दर्द से कराह रही एक गर्भवती महिला को डरा धमकाकर सिविल अस्पताल से बाहर निकालने का मामला सामने आया है। मामला शनिवार रात का बताया जा रहा है। अस्पताल से निकाले जाने के एक घंटे बाद महिला ने बेटी को जन्म दिया। अस्पताल के सीनियर मेडिकल अफसर का कहना है कि संबंधित स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
रात करीब पौने नौ बजे कबीर बस्ती निवासी रोशनी देवी अपनी गर्भवती बेटी रजनी को लेकर सिविल अस्पताल में पहुंची थी। उनके साथ पड़ोसी कृष्णा देवी भी थी। रजनी दर्द से कराह रही थी। वहां मौजूद महिला कर्मचारी युवती को कमरे के भीतर ले गई। उपरोक्त महिलाओं को बाहर निकाल दिया। रजनी के अनुसार संबंधित कर्मचारी ने उससे अल्ट्रासाउंड की मांग की। उसने बताया कि वह अबोहर (पंजाब) की रहने वाली है। करीब एक हफ्ता पूर्व ही अपने दो बच्चों को साथ लेकर डिलीवरी के लिए डबवाली में अपने मायके आई है। वह कागजात लाना भूल गई।
आरोप है कि इतना सुनते ही कर्मचारी चिढ़ गई। उस पर हाथ उठाते हुए कहा कि दो बच्चों के बाद तीसरा बच्चा करना जरूरी है क्या? जब चाहे मुंह उठाकर चले आते हैं, समय तो देख लिया करो। कर्मचारी उसके दो इंजेक्शन लगाकर बोली, अभी डिलीवरी में काफी दिन शेष हैं। इंजेक्शन से दर्द होना बंद हो जाएगा। हालांकि रोशनी देवी ने दर्द से कराह रही बेटी को अस्पताल में दाखिल करने के लिए कर्मचारी की मिन्नतें की । लेकिन उसने एक नहीं सुनी। साफ लफ्जों में कह दिया कि समय देख लो क्या हुआ है।
कल भी न आना रविवार है। सोमवार को आना चिकित्सक मिल जाएंगी। उसने गर्भवती को दाखिल करने की बजाए, अस्पताल से बाहर का रास्ता दिखा दिया। घर पहुंचने के एक घंटा बाद ही युवती ने बेटी को जन्म दिया। सिविल अस्पताल में घटित हुए उपरोक्त मामले ने व्यवस्था को कटघरे में ला खड़ा किया है। सवाल उठ रहा है कि क्या इस प्रकार की व्यवस्था के बल पर असुरक्षित डिलीवरी के कारण होने वाली जच्चा तथा बच्चा की मौत के आंकड़े कम हो सकते हैं?
102 मिलाया उठाया नहीं
रात आठ बजे जैसे ही युवती को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, परिजनों ने सरकारी एंबुलेंस की सहायता लेने के लिए 102 डायल किया। करीब पौना घंटा तक किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। ऐसे में अपनी गर्भवती बेटी को थ्री व्हीलर में लादकर रोशनी देवी अस्पताल पहुंची थी। यह पहला मामला नहीं है। कबीर बस्ती की रहने वाली भागवंती देवी का कहना है कि कुछ दिन पूर्व उसकी बेटी पूजा की डिलीवरी सरकारी अस्पताल में हुई थी। उस समय उन्होंने 102 नंबर डायल करके एंबुलेंस सेवा का लाभ लेना चाहा। लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। वह अपनी बेटी को बाइक पर बैठाकर अस्पताल लेकर गई थी।
मेरी बेटी को धमकाया गया
अस्पताल से आते ही रजनी दर्द से कराह रही थी। वे उसे पुन: अस्पताल में ले जाना चाहते थे। लेकिन उसने बताया कि नर्स उसे मारने के लिए दौड़ी। उसे अपशब्द कहे। उसकी हालत पर तरस न आया। उसकी बेटी को नर्स ने खूब धमकाया। जिसके कारण वह जाने को तैयार नहीं हुई। एक दाई को बुलाकर घर पर ही डिलीवरी करवाई गई। संबंधित नर्स के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
-रोशनी देवी, पीड़िता की मां
मामला मेरे संज्ञान में है। स्टाफ की ड्यूटी 24 घंटे की है। महिला चिकित्सक भी ऑन कॉल आती हैं। गर्भवती से बदसलूकी करने वाली महिला कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-एमके भादू, एसएमओ, डबवाली