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Sirsa News: छह गांवों में पशु अस्पताल व उपचार केंद्रों की बदलेगी सूरत, 82 लाख होंगे खर्च

Sun, 08 Dec 2024 09:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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नेजाडेला कला का पशु अस्पतालनेजाडेला कला का पशु अस्पताल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। ग्रामीण क्षेत्र में पशु अस्पताल और पशु उपचार केंद्र की दशा सुधारने के लिए प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। 82 लाख रुपये खर्च करके बडागुढ़ा और सिरसा खंड में बने पशु उपचार केंद्र और अस्पतालों की सूरत बदलेगी जाएगी। इसके चलते बजट पंचायत राज विभाग के पास पहुंच गया है। विभाग ने मरम्मत कार्य के लिए अब टेंडर लगाया गया है।
जिले के प्रत्येक गांव में पशु उपचार केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसमें ग्रामीणों के पशुधन को नियमित रूप से जांच करने व टीकाकरण किया जाता है। इन पशु उपचार केंद्रों के स्थिति पिछले काफी समय से दयनीय बनी है। इसको लेकर पशुपालक से लेकर ग्रामीण तक विभागीय अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं। भवन पुराना होने के कारण यहां नई चिकित्सा सुविधाएं या उपकरण संसाधन तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में पशुपालकों का परेशानी उठानी पड़ती है। इसके देखते हुए पंचायती राज विभाग ने भवनों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार करके मुख्यालय भेजा गया था। वहां से प्रस्ताव को मंजूरी के साथ बजट भी पास किया जा चुका है।
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ऐसे में अब बडागुढ़ा और सिरसा खंड के छह गांवों के पशु उपचार केंद्र और पशु अस्पताल के मरम्मत का कार्य किया जाएगा। इस पर करीब 82 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने टेंडर लगा दिया है। विभागीय अधिकारियों ने दावा किया है जल्द ही सारी प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू करवा दिया जाएगा।
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इन गांवों में पशु उपचार केंद्र की होगी मरम्मत
गांव : नेजाडेला खुर्द
बजट : 21.41 लाख रुपये
गांव : सहारणी
बजट : 8.49 लाख रुपये
गांव - ढाबां
बजट : 15.19 लाख रुपये
गांव - बुर्ज भंगू
कुल राशि : 13.87 लाख रुपये
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इन गांवों में पशु अस्पताल की होगी मरम्मत
गांव बप्पां
बजट : 11.64 लाख रुपये।
गांव बुर्ज भंगू
कुल राशि : 5.16 लाख रुपये।
गांव - अलीकां
बजट : 9.29 लाख रुपये।
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पशु अस्पताल और उपचार केंद्रों के भवनों को मरम्मत की जरूरत थी। कुछ की चहारदीवारी भी दुरुस्त की जानी थी। पूर्व में ग्रांट आई थी। इसके आधार पर मरम्मत कार्य हो रहे हैं। कई अन्य भवनों को भी दुरुस्त करवाया जाना है। ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालकों को बेहतर सुविधा मिल सके। - डाॅ. सुखविंद्र सिंह, उप निदेशक, पशु पालन विभाग।
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