसवीं ईसवी से पहले किसी राजा ने दिल्ली की तरफ से आक्रमण रोकने के लिए हनुमानगढ़, सिरसा, बठिंडा और हांसी में विशाल किलों का निर्माण करवाया था।
सिरसा में किले की ऊंचाई 130 फीट से अधिक और क्षेत्रफल पांच वर्ग किलोमीटर से अधिक था। कहा जाता है कि सिरसा शहर सरस्वती नदी के किनारे बसा था और नदी के स्थान बदलने व कोई बड़ा तूफान आने से यह किला 1173 ईसवी में जीर्ण-शीर्ण हो गया था। करीब 25 हजार से अधिक लोग इस इलाके में निवास करते हैं और यह थेहड़ का क्षेत्र शहर के पांच वार्डों में आता है।
हालांकि इस ऐतिहासिक धरोहर पर लोगों ने हजारों की संख्या में अवैध रूप से मकान बना रखे हैं। विशेष बात है कि बरसात के समय इस इलाके से अनेक प्रकार के अवशेष निकलते हैं। थेहड़ का अस्तित्व सदियों पुराना है, इसलिए यहां मुगलकालीन के अलावा बौद्धकालीन वस्तुएं भी मिलती हैं।