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जो फीस नहीं भर सकतीं, उन्हें पढ़ाएगा संगठन, 51 बेटियां चयनित

Mon, 11 Jul 2016 10:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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नैना - फोटो : Bureau
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भारत विकास परिषद ने सरकारी विद्यालयों की ऐसी 51 बेटियों को गोद लेकर पढ़ाने का बीड़ा उठाया है, जो विद्यालय की फीस तक नहीं भर सकती थीं। सामान्य वर्ग की ये बेटियां वाणिज्य संकाय से हैं। परिषद ग्यारहवीं तथा बारहवीं का पूरा खर्च उठाएगा। प्रोजेक्ट शक्ति के तहत बेटियों को पाठ्य सामग्री के साथ-साथ उनकी विद्यालय फीस, बैग, ड्रेस, शूज तथा मोजे तक दिए जाएंगे। रविवार को भाविप ने स्थापना दिवस के मौके पर भगवान श्री कृष्ण कॉलेज (बीएड) ऑफ एजूकेशन में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का शुभारंभ किया। भारत विकास परिषद ने जिन 51 बेटियों को गोद लिया है। वे इस समय ग्यारहवीं में वाणिज्य संकाय में पढ़ रही हैं। पहले वर्ष में परिषद इन बेटियों पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च करेगी। बारहवीं तक यह अभियान जारी रहेगा।
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इस मौके पर विधायक नैना चौटाला ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की जबकि भाविप के प्रांतीय अध्यक्ष केके अरोड़ा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। प्रोजेक्ट के तहत गोद ली गई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की 35 तथा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की 16 बेटियों ने कार्यक्रम में शिरकत की। विधायक नैना सिंह चौटाला सहित विशिष्ट अतिथियों ने बेटियों के पांव धोकर उनका विधिवत पूजन करवाया। बाद में बेटियों को पाठ्य सामग्री तथा अन्य सामान दिया गया।

पढ़ाई से लगेंगे पंख
चौटाला ने कहा कि बेटियां चिड़ियां होती हैं। घर में होती हैं तो तो उन्हें कहा जाता है तुम पराई हो। ससुराल में कोई नहीं कहता ये घर तेरा है। ऐसे में बेटियां ऐसी चिड़ियां होती हैं, जिनके पंख नहीं होते। केवल पढ़ाई से ही उनके पंख लग सकते हैं। वे उड़ान भरकर आसमान को नाप सकती हैं। चौटाला ने दो टूक कहा कि अक्सर लोग चुप रहने वाली बेटियों के बारे में चर्चा करते हैं, उन्हें कमजोर, बुजदिल कहते हैं। मैं, उन लोगों को बताया चाहती हूं कि चुप रहना तहजीब है। हमें यही संस्कार मिले हैं। मैं, उन बेटियों को भी आह्वान करना चाहती हूं कि अगर कोई आप पर ज्यादती या जुल्म कर रहा है, चुप रहने की अपेक्षा दलेरी के साथ उसका मुकाबला करो, संघर्ष करो। उन्होंने भारत विकास परिषद को उपरोक्त प्रोजेक्ट के लिए अपने निजी कोष से 21 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की।
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गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली सामान्य वर्ग की उन बेटियों की मदद करने का बीड़ा उठाया गया है, जो सरकारी स्कूल की फीस तक नहीं दे सकती। समाजसेवी लोगों के सहयोग से भाविप ने यह प्रोजेक्ट चलाया है। पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसे कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर पर भी ले जाया जाएगा।
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-सतपाल जग्गा, प्रांतीय उपाध्यक्ष, भाविप
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