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सहकारी बैंक का 378 करोड़ ऋण किसानों में अटका

Wed, 07 Dec 2016 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सिरसा। नोट बंदी के बाद लोगों के साथ-साथ सहकारी बैंकों की परेशानी भी बढ़ गई है। सहकारी बैंकों ने जिले में किसानों को करीब सवा चार सौ करोड़ रुपये ऋण दिया हुआ था। फसलें अच्छी होने के कारण बैंक को 70 प्रतिशत से अधिक रिकवरी होने की उम्मीद थी पर आरबीआई द्वारा सहकारी बैंकों में लेन-देन पर रोक लगाने के बाद बैंकों की रिकवरी अटक गई है। सहकारी बैंक का 378 करोड़ रुपये ऋण की राशि बकाया रह गई है। अब तक मात्र 14 प्रतिशत रिकवरी हुई है जो किसी भी साल की रिकवरी से बहुत कम है।
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जिले में दि केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड की मुख्य शाखा के अलावा 36 पैक्स और 41 ब्रांच हैं। इस बैंक के नेटवर्क से करीब पौने तीन लाख लोग जुड़े हुए हैं जिनमें से अधिकतर किसान हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि सहकारी बैंकों में लेन-देन बंद होने से सबसे अधिक किसान वर्ग को परेशानी आ रही है। जब नोट बंदी हुई थी तो 10 नवंबर से बैंकों में 500 और 1000 के नोट जमा होने शुरू हुए तो सहकारी बैंकों में सबसे अधिक नोट जमा हो रहे थे। रिकॉर्ड के मुताबिक 10 से 14 नवंबर तक सहकारी बैंकों में करीब 40 करोड रुपये (500 और 1000 के नोट) जमा हुए थे। परंतु आरबीआई द्वारा रोक लगाए जाने के बाद बैंकों में राशि जमा नहीं हो सकी। यही वजह रही कि दूसरे बैंकों में भीड़ बढ़ गई। बता दें कि सहकारी बैंकों पर रोक लगाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया जिसकी सुनवाई नौ दिसंबर को है। दूसरे राज्यों में हुई गड़बड़ से प्रदेश के सहकारी बैंकों को आरबीआई ने सक की नजर से देखा इससे ज्यादा कोई आधार नहीं है रोक लगाए जाने का। दि केंद्रीय सहकारी बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पालाराम गोदारा ने बताया कि हमारे बैंक से किसी भी राज्य के दूसरे बैंकों में ऑनलाइन बैंकिंग की जाती है तो इसे ऑनलाइन न होने का आरोप नहीं जड़ा जा सकता। इसी प्रकार सभी बैंकों में कंप्यूटर से काम होने हैं और आरबीआई ने स्वयं सहकारी बैंकों को प्रमाण पत्र दिया हुआ है। उन्होंने कहा कि बैंक आरबीआई के नार्म के अनुसार काम करते हैं। अब अचानक लेन-देन पर रोक लगाना उचित नहीं है। इससे हमारी रिकवरी पर सीधा असर पड़ा है।
इस मामले में सहकारी बैंक के महाप्रबंध केएल शर्मा ने कहा कि आरबीआई की हिदायत के अनुसार सहकारी बैंक बंद हो चुके नोट नहीं ले सकते जिससे किसानों को दिए गए ऋण की रिकवरी प्रभावित हो रही है। हालांकि हम किसानों को दूसरे बैंकों में राशि जमा कर सहकारी बैंक में चैक से राशि जमा करवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं पर अधिकतर किसानों के दो बैंकों में खाते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नाबार्ड और हरको बैंक के तहत अब तक जिले में साढे सात करोड़ रुपये की राशि हमें मिली है जिसको पात्र लोगों को बांटा गया है। बढ़ापा पेंशन भी इसमें शामिल है। पांच और एक हजार के बंद हो चुके नोटों को लेने के अलावा सभी प्रकार की बैंकिंग सेवाएं जारी हैं। लोग अब दूसरे बैंकों के चैक अपने खाते में जमा करने लगे हैं। इससे राशि उनके खाते में आ रही है। इस विधि से भी लोग लोन अदा कर रहे हैं।
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सहकारी बैंक की सभी शाखाओं में होगी नोट काउंटिंग मशीनें
कुछ मामलों में अन्य बैंकों से पीछे माना जाना वाला सहकारी बैंक अब नवीनतम सुविधाओं से सुसजित होने की कड़ी में प्रक्रिया शुरू कर चुका है। अब सहकारी बैंक की सभी शाखाओं में नोट काउंटिंग मशीनें लगेंगी। विभाग ने इस मामले में प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ मशीनें आ चुकी हैं और शेष के लिए डिमांड भेजी गई है। इसके बाद नोट गिनने में कर्मचारियों का जहां समय बचेगा वहीं नकली नोट को यह मशीन बाहर निकाल देगी। इस मशीन में नए नोट पांच सौ और दो हजार के लिए भी सेंसर लगा होगा ताकि हाल में आई करेंसी में भी कोई नकली नोट न आ जाए।
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आज कुछ ही बैंकों में मिला चार-चार हजार का कैश
सिरसा। नोट बंदी के बाद कैश के लिए मारामारी जारी है। मंगलवार को भी बैंकों में कैश की किल्लत देखी गई। अधिकतर बैंकों में सुबह कैश नहीं था तो कुछ में दोपहर तक कैश नहीं पहुंच पाया। हर दिन बैंकों में आने वाले कैश में कमी होती जा रही है। ऐसे में कैश निकलवाने वालों की लाइनें हर दिन लंबी होती जा रही हैं। बैंक कैश समाप्त होने का नोटिस चस्पा करने के सिवाय कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
कैश निकलवाने के लिए कतारों में लगे अधिकतर लोगों को घंटों तक इंतजार करने के बाद खाली हाथ घरों को लौटना पड़ा। यही स्थिति एटीएम में रही। आधे से अधिक एटीएम नोट बंदी के बाद लगातार बंद पड़े हैं। जिन एटीएम में कैश डाला जाता है उनमें कैश निकालने वालों की लंबी कतारें लग जाती हैं। दोपहर बाद तक एटीएम में भी कैश खत्म हो जाता है। व्यापार करने वाले लोग तो ऑनलाइन बैंकिंग से भी काम चला लेते हैं पर आम लोगों को घरेलू खर्च चलाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जिला अग्रणी बैंक अधिकारी एमपी शर्मा ने बताया कि कैशलेश ट्रांजक्शन के जरिए लोग राहत पा सकते हैं। सरकार ने जिस उद्ेश्य के साथ नोट बंदी की है वो तभी पूरा हो पाएगा जब सभी लोग अपने लेन-देन को पारदर्शिता से करेंगे। ऑनलाइन बैंकिंग कई प्रकार से की जा सकती है। इस लिए अधिकतर लेन-देन इस विधि से किया जा सकता है। इससे लोगों का समय भी बचेगा। हर रोज सेमीनारों का आयोजन कर लोगों को लॉनलाइन बैंकिंग के लिए जागरूक कर रहे हैं।
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