सिरसा। दूसरे राज्यों में तूड़ी निर्यात को लेकर जिला प्रशासन की ओर से लगाई गई पाबंदी को लेकर सोमवार को राजस्थान की गोशालाओं के पदाधिकारी लघु सचिवालय में पहुंचे। इसी मामले को लेकर जिले के किसान नेता भी मौके पर पहुंचे हुए थे। परंतु इस बीच रोक हटाए जाने को लेकर राजस्थान गोशाला के पदाधिकारियों व किसान नेता के बीच मतभेद हो गया।
इस समय प्रदेश में सूखा चारा व तूड़ी को लेकर भारी संकट उत्पन्न हो गया है। इसी के चलते जिले से दूसरी राज्यों पंजाब व राजस्थान में तूड़ी निर्यात पर प्रशासन ने पाबंदी लगाई हुई है। जिसके विरोध में सोमवार को राजस्थान के हनुमानगढ़ व भादरा गोशालाओं से पदाधिकारी जिला प्रशासन से मिलने पहुंचे। इस बीच जिले के कुछ किसान नेता भी इसी मामले के संबंध में पहुंच गए। लेकिन जब प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने की बात आई तो गोशाला के पदाधिकारियों का मत केवल गोशालाओं के लिए छूट देने को लेकर था, तो वहीं किसान नेताओं का तर्क पूरी तरह से पाबंदी हटाए जाने के संबंध में था। इसी बात को लेकर दोनों संगठनों में मतभेद हो गया। जहां इस मामले को लेकर पहले दोनों संगठन अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष साथ में रखना चाहते थे, लेकिन इसके बाद दोनों ही अलग-अलग समय में अधिकारी से मिले।
राजस्थान के हनुमानगढ़ गोशाला समिति के जिला अध्यक्ष बजरंग सिंह शेखावत ने बताया कि हरियाणा में तूड़ी की कमी नहीं है, यहां सिंचाई की व्यवस्था ठीक है इसलिए तूड़ी का उत्पादन भी अच्छा होता है। राजस्थान में फिलहाल तूड़ी की किल्लत बहुत भारी है लेकिन उनकी इस समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा की राजस्थान में करीब 3500 गोशालाएं है, इनमें कई तो बंजर भूमि वाले स्थानों पर संचालित है। इसलिए प्रशासन से मांग है कि वे गोशालाओं में भेजी जाने वाली तूड़ी पर पाबंदी हटाएं। ताकि हरियाणा के किसान राजस्थान की गोशालाओं में तूड़ी भेज सकेे। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही सीमा से रोक नहीं हटाई गई तो मजबूरी में बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा। इस अवसर पर भादरा तहसील की गोशाला अध्यक्ष जयवीर सूरेया, सचिव तेजपाल पूनिया सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।
पूरी तरह पाबंदी नहीं हटाई तो फैलेगा भ्रष्टाचार
किसान सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणधीर जोधकां ने कहा कि जिला प्रशासन को तूड़ी पर पूरी तरह से पाबंदी हटा देनी चाहिए। क्योंकि लोगों के पास लाखों रुपये कीमत की भैंस हैं और उन्हें खिलाने के लिए पशुपालकों के लिए तूड़ी नहीं है। अगर रोक रहती है तो कोई पंजाब से या अन्य स्थानों से तूड़ी नहीं ला सकता। क्योंकि बहुत से मजदूर लोग दूसरे राज्यों से तूड़ी के लिए गेहूं की कटाई करने के लिए आते हैं उनके साथ इंसाफ नहीं होगा। वहीं इस पाबंदी की वजह से रिश्वतखोरी बढ़ेगी क्योंकि गोशालाओं के नाम पर भारी भरकम कीमत देकर लोग तूड़ी का निर्यात करेंगे। इसलिए प्रशासन से मांग है कि पशुपालकों के हित को देखते हुए रोक को पूरी तरह हटाया जाए। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। इस अवसर पर किसान नेता नरेंद्र सहारण, दीवान सहारण, अरविंद बैनीवाल, प्रकाश ममेरा, जस्वीर भाटी व संदीप कासनियां आदि शामिल रहे।
दोनों राज्यों का आपसी भाईचारा बिगाड़ने काम कर रही सरकार
तूड़ी मामले को लेकर भादरा से विधायक कामरेड बलवान पूनिया ने कहा कि राजस्थान व हरियाणा के लोगों का आपसी भाईचारा और दोनों राज्यों में रिश्तेदारियां भी हैं। लेकिन जिस प्रकार से तूड़ी पर रोक लगाई गई है इससे हमारा भाईचारा खराब हो जाएगा और हरियाणा सरकार यही काम कर रही है। जिले में लगाई गई धारा 144 को हटाए जाने को लेकर एसडीएम जयवीर यादव व सीटीएम अजय सिंह को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या के निवारण की मांग की गई।
सिरसा तूड़ी किल्लत के चलते लघु सचिवालय में राजस्थान व हरियाणा के किसान नेताओं में हुए मतभेद के बा- फोटो : Sirsa