देश में ऊर्जा के पारंपरिक संसाधनों की निरंतर होती कमी, पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमत और खपत को ध्यान में रखते हुए गैर पारंपरिक संसाधनों के उपयोग की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। इसी जरूरत को देखते जेसीडी विद्यापीठ स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के मेकेनिकल विभाग के छह विद्यार्थियों की एक टीम ने पानी से चलने वाली कार का निर्माण किया है। पानी पर आधारित इंजन को बनाने वाली टीम में शीशपाल राड़, कुलदीप जांगड़ा, प्रदीप सिंगर, ताराचंद सहारण, विकास व गौरव आदि छात्र शामिल हैं।
यह जानकारी प्रदान करते हुए मेकेनिकल विभाग के अध्यक्ष इंजीनियर दिनेश शर्मा ने बताया कि छात्र इस कार को 38 किलोमीटर तक प्रायोगिक आधार पर चला चुके हैं तथा यह कार पानी व एलपीजी दोनों संसाधनों पर चलाई जा सकती है। इस कार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसको चलाने हेतु प्रयोग में आने वाला पानी साधारण पानी ही है, कोई विशेष रूप से परिष्कृत पानी की कोई जरूरत नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस पानी चलित कार का निर्माण मेकेनिकल वर्कशॉप में मेकेनिकल विभाग के सहायक प्रोफेसर गुरविंद्र सिंह की देखरेख में किया गया है। प्राचार्य डॉ. हिमांशु मोंगा ने कहा कि ऊर्जा के स्रोत के रूप में पानी का उपयोग अति सराहनीय है तथा इसके लिए विद्यार्थियों की संपूर्ण टीम बधाई की पात्र है। उन्होंने कहा कि वातावरण में बढ़ते हुए प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलेगी तथा यह प्रोजेक्ट काफी लाभदायक भी साबित होगा।
इस मौके पर पानी चलित कार के कार्यशैली के बारे में जानकारी हासिल करते हुए जेसीडी विद्यापीठ के प्रबंधन समन्वयक इंजीनियर आकाश चावला एवं शैक्षणिक निदेशक डॉ. आरआर मलिक व रजिस्ट्रार सुधांशु गुप्ता ने विद्यार्थियों के इस बेहतरीन प्रोजेक्ट की सराहना की।
इस अवसर पर प्रोजेक्ट टीम के मुख्य छात्र सदस्य शीशपाल ने उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस कार की कार्यप्रणाली एवं इसमें प्रयोग होने वाले पानी ईंधन की रूपरेखा के बारे में विस्तारपूर्वक समझाया तथा यह भी बताया कि इसमें अनेक ऐसे कलपुर्जों का उपयोग किया गया है जो विद्यार्थियों ने स्वयं बनाएं हैं। वहीं इस प्रशिक्षण कैम्पेन के तहत विद्यार्थी ने इसमें पानी द्वारा ईंधन बनने की कार्यप्रणाली बारे भी समझाया तथा मौके पर उपस्थित अन्य विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों की जिज्ञासाओं को भी शांत किया।
कैसे चलती है पानी से कार
जेसीडी विद्यापीठ स्थित इंजीनियरिंग कालेज के मैकेनिकल विभाग के सहायक प्रोफेसर गुरविंद्र सिंह ने बताया कि पानी में कैल्शियम कार्बाइड को मिलाया जाता है जिससे गैस उत्पन्न होती है। इसी गैस को ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है जिससे कार चलती है। इस विधि से गैस पैदा करने के के लिए अलग से किट तैयार की गई है जिसे इंजन से जोड़ा गया है।