हड़ताल पर बैठे प्राइवेट एंबुलेंस संचालक हड़ताल के तीसरे दिन बदमाशी पर उतर आए। प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों ने बुधवार को पंजाब की तरफ एक व्यक्ति का शव लेकर आ रही एंबुलेंस में तोड़फोड़ की।
एंबुलेंस संचालकों ने एंबुलेंस चालक को धमकाया और धमकी दी। इसके बाद शव के वारिसों ने एंबुलेंस संचालकों के पैर पकड़े तो उन्होंने एंबुलेंस को आगे जाने दिया।
मृतक के वारिसों की आंखों में आंसू और उनका गिड़ गिड़ाना देखकर राहगीरों का दिल भी भर आया। राहगीरों ने एंबुलेंस संचालकों से कहा कि ये इंसानियत नहीं हैवानियत है। भगवान को क्या जवाब दोगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को एंबुलेंस में रखा।
जानकारी के अनुसार गांव पीरखेड़ा का 32 वर्षीय बंसीलाल बीमारी के कारण जयपुर के अस्पताल में भर्ती था। उसने बुधवार सुबह दम तोड़ दिया।
मृतक के शव को जयपुर से एंबुलेंस में डालकर उसका भाई प्रदीप, फूंफा और एक अन्य सदस्य अपने गांव पीरखेड़ा में लेकर आ रहे थे।
जब डबवाली रोड़ पर पहुंचे तो सामने से आ रही एंबुलेंस को देखकर हड़ताल पर बैठे निजी एंबुलेंस चालक भड़क गए। रोड जाम करते हुए गाड़ी को रुकने का इशारा किया।
चालक ने एंबुलेंस रोक दी। उसके बाद सभी हड़ताली एंबुलेंस संचालकों विवाद करने लगे। आखिर में बात बढ़ गई और एंबुलेंस चालकों ने लोहे की राड से उसकी गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। जब शहर के लोग बीच बचाव करने आए तो उन्होंने एंबुलेंस को जाने दिया।
हमने नहीं की तोड़ फोड़
हमने एंबुलेंस रोकी थी लेकिन तोड़फोड़ नहीं की। पंजाब से आई एंबुलेंस के चालक को हमने समझाया कि भाई हम तो नरम है लेकिन आगे गर्भ विचारधारा के लोग मिलेंगे। इसलिए एंबुलेंस आगे मत ले जाओ। इसके बाद पुलिस ने एंबुलेंस को आगे जाने दिया। हमने केवल समझाया, तोड़फोड़ नहीं की।