सिरसा। खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में जिला खेल विभाग लंबे समय से प्रयासरत है। जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के अधिकारी पिछले कई सालों से 44 स्टेडियमों को सक्रिय बनाए रखने और खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्यरत हैं। प्रदेश में खिलाड़ियों के साथ हुए हादसों के बाद खेल विभाग ने सभी 44 स्टेडियमों का निरीक्षण कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी। इसमें भवनों और अन्य संरचनाओं में पाई गई कमियों से उन्हें अवगत कराया गया।
अब विभाग खेल उपकरणों और ग्राउंड में लगे पोल आदि की स्थिति का सही आंकलन करवाने के लिए बीएंडआर से जांच कराने की तैयारी में है। इस संबंध में उपायुक्त को पत्र लिखकर जांच की मांग की जाएगी, ताकि खेल सुविधाओं की मौजूदा स्थिति का सटीक आंकलन हो सके। बीएंडआर के इंजीनियर ही भवनों की स्थिति और लोहे के पोल, जिम इक्विपमेंट, बॉस्केटबॉल ग्राउंड, बैडमिंटन कोर्ट, जिम्नास्टिक और अन्य खेल उपकरणों की सही रिपोर्ट दे पाएंगे। इससे पता चल सकेगा कि किसी उपकरण में कमी है या उसे हटाने की आवश्यकता है, और उनका प्रयोग कितने समय तक सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से हर चीज का अधिकारिक रिकॉर्ड तैयार होगा, जो भविष्य में बेहद उपयोगी साबित होगा।
रोहतक हादसे के बाद भेजी थी मुख्यालय रिपोर्ट
रोहतक हादसे के बाद मुख्यालय ने जिले के सभी स्टेडियमों की रिपोर्ट मांगी। जिला विभाग ने निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट भेजी, जिसमें बताया गया कि मैदानों में खेल उपकरण सही हैं और खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। केवल बिल्डिंग और सुरक्षा जालियों की मरम्मत आवश्यक थी।
जिले में 44 स्टेडियम
जिले के 44 स्टेडियमों में जिला स्तर पर शहीद भगत सिंह खेल परिसर और चौधरी दलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम शामिल हैं। डबवाली उपमंडल में श्री गुरु गोबिंद सिंह खेल परिसर और चौटाला में चौधरी साहिबराम खेल स्टेडियम हैं। इसके अलावा कंवरपुरा, सुखचैन, बालासर, धोलपालियां, जमाल, नुहियांवाली, गोदिकां, गंगा, कोटली, मसीतां, खुईया मलकाना, बड़ागुढ़ां, भंगू, शेरपुरा, असीर, जगमालवाली, खारियां, धोतड़, कुस्सर, जोगेवाला, अलीकां, मौजगढ़, पन्नीवाला रूलदु, रोहण, खोखर, बप्पं आदि गांवों में एससी कंपोनेंट स्टेडियम हैं। जीवननगर में हॉकी एस्ट्रोटर्फ और कई मिनी स्टेडियम भी हैं। अधिकांश स्टेडियमों की बिल्डिंग कंडम है, लेकिन खेल उपकरण सही हैं।
पत्राचार तक रहते हैं विधायक और सांसद
जिले के स्टेडियमों को लेकर विधायक, सांसद और मंत्री कई बार सरकार को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पिछले पांच सालों में कई पत्र भेजे गए, लेकिन सांसद निधि, विधायक ग्रांट या अन्य मद से खेल सुविधाओं के विकास के लिए कोई धनराशि जारी नहीं हुई।
मुख्यालय ने रिपोर्ट मांगी थी, तो हमने 44 स्टेडियम की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट भेज दी। अब बीएंडआर से तकनीकी जांच करवाने की योजना है, ताकि किसी प्रकार की कमी न रहे। सुधार की दिशा में निरंतर काम हो रहा है और हमारा प्रयास है कि खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधा उपलब्ध कराई जाए। - जगदीप सिंह, जिला खेल अधिकारी, सिरसा