संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। रोड़ी के छह जोहड़ों को अमृत सरोवर योजना के तहत सुंदर बनाने का लक्ष्य है। इसके तहत पंचायती राज विभाग गाद निकालकर पांच जोहड़ों को साफ कर चुका है जबकि मुख्य जोहड़ को अधर में छोड़ दिया गया है। इस जोहड़ का सुंदरीकरण नहीं किया गया है। इस पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।
रोड़ी में प्राचीन काल से कई जोहड़ बने हैं। इनमें से कई जोहड़ों पर नाजायज कब्जे हो चुके हैं। बचे तालाबों को कूड़ा डालकर भरा जा रहा है। रोड़ी के छह जोहड़ों को अमृत सरोवर के रूप में बदलने के लिए सरकार ने इनका चयन किया था। इनमें कुल 2.58 करोड़ की राशि खर्च की जानी थी।
तब से दो साल बाद भी रोड़ी के मुख्य बाजार के पास स्थित पांच एकड़ में फैले जोहड़ का सौंदर्यीकरण नहीं हो सका है। जोहड़ के चारों तरफ कूड़ा डाला जा रहा है। इससे पानी दूषित हो चुका है और इसमें कचरा, जंगली घास, गंदगी फैली है। इसकी दुर्गंध पूरे बाजार में फैल रही है।
विभागीय जेई दिनेश ने बताया कि जोहड़ के सौंदर्यीकरण से पहले पंचायत ने लिखकर दे दिया कि जोहड़ को खोदने की जरूरत है। इसलिए आधे से ज्यादा बजट उसी कार्य में खर्च हो गया है।
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विभाग की ओर से जारी हो चुकी 65.64 लाख की राशि
रोड़ी के छह जोहड़ों को अमृत सरोवर में बदलने के लिए पंचायती विभाग की ओर से ठेकेदारों को 65.64 लाख रुपये की राशि जारी की जा चुकी है जबकि जोहड़ों पर नाममात्र ही काम दिख रहा है। गांव में एक जोहड़ में ठेकेदार की ओर से पानी की निकासी के लिए छोटा पाइप लगाया था। जब ग्रामीणों ने दूषित पानी निकासी के लिए बड़ी लाइन बिछाने की मांग की तो ठेकेदार ने काम छोड़ दिया।
अमृत सरोवर योजना के तहत सफाई के लिए करोड़ों रुपये का ठेका होने के बावजूद मुख्य बाजार के जोहड़ को नहीं सुधारा गया। यह चिंताजनक और गलत है। इस कारण लोगों को दूषित माहौल में रहना पड़ रहा है। - भोज राज मित्तल, ग्रामीण।
जोहड़ के विकास कार्य के दौरान ठेकेदार ने मिट्टी निकाल कर उसके किनारों पर छोड़ दी। जो अब सूखकर उड़ने लगी है। इस कारण मुख्य बाजार में वाहन चालकों और व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। - रवि कुमार, दुकानदार।
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तालाब का काम पूरा न होने के कारण तालाब में कचरा, जंगली घास, गंदगी भरी पड़ी है। इस कारण गांव में बदबू आती रहती है। विभाग ने खानापूर्ति करते हुए इसी गंदे जोहड़ के पास सिर्फ कुर्सियां रखवा दी हैं। - केवल कुमार मित्तल, ग्रामीण, रोड़ी।
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यह कार्य दिसंबर 2022 में शुरू किया गया था। तब से दो साल पूरे होने के बाद भी गंदगी नहीं हट सकी है। आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने के बाद भी ठेकेदार पर कोई कार्रवाई न होना चिंताजनक है। -तरसेम चंद, दुकानदार।
पंचायत की मांग पर अमृत सरोवर की जगह जोहड़ से गाद निकाली गई। अधिकतर राशि गाद निकालने पर खर्च हो चुकी है। अब अगर पंचायत लिखकर देगी तो बचे करीब तीन लाख रुपये काम करवा दिया जाएगा। - दिनेश, जेई, पंचायती राज विभाग।