संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नागरिक अस्पताल में बनी लैब में एफएनएसी टेस्ट के लिए पैथोलॉजिस्ट (विकृति विशेषज्ञ) ने होने के कारण मरीजों को बिना टेस्ट करवाए ही घर लौटना पड़ रहा है। यह स्थिति नागरिक अस्पताल में पिछले चार माह से चल रही है। जिसके कारण मरीजों को परेशानियों के साथ आर्थिक भार का सामना करना पड़ रहा है।
करीब चार माह पहले पैथोलॉजिस्ट का तबादला हो गया। जिसके बाद से अब तक लैब में उनके स्थान पर कोई अन्य पैथोलॉजिस्ट नहीं आया है।ऐसे में नागरिक अस्पताल आने वाले मरीजों की जांच न होने से टीबी गांठ का सही पता नहीं लग पाता। प्रतिदिन 25 से 30 के करीब मरीज रोजाना अस्पताल में जांच के लिए पहुंच रहे हैं। ईएनटी चिकित्सक द्वारा मरीजों के गले और कानों के नीचे गांठ होने पर टेस्ट के लिए परामर्श दिया जाता है। एफएनएसी टेस्ट में टीबी और कैंसर जैसी बीमारी की प्राथमिक स्थिति का भी पता चल जाता है।
यह है जांच की प्रक्रिया
एफएनएसी जांच में मरीज के शरीर में स्थित गांठ से लिक्विड लिया जाता है। इसकी माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। जांच में टीबी के रोगाणु आसानी से दिखाई दे जाते हैं। दो से तीन दिन में रिपोर्ट आने के बाद टीबी और कैंसर जैसी बीमारी का पता लगाया जाता है।
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निजी लैब से करवाने पड़ रहे टेस्ट
अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट न होने के कारण मरीजों को बाहर निजी लैब से टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। जबकि नागरिक अस्पताल में यह टेस्ट फ्री में किया जाता है। निजी लैब से टेस्ट करवाने पर मरीज को 1000 से 1500 रुपये देने पड़ रहे हैं। ऐसे में जिन मरीजों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती वो बाहर लैब में टेस्ट नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में वो अपनी बीमारी का भी उपचार भी नहीं करवा पा रहे हैं। नागरिक अस्पताल में आए गांव मोरीवाला के दिलबाग सिंह ने बताया कि उसके गले में गांठ बनी हुई थी। वह नागरिक अस्पताल में चेकअप करवाने के लिए आया था। यहां पर आकर पता चला कि यहां पर पैथोलॉजिस्ट नहीं है। अब उसे बाहर निजी लैब से अपना टेस्ट करवाना पड़ा।
क्या है पैथोलॉजी
पैथोलॉजी चिकित्सा विज्ञान की एक शाखा है जो रोग के अध्ययन और निदान पर केंद्रित है। नैदानिक पैथोलॉजी में शल्य चिकित्सा द्वारा निकाले गए अंगों, ऊतकों (बायोप्सी नमूने), शारीरिक तरल पदार्थ और, कुछ मामलों में, पूरे शरीर (शव परीक्षण) की जांच शामिल है।
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एफएनएसी टेस्ट करने से ही शरीर में टीबी का सही से पता चल जाता है। साथ ही माइक्रोस्कोप से जांच करने पर कैंसर की प्राथमिक स्थिति भी पता लग जाती है। टीबी की पुष्टि के बाद ही मरीज का इलाज संभव हो पाता है। अभी अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को डिमांड भेजी हुई है।
-डॉ. पवन कुमार , पीएमओ , नागरिक अस्पताल सिरसा।