सिरसा। फरवाई कलां का युवा किसान सज्जन कुमार अपने छोटे भाई के साथ मिलकर परंपरागत के साथ-साथ तकनीकी खेती कर अच्छी आमदनी कर रहा है। खेती करने के तरीके ने उसे प्रगतिशील तो बनाया ही, साथ में दूसरे किसान भी उससे प्रेरणा भी ले रहे हैं। सजन परंपरागत खेती के साथ 16 साल से आलू और सब्जियों की खेती कर रहा है।
किसान सज्जन कुमार के पिता ने वर्ष 2007 में दो एकड़ में आलू की खेती की शुरुआत की थी। इसके पश्चात अगले ही वर्ष अपनी कुल 7 एकड़ भूमि में आलू की बिजाई कर दी। बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी होने का यह सिलसिला वर्ष 2018 तक चलता रहा। लेकिन इसी वर्ष एक हादसे में उसके मां की मौत हो गई और पिता गंभीर चोट लगने की वजह से चारपाई पर आ गए। संवाद
विरासत में मिली खेती का किया विस्तार
माता पिता के साथ हुए हादसे के बाद 33 वर्षीय युवा किसान सज्जन कुमार ने वर्ष 2018 में खेती करना शुरु किया था। इससे पहले वह शहर में सीसीटीवी लगाने का व्यवसाय कर रहा था। हादसे के बाद पिता की स्थिति को देखते हुए उसे यह कार्य छोड़ना पड़ा। फिलहाल भी मौजूदा समय में 15 एकड़ भूमि में आलू बोया हुआ है, जिसमें सात एकड़ खुद की भूमि और अन्य 8 एकड़ भूमि ठेके पर ली हुई है। सजन कुमार ने बताया कि प्रति एकड़ आलू का उत्पादन करीब 200 तक हो जाता है। अगर प्राकृतिक आपदा न हो तो सालाना 30 से 35 लाख रुपये की कुल आय हो जाती है। इसमें खेती करने का खर्चा करीब 10-15 लाख तक का आता है।
आलू के साथ अन्य सब्जियों का भी उत्पादन
सज्जन कुमार करीब 2 से 3 एकड़ भूमि में स्टेकिंग विधि से करेला व घीया उगाता है। साल में दो बार उपज लेने वाले किसान सज्जन ने बताया कि एक सीजन सब्जी और दूसरे में परंपरागत फसल बोई जाती है। रबी फसल के दौरान पूरी भूमि में सिर्फ आलू ही बोया जाता है। वहीं धान का सीजन आने से पहले करीब 4 से 5 एकड़ भूमि को खाली छोड़ा जाता है और अन्य भूमि में तरबूज तथा ककड़ी आदि सब्जियां बोई जाती हैं।
5 एकड़ भूमि वाला किसान न करें 50 हजार तक की नौकरी
युवा किसान सज्जन ने बताया कि जिस किसान के पास 5 एकड़ तक भूमि है उसे नौकरी की नहीं बल्कि सही तकनीकी ज्ञान की जरूरत है। जिससे वह अच्छी फसल लेकर अच्छी आय कर सकता है। पांच एकड़ तक उपजाऊ भूमि वाला किसान इतना कमा सकता है, जितना एक 50 हजार रुपये नौकरी पेशा वाला कमाता है। खेती में वह खुद साथ बहुत से अन्य लोगों को भी रोजगार देता है।