हरियाणा सरकार ने लगभग 85 वर्ष पुरानी सिरसा के थेहड़ इलाके की समस्या का समाधान करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके अंतर्गत सरकार ने थेहड़ के संरक्षित क्षेत्र को डी-नोटिफाई करने की प्रक्र्तिया शुरू कर दी है। इस उद्देश्य से रविवार को हरियाणा सरकार द्वारा पब्लिक नोटिस भी जारी किया गया है। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा ने यह जानकारी दी।
कई वर्षों से थेहड़ इलाके की समस्या लटकी हुई है। लगभग 85 वर्ष पहले एक नोटिफिकेशन हुआ, जिसके तहत थेहड़ क्षेत्र को पूरातत्व विभाग की और से संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया गया था। इसके बाद प्रदेश में सरकारों की अनदेखी के कारण इस क्षेत्र में बसे परिवारों के लिए समस्या खड़ी हो गई है कि वे इलाके को छोड़ कर कहां जाएं।
1947 में पश्चिमी पाकिस्तान से आए लोगों के पास आजीविका का कोई साधन नहीं था और न ही रहने को कोई जगह थी। इनमें से कुछ लोग थेहड़ पर रहने लगे। धीरे-धीरे समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े लोग, जिन्हें कहीं भी कोई स्थान नहीं मिला, उन लोगों ने भी थेहड़ में मकान बना लिए। जगदीश चोपड़ा ने बताया कि इस समय लगभग 3 हजार से भी अधिक मकान थेहड़ में बने हुए हैं और 15 से 20 हजार की आबादी थेहड़ में निवास कर रही है।
उन्होंने बताया कि नौ साल पहले पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का निर्णय थेहड़ वासियों के विरुद्ध आया था। तब उच्च न्यायालय ने सरकार को आदेश दिए थे कि थेहड़ खाली करवाया जाए। सरकार द्वारा जब हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई नहीं की गई तो हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार के खिलाफ अवमानना की प्रक्र्तिया शुरु कर दी। उन्होंने कहा कि जितनी भी सरकारें आई, उन्होंने आपराधिक कोताही की।
चोपड़ा ने कहा कि भाजपा सरकार हरियाणा में बनी तो थेहड़ मामले की बात संज्ञान में आई और सरकार ने बहुत गहराई से अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का जब निर्णय हुआ, उस समय सरकार को अपील करनी चाहिए थी। लेकिन अपील करने का एक निर्धारित समय होता है और नौ वर्ष बाद अपील नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वस्तुस्थिति का आंकलन करने के लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई, जिसमें एक प्रतिनिधि पुरातत्व विभाग (भारत सरकार), एक प्रतिनिधि पुरातत्व विभाग (हरियाणा) और एक प्रतिनिधि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूरातत्व विभाग के मुखिया शामिल थे।
उन्होंने बताया कि इस कमेटी ने निरीक्षण किया और सरकार को रिपोर्ट भेजी। कमेटी ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि थेहड़ पर इतने लोग बस गए हैं कि पुरातत्व की दृष्टि से इस क्षेत्र का उपयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री हरियाणा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें हरियाणा के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, पुरातत्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा के एडवोकेट जरनल और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार शामिल हुए।
बैठक में अध्ययन करके पाया गया कि थेहड़ की जगह पर पूरातत्व विभाग द्वारा उपयोग व खोज करना असंभव है। इसे डी-नोटिफाइड किया जाए और भारत के पूरातत्व विभाग को सूचना दी जाए व एक सार्वजनिक सूचना दी जाए कि हरियाणा सरकार थेहड़ क्षेत्र को डी-नोटिफाइड करने जा रही है। चोपड़ा ने आशा व्यक्त की कि डी-नोटिफाइड होने पर थेहड़ वासियों पर लटकी हुई तलवार से छुटकारा मिलेगा।
हाईकोर्ट ने सरकार को दिया एक माह का समय
सिरसा के थेहड़ क्षेत्र के लगभग तीन हजार परिवारों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से मिली राहत फिलहाल जारी है। गत शुक्र्तवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने पर हाईकोर्ट ने सरकार को एक महीने का समय देने के साथ ही मामले की सुनवाई 9 अगस्त तक स्थगित कर दी। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्ध की खंडपीठ ने इस दौरान थेहड़ खाली करवाने के स्थानीय प्रशासन के फैसले पर भी यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। इसके चलते फिलहाल याचियों के मकान नहीं गिराया जा सकेगा।
सिरसा निवासी दिनेश की तरफ से याचिका में कहा गया कि वे लोग कई दशक से यहां रह रहे है। नजूल लैंड होने के चलते उनका इस जमीन पर मालिकाना हक है। पुरातत्व विभाग ने इस जमीन को एतिहासिक बताते हुए इसे संरक्षित करने के लिए जगह को खाली करवाने के लिए स्थानीय निवासियों को नोटिस जारी किया था। रविवार को हरियाणा सरकार द्वारा इस क्षेत्र को डी-नोटिफाई करने की प्रक्र्तिया शुरू कर दिए जाने के बाद माना जा सकता है कि प्रदेश सरकार आगामी 9 अगस्त को हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करते हुए इसका उल्लेख करेगी।