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सत्ता कब्जाने को भाजपा-इनेलो ने मिलाया हाथ

Fri, 22 Jul 2016 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
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चुनाव - फोटो : bureau
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सत्ता के लिए दो धुर विरोधी राजनीतिक दल भाजपा और इनेलो वीरवार को कालांवाली के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए एक हो गए। इस कब्जे से कांग्रेस को जोरदार झटका लगा है। इनेलो समर्थित पार्षद सोनू ने नौ मत लेकर अध्यक्ष और भाजपा समर्थित पार्षद मनीष जिंदल दस मत लेकर उपाध्यक्ष पद के लिए चुने गए।
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नपा कार्यालय में वीरवार को निर्वाचन अधिकारी एवं आरटीओ प्रशांत अटकान की अध्यक्षता में नगर पालिका के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुए। अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। भाजपा, कांग्रेस व इनेलो तीनों राजनीतिक दल अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर अपने समर्थक को काबिज करने के लिए पिछले दो माह से कसरत कर रहे थे, मगर किसी भी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं जुट सका। आखिरकार जोड़तोड़ की रणनीति के तहत आखिर में भाजपा व इनेलो ने हाथ मिला लिया।
मतदान में सभी 15 पार्षदों और विधायक बलकौर सिंह व सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी शामिल हुए। अध्यक्ष पद के लिए इनेलो-भाजपा समर्थित वार्ड नंबर दो की पार्षद सोनू और कांग्रेस समर्थित वार्ड नंबर एक की पार्षद सुनीता नागर ने नांमाकन भरा। उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा समर्थित वार्ड नंबर 11 के पार्षद मनीष जिंदल ने और कांग्रेस समर्थित वार्ड नंबर 13 की पार्षद अनु रानी ने नामांकन भरा। मतगणना में अध्यक्ष पद की उम्मीदवार सोनू को नौ व सुनीता नागर को आठ मत प्राप्त हुए। उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार मनीष जिंदल को 10 व अनु रानी को सात मत प्राप्त हुए।  
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कांग्रेस समर्थित पार्षद कांग्रेस नेता शीशपाल केहरवाला की अगुवाई में वीरवार को नगरपालिका कार्यालय में पहुंचे। वहीं इनेलो व भाजपा समर्थित पार्षद सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी व विधायक बलकौर सिंह और राजेंद्र सिंह देसूजोधा की अगुवाई में कार्यालय में पहुंचे। कांग्रेस को पूरी उम्मीद थी कि दोनों पदों पर उनकी जीत होगी। लेकिन अंदरखाते भाजपा व इनेलो गठबंधन होने के बाद दोनों पदों पर कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा और कांग्रेस नेताओं को मायूसी के साथ लौटना पड़ा।



मुकाबला टाई होने पर चुनाव स्थगित करना चाहती थी विधायक नैना
नगर परिषद चेयरमैन का मुकाबला टाई होने पर विधायक नैना सिंह चौटाला ने चुनाव स्थगित करने का प्रस्ताव रखा था। जिसके बाद वार्ड 14 से कांग्रेस समर्थित पार्षद विनोद बांसल ने ड्रॉ ऑफ लॉट्स का प्रोविजन बताकर प्रस्ताव को नामंजूर करवा दिया। बांसल से विधायक ने सवाल किया कि आपको कैसे पता। जिस पर बांसल ने कहा था कि मैंने एक्ट पढ़ा है। आखिरकार एक बच्ची के जरिए लकी ड्रॉ निकालकर कांग्रेस को जीत मिली।


चेयरमैन पद के लिए कांग्रेस के पास छह दावेदार थे। ऐसे में एक के नाम पर मुहर लगाना कोई आसान काम नहीं था। बेशक कांग्रेस के सभी पार्षदों ने अधिकार डॉ. केवी सिंह को दिया था, लेकिन वे भी बीच में नहीं आए। ऐसे में चेयरमैन पद के लिए चुनाव कुल 11 पार्षदों में से पांच सामान्य श्रेणी के पार्षदों ने किया। पांचों पार्षदों ने चेयरमैन के लिए पार्षद का नाम लिखकर सील बंद लिफाफे में कांग्रेस नेता को पकड़ा दिया।


बैठक में पहुंचकर लिफाफा पार्षद रमेश बागड़ी के हाथ में आया। पंच परमेश्वर के जरिए मिले निर्णय के बाद सुमन का नाम चेयरमैन के लिए आगे रखा गया। हालांकि कांग्रेस ने उप चेयरमैन पर फैसला नहीं लिया था। परिस्थितियों के अनुसार फैसले की सोची थी। चूंकि कांग्रेस नेता जग्गा सिंह बराड़ अपने दो पार्षदों में से किसी एक के लिए उपप्रधान पद मांग रहे थे। जब कांग्रेस पार्षदों ने विधायक नैना चौटाला की पिछली सीट पर भाजपा पार्षदों को बैठे देखा तो कांग्रेस नेता केवी सिंह की हरी झंडी के बाद वार्ड छह से पार्षद कृष्ण लाल बॉबी को उप चेयरमैन पद के लिए प्रस्तावित किया गया। गठबंधन की गुटबाजी का फायदा बॉबी को मिला। किस्मत का फायदा सुमन के साथ कांग्रेस को।

भाजपा का साथ चाहता था हाथ
डबवाली से कुछ समय पहले रानियां नपा के चुनाव हुए थे। वहां कांग्रेस को भाजपा का साथ मिला। डबवाली में कुछ यही हालात बनते हुए प्रतीत हुए थे। भाजपा के दो पार्षदों के सहारे उपप्रधान पद की जिद कर रहे एक कांग्रेस नेता को दूसरा सबक सिखाने के मूड में था। सही मायने में कांग्रेस भाजपा को अपने साथ मिलाकर उसे उप चेयरमैन का पद देना चाहती थी।
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