सिरसा। लाभार्थियों को वैक्सीन लगाने के लिए विभाग की ओर से 200 से अधिक स्थानों प्वाइंटों पर विभाग की ओर से कैंपों का आयोजन किया जा रहा है। ऐसे में अब वैक्सीन की वेस्टेज का आंकड़ा भी बढ़ना शुरू हो चुका है। प्रदेश में सबसे अधिक सिरसा जिले में कोरोना से बचाव की वैक्सीन की वेस्टेज हो रही है। सिरसा में 2.83 फीसदी वैक्सीन की वेस्टेज हो रही है। जबकि हिसार में 2.54 और पलवल 2.41 फीसदी वैक्सीन वेस्ट हो रही है। ऐसे में विभाग में आंकड़े को कम करने के लिए कई कैंपों को एक जगह पर लगाने का प्लान भी बनाया है।
वैक्सीन वेस्टेज होने का मुख्य कारण एक ही शीशी में 10 व 20 लाभार्थियों को डोज लगाई जाती हैै। लेकिन वैक्सीन की शीशी खोलने के चार घंटे तक ही उसको इस्तेमाल में लाया जा सकता है। अगर इससे अधिक समय तक खुली हुई शीशी को रख दिया जाए तो उसे दोबारा से इस्तेमाल में नहीं लाया जा सकता है। चार से पांच लाभार्थी एकत्र होने के बाद ही विभाग के स्टाफ की ओर से शीशी को खोला जाता है। शीशी खुलने के चार घंटे तक अगर कोई लाभार्थी वैक्सीन लगवाने के लिए नहीं आते तो उसके बाद वह वैक्सीन अन्य लाभार्थियों को नहीं लगाई जा सकती।
इन जिलों में इतनी हो रही वैक्सीन की वेस्टेज
जिला वेस्टेज (15 जनवरी तक )
सिरसा, 2.83
हिसार, 2.54
पलवल, 2.41
नूंह, 2.24
जींद, 1.30
सोनीपत, 0.94
कोरोना वैक्सीन की एक शीशी में 10 या 20 लाभार्थियों को वैक्सीन लगाई जाती है। शीशी खुलने के बाद चार घंटे तक ही उसे इस्तेमाल में लाया जा सकता है। ऐसे में अगर लाभार्थी वैक्सीन लगवाने के लिए देरी से पहुंचते हैं तो उनके लिए अलग से वैक्सीन की शीशी खोलनी पड़ती है। अब कई कैंपों का एक ही जगह पर लगाने का प्लान बनाया जा रहा है। ताकि वेस्टेज कम हो सके।
-नितिन सोमानी, नोडल अधिकारी, वैक्सीनेशन प्रक्रिया।