चोपटा। गांव रूपावास के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल को पीएमश्री स्कूल का दर्जा मिला हुआ है। स्कूल में कमरों की कमी के कारण छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। आलम यह है कि स्कूल में 30 कमरे थे, इनमें से सात जर्जर हो चुके हैं। स्कूल के प्रधानाचार्या कक्ष के अंदर ही रसोई घर का संचालन किया जा रहा है।
इसी के साथ एक कमरे में लैब चल रही है और नौ कमरों की हालत खस्ता हो चुकी है। हालात यह है कि जर्जर कमरों की छत भी गिर रही है। बारिश के दिनों में हालात बदतर हो जाते हैं। एक कमरे में दो - दो कक्षाओं का संचालन करना पड़ता है। स्कूल में छठी से बारहवीं कक्षा तक करीबन 800 छात्रों की संख्या है।
इस हिसाब से इनके 24 सेशन बन रहे हैं। छात्रों की संख्या के हिसाब से स्कूल में कमरे नहीं है और विद्यार्थियों की खुले आसमान व शेड के नीचे कक्षाएं लगानी पड़ रही है। स्कूल प्रशासन व स्कूल प्रबंधन कमेटी की तरफ से शिक्षा विभाग को कमरे बनाने की मांग भेजी हुई है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है।
कई गांवों के छात्र करने आते हैं पढ़ाई
स्कूल में गांव रूपावास के अलावा आसपास गांवों के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। मुख्य रूप से स्कूल में गांव निर्बाण, रायपुर, बरासरी, जोड़कियां, लुदेसर के ग्रामीण बच्चे पढ़ाई करते हैं। गांव के पूर्व सरपंच रामस्वरूप ओलख, एसएमसी के प्रधान रमेश ठोलिया, राजेंद्र कुमार, सुरेंद्र, विनोद कुमार, कृष्ण कुमार ने बताया कि स्कूल में कमरों की कमी है। इससे छात्रों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं। अगर जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
स्कूल का बेहतर परीक्षा परिणाम
पिछले कुल सालों में स्कूल का दसवीं व बारहवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम बेहतर रहा है। स्कूल में छात्रों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। इसके लिए स्कूल में सीसीटीवी कमरे भी लगाए गए हैं।
-स्कूल में ग्रामीणों की ओर से बहुत ही ध्यान दिया जा रहा है, जिससे बच्चों को कोई परेशानी न हो। स्कूल में कमरों की कमी से छात्रों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अगर जल्द ही कमरों की कमी दूर नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
- रामस्वरुप ओलख, पूर्व सरपंच, रुपावास
स्कूल में छात्रों की संख्या 800 है, जबकि कमरों की कमी है। स्कूल में कमरों की कमी के लिए शिक्षा विभाग के पास डिमांड भेजी गई है। कमरों की कमी होने से काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
- कमलजीत सिंह, प्रधानाचार्य, पीएमश्री स्कूल, रुपावास