सिरसा। समाज तेजी से बदला है। लोगों की मानसिकता भी बदल रही है, लेकिन आज भी कुछ ऐसे शरारती लोग हैं जो दूसरों को परेशान करते हैं। दूर के रिश्तेदारों के अलावा कई बार घर के आसपास भी ऐसे लोग होते हैं, जो आप के साथ कुछ ऐसा करते हैं जो आप को पसंद नहीं है। ऐसे में आप को डरने नहीं, बल्कि खुलकर सामने आकर अपनी कहने की आवश्यकता है। अगर, आप को लगता है कि थाने या पुलिस के पास नहीं जा सकती हैं तो आप 1090 पर कॉल करें।
ये बातें चतरगढ़पट्टी की सैनी धर्मशाला में अमर उजला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में उप पुलिस अधीक्षक विकास कृष्ण ने कहीं। इस कार्यक्रम में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय स्वयं सेवक इकाई का सहयोग रहा। उप पुलिस अधीक्षक विकास कृष्ण ने स्वयंसेवकों को साइबर क्राइम, नशा के विरुद्ध और फर्जी इमीग्रेशन के बारे में जागरूक किया। स्वयं सेवकों ने उप पुलिस अधीक्षक से सवाल जवाब किए और अपने शंकाओं का समाधान किया।
मुख्यातिथि उप पुलिस अधीक्षक विकास कृष्ण ने स्वयंसेवकों को जागरूक करते हुए कहा कि आज का समय ऑनलाइन का है। सभी के पास मोबाइल फोन है और इसका गलत प्रयोग साइबर अपराधी करते हैं। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है। यदि आपके या आपके आसपास किसी व्यक्ति से साइबर ठगी हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। इस दौरान चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय स्वयं सेवक इकाई के को-ऑर्डिनेटर पंजाबी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर गुर साहिब सिंह, रसायन विभाग से डॉ. सुरेश व महिला एचएसएस विंग की इंचार्ज व कम्प्यूटर साइंस विभाग से प्रो. सुमन उपस्थित रहीं।
इमीग्रेशन सेंटर की लें पूरी जानकारी, पंजीकरण सत्यापन पत्र देखें
डीएसपी ने कहा कि वह स्वयं अर्जुन अवार्डी हैं और बॉक्सिंग के खिलाड़ी हैं। वे करीब 50 देशों में घूम चुके हैं और वहां के हालात को जानते हैं। आप युवा हैं और आप में से कई विदेश जाना चाहते हैं। सभी से अपील है कि किसी के झांसे में न आए। इमीग्रेशन सेंटर की पूरी जानकारी हासिल करें। उसका पंजीकरण सत्यापन पत्र देखे। कोई प्रमाणपत्र न दिखाए तो उससे दूरी बना लें। उन्होंने बताया कि सिरसा में एक मात्र सेंटर ही रजिस्टर्ड है। यदि किसी से साथ कोई इस तरह की ठगी होती है, तो साइबर पुलिस को सूचित करें। आप लोग इन धोखेबाजों से सावधान रहें।
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नशा एक बीमारी, इसका उपचार संभव
उप पुलिस अधीक्षक ने कहा कि नशा एक एक बीमारी है। उसका उपचार संभव है। नशा छोड़ने के लिए बस दृढ़ इच्छा शक्ति की जरूरत है। आपके आसपास कोई नशा करता है तो उसको बीमार व्यक्ति की नजर से देखें और उसके साथ साधारण व्यवहार करें। उसे नशा छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि यदि आपके आसपास कोई नशा बेचता है तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। एक अच्छे नागरिक की तरह नशे को जड़े से खत्म करने में पुलिस की मदद करें।
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स्वयं सेवकों ने डीएसपी से किए सवाल
स्वयंसेविका ईशा ने सवाल पूछा कि फर्जी तरीके से इमीग्रेशन लगाने वालों की पहचान कैसे की जा सकती है। कैसे युवा उस बारे में जान सकते हैं?
डीएसपी: जिले में एक मात्र रजिस्टर्ड इमीग्रेशन सेंटर है। यदि कोई आपको विदेश भेजने का प्रलोभन देता है तो आपको वहीं करना है, जो कोई भी चीज खरीदने से पहले करते हो। सीधे पैसे देने के बजाय जांच पड़ताल करो, उससे लाइसेंस मांगों। यदि उसके पास लाइसेंस नहीं है तो दूरी बना ले। अगर वह लाइसेंस दिखाता है तो उसका क्यूआर कोर्ड स्केन करके जांच करें कि वह असली है या नकली है। जब तक हम संतुष्ट नहीं हो जाते है, तब तक किसी के लालच में न आए।
स्वयं सेवक भरत राठोर ने पूछा कि अवैध रूप नशा गांवों में बेचा जाता है। छोटे-छोटे खुर्द बनते होते हैं। गांव वालों के विरोध के बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं होती?
डीएसपी : यदि किसी गांव में इस प्रकार की गतिविधि चल रही है, तो ग्रामीण उन्हें सूचित करें। नशे को लेकर पुलिस की त्वरित कार्रवाई कर रही है।
स्वयं सेवक प्रियंका ने पूछा कि नशा मुक्ति केंद्र की पहचान कैसे हो कि वह सही है या गलत है?
डीएसपी : नशा मुक्ति केंद्र के पंजीकरण की जांच करें। नशा छोड़ने के लिए सबसे जरूरी दृढ़ इच्छा शक्ति हैं। केंद्र में स्वयं नहीं छूटता। वहां इलाज के बाद पीड़ित छह माह बाद फिर नशा करने लगता है। नशा की लत एक बीमारी है। पीड़ित के साथ साथ प्रेम भाव से बात करें, उसे प्रोत्साहित करें कि यह आदत तुम छोड़ सकते हो, तभी उसके अंदर इच्छा पैदा होगी। स्वयं की इच्छा के बिना इस बीमारी का इलाज संभव नहीं है।
डीएसपी की अपील
डीएसपी विकास कृष्ण ने युवाओं से अपील की कि वे सभी सोशल मीडिया पर हमेशा एक्टिव रहते हैं। हजारों की संख्या में उनके फॉलोवर है। ऐसे में वह नशे के विरुद्ध अभियान, इमीग्रेशन फ्रॉड और यातायात जागरूकता जैसी चीजों को सोशल मीडिया पर सकारात्मक विचारों के साथ डालें, जिससे की लोगों को जागरूक किया जा सके और बेहतर समाज बन सके।