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कोर्ट ने हिरासत में बिताई अवधि पर्याप्त मान 500 रुपये जुर्माना किया

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सिरसा। पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद वापस जेल में आत्मसमर्पण नहीं करने वाले एक कैदी को न्यायालय ने दोषी करार देकर अंडरगोन (न्यायिक हिरासत अवधि को माना पर्याप्त) कर दिया।
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प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी सलोनी गुप्ता के न्यायालय ने उसे हरियाणा कैदी अस्थायी रिहाई अधिनियम की धारा 9 के तहत 500 रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना नहीं भरने पर एक माह साधारण कारावास भुगतना होगा। इस मामले में फरीदाबाद जेल अधीक्षक की शिकायत पर सिरसा पुलिस ने आरोपी श्याम लाल के खिलाफ अभियोग दर्ज किया था। न्यायालय के फैसले से पहले दोषी श्याम लाल ने रहम की गुहार लगाते हुए न्यायाधीश सलोनी गुप्ता से कहा कि उसकी तीन बेटियां और एक बेटा है। दो बेटियां शादी योग्य हैं, जबकि छोटा बेटा व बेटी पढ़ाई कर रहे हैं। पूरा परिवार उस पर निर्भर है।
दोषी श्याम लाल के वकील ने न्यायालय से कहा कि श्याम लाल अपने कृत्य पर पश्चाताप कर रहा है। वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है। इसलिए उसके प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाया जाए। इसके बाद न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषी श्याम लाल परिवार का इकलौता कमाने वाला है और वह काफी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रह चुका है। इसलिए उसकी न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि ही सजा के पर्याप्त मानकर 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई जाती है।
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फरीदाबाद जेल में काट रहा था सजा
मामले के अनुसार गांव साहुवाला प्रथम निवासी श्याम लाल मादक पदार्थ अधिनियम में एक अप्रैल 2010 से फरीदाबाद जेल में 10 साल की सजा काट रहा था। 12 मार्च 2015 को उसे जेल से 4 सप्ताह की पैरोल पर रिहा किया गया। उसे 10 अप्रैल 2015 को जेल में आत्मसमर्पण करना था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद फरीदाबाद जेल अधीक्षक की शिकायत पर सिरसा पुलिस ने उसके खिलाफ हरियाणा गुड कंडक्ट कैदी अधिनियम की धारा 8 और 9 के तहत उसके खिलाफ केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया।
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