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सुविधाओं को तरस रहे हैं मरीज, सिविल अस्पताल को खुद इलाज की दरकार

Sat, 09 Jul 2016 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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नागरिक अस्‍पताल - फोटो : Bureau
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तेरह लाख की आबादी वाले जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने में नाकाम हो रहा है। आधुनिक उपकरणों के अभाव में सिविल अस्पताल खुद ही बीमार सा दिखता है। आलम यह है कि दूर दराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को मजबूरन मायूस होकर लौटना पड़ता है।
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 सिविल अस्पताल की हालत ऐसी है यहां मरीजों के लिए नई सुविधाओं में तो इजाफा नहीं हुआ और जो सुविधा पहले थी वो मशीनें धूल फांक रही है। इस वजह से अस्पताल में गंभीर मरीजों को रेफर करने का काम ज्यादा किया जाता है। डेढ़ दशक से सीटी स्कैन और एक दशक से अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होकर कबाड़ रूम की शोभा बढ़ा रही है। आज के समय में ये दोनों मशीनें अस्पताल में होना बेहद जरूरी होती है। शरीर में कोई भी तकलीफ हो तो डॉक्टर मरीज को पहले अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन करवाने को कहता है। इनकी रिपोर्ट देखने के बाद ही उपचार शुरू किया जाता है। अब सिविल अस्पताल में उक्त दोनों सुविधा नहीं होने के चलते मरीजों को प्राइवेट केंद्रों में जाना पड़ता है और प्राइवेट केंद्र संचालक अपने हिसाब से मनचाही फीस वसूलते हैं। ये सुविधा अगर सिविल अस्पताल में होती तो गरीब जनता को फ्री में इसका लाभ मिलता। अस्पताल में डिजिटल एक्स रे मशीन भी कई महीनों से खराब है। इससे जिलावासियों में अस्पताल प्रशासन और सरकार के प्रति काफी नाराजगी देखी जा रही है।

गुमराह करते हैं साइन बोर्ड
सामान्य अस्पताल परिसर में लगे बोर्ड में वहां मौजूद सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई है। साइन बोर्ड में लिखा है कि सीटी स्कैन के लिए 35 नंबर कमरा और अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए 28 नंबर कमरे में जाएं। रोगी इन कमरों के पास पहुंचते हैं तो पूरा कमरा खाली मिलता है। लोगों का कहना है कि जो सुविधाएं अस्पताल में नहीं है उसे साइन बोर्ड से हटा लेना चाहिए, ताकि वे गुमराह न हों। अस्पताल प्रशासन को अस्पताल के बाहर ही नोटिस बोर्ड लगाना चाहिए कि यहां पर सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल एक्स रे मशीन खराब पड़ी है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से मरीजों से कहा जाता है कि उनका निजी सेंटर से अनुबंध है। वहां पर जाकर सीटी स्कैन , अल्ट्रासाउंड और एक्स रे करवाया जा सकता है। जब मरीज उक्त निजी सेंटर में जाते हैं तो शाम तक उनका नंबर आ जाए को गनिमत है। निजी सेंटर सरकारी अस्पताल की पर्ची लेकर आने वाले मरीजों को पहले प्राथमिकता नहीं देते।
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बैठने तक की व्यवस्था नहीं
अस्पताल प्रशासन की मानें तो प्रतिदिन करीब डेढ़ हजार लोग सिविल अस्पताल में उपचार के लिए आते हैं। पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। गर्मी से हाल बेहाल हो जाता है। जो लाइन में लगकर थक जाते हैं उन्हें बैठने के लिए प्रर्याप्त जगह भी नहीं मिलती और मजबूरन उन्हें नीचे बैठना पड़ता है। बैठने के लिए जगह बनाई है वहां पंखे खराब पड़े। लोग हाथों से पंखी घुमाकर हवा लेते नजर आते हैं। शुक्रवार को ऐसा ही नजारा अस्पताल में देखने को मिला। सैकड़ों लोग फर्स पर बैठे या लेटे पड़े मिले। अस्पताल में आए ईलाज के लिए आए रामदास, जगीर सिंह, मोती राम व भल्लेराम का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को कम से कम बैठने की पर्याप्त व्यवस्था को करनी चाहिए, ताकि आराम से अपनी बारी आने का इंतजार किया जा सके ।

सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड मशीन व डिजिटल एक्स रे मशीन बेहद जरूरी है। सरकार की सिटी स्कैन व एमआरआई के लिए जिला स्तर पर प्राइवेट कंपनी से अनुबंध करेगी। अल्ट्रासाउंड मशीन व एक्स-रे मशीन की खरीद प्रक्रिया सरकार ने शुरू कर रखी है। उम्मीद है शीघ्र ही नई मशीनें सिविल अस्पताल में आ जाएंगी। जहां तक पंखे खराब पड़े होने की बात है तो मैंने इन्हें बदलकर नए पंखे लगाने का निर्देश दिया हुआ है। वेटिंग हाल में मरीजों के लिए कूलर भी लगाए जाएंगे ताकि उन्हें गर्मी से दिक्कत न झेलनी पड़े।
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सूरजभान कंबोज, सिविल सर्जन सिरसा।
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