जिले में अब तक एक करोड़ 80 हजार क्विंटल गेहूं की आवक हो चुकी है। ऐसा चौथी बार हुआ है जब आवक का आंकड़ा एक करोड़ से पार हो गया हो। अभी भी एक सप्ताह तक आवक जारी रहने की संभावना है। मौसम के मिजाज बदले हुए हैं ऐसे में बरसात हो गई तो खरीदी गई 18 लाख 80 हजार क्विंटल गेहूं खराब हो सकती है। हालांकि प्रशासन ने खरीद एजेंसियों को बार-बार निर्देश देकर उठान कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे पर खरीद एजेंसियों द्वारा उठान की गति को तेज नहीं किया गया। बरसात आती है तो खरीद एजेंसियों को खराब होने वाली गेहूं का हरजाना भरना पड़ सकता है। जिले की छह मंडियों और 51 खरीद केंद्रों में खुले आसमान तले पड़ी लाखों क्विंटल गेहूं लापरवाही की भेंट चढ़ सकती है।
सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार गेहूं की खरीद करने वाली एजेंसियों को खरीद के 72 घंटे के भीतर गेहूं का उठान करना होता है। पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी खरीद एजेंसियों ने मनमानी की है और उठान कार्य कछुआ चाल से चलाया है। गनीमत रही है कि पीक सीजन में बरसात नहीं हुई अन्यथा लाखों क्विंटल गेहूं बरसात से खराब हो जाती। अब आवक बहुत ही धीमी हो गई है फिर भी जिले में खरीदी गई 18 लाख 30 हजार क्विंटल गेहूं को उठान का इंतजार है।
छाए बादल, मंडराया खतरा
वीरवार को घने बादल छाये हुए हैं और बरसात होने की पूरी संभावना बनी हुई है। ऐसे में मंडियों व खरीद केंद्रों में खरीदी गई गेहूं को खतरा बन गया है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक राजेश कुमार आर्य ने बताया कि समय-समय पर मंडियों का निरीक्षण किया गया और जहां पर भी उठान पेंडिंग थी वहां से उठान तुरंत करवाने के निर्देश खरीद एजेंसियों को दिए जाते रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए गए 51 खरीद केंद्रों में खरीदी गई गेहूं को बरसात से खराब होने का अधिक खतरा है क्योंकि वहां पर शेड नहीं हैं। एजेंसियों की लापरवाही के कारण लाखों क्विंटल गेहूं खराब हो सकती है। बता दें कि पूर्व में कई बार बरसात से खरीदी गई गेहूं खराब हुई है पर एजेंसियों ने इससे सबक नहीं लिया।
जिले में रिकॉर्ड आवक
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक राजेश कुमार ने बताया कि जिले की मंडियों में गेहूं की आवक जारी है। अब तक विभिन्न एजेंसियों द्वारा 10 लाख सात हजार 933 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है तथा आठ लाख 24 हजार 985 मीट्रिक टन गेहूं का उठान हो चुका है। उन्होंने बताया कि जिले की विभिन्न मंडियों व खरीद केंद्रों में हेफेड द्वारा चार लाख 81 हजार 755 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा दो लाख 61 हजार 530 मीट्रिक टन, हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोपेश द्वारा एक लाख 48 हजार 528 मीट्रिक टन, हरियाणा एग्रो द्वारा 64 हजार 410 मीट्रिक टन, भारतीय खाद्य निगम द्वारा 51 हजार 710 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है।
क्या हैं नियम
गेहूं खरीद शुरू होने से पूर्व ही सरकार द्वारा गेहूं की खरीद को लेकर निर्धारित मापदंड जारी कर दिए गए थे। खरीद एजेंसियों को गेहूं की खरीद करने के बाद 72 घंटों के भीतर गेहूं का उठान करना होता है। उठान के टेंडर में भी यह शर्त अंकित की गई थी। ठेकेदारों ने शर्तों पर खरा उतरने का एग्रीमेंट कर उठान के ठेके लिए पर बाद में उन शर्तों की पालन नहीं की गई। नियम अनुसार 72 घंटे तक उठान न करने पर ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है पर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्र में खरीद के लिए सभी आढ़तियों को तिरपाल की व्यवस्था करनी जरूरी होती है ताकि बरसात आने पर गेहूं को भीगने से बचाया जा सके। गेहूं का तोल होने के बाद किसान की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है।
एजेंसी को भुगतना पड़ सकता है नुकसान
गेहूं की खरीद के बाद गेहूं खराब होने की जिम्मेवारी संबंधित खरीद एजेंसी की होती है। बरसात से खराब होने वाली गेहूं का नुकसान एजेंसी को भरना पड़ेगा। आज जिस प्रकार मौसम बदला हुआ है उससे 18 लाख से अधिक क्विंटल गेहूं पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। यदि बरसात आ गई तो नुकसान की भरपाई संबंधित एजेंसियों से करवाई जाएगी।
क्यों होती है उठान धीमी
हर वर्ष गेहूं का उठान धीमा करने पर आढ़ती ठेकेदारों को नजराना देते हैं। ऐसे में ठेकेदारों को उठान के लिए नजराना लेने की लत पड़ चुकी है। हालांकि इस बार ऐसी बात सामने नहीं आई है पर उठान धीमा करने का यही कारण माना जाता है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरेंद्र मिचनाबाद ने बताया कि हर वर्ष उठान के लिए ठेकेदार को खुश करने पर ही उठान की जाती है। आढ़ती को लालच होता है कि उसकी दुकान के आगे से जगह खाली हो जाए तो दूसरे किसानों की ढेरियां लग सके। उन्होंने बताया कि इस बार ऐसा कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है।