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लाइसेंस अवधि समाप्त होने के बावजूद चल रहे नशा मुक्ति केंद्र को बंद करने के आदेश, डीसी को भेजी रिपोर्ट

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सिरसा। डबवाली के चौटाला रोड पर एक नशा मुक्ति केंद्र बिना लाइसेंस के चल रहा है। शिकायत के आधार पर डीसी ने जांच के आदेश दिए। एसडीएम के नेतृत्व में पांच अधिकारियों की टीम ने जांच की। जिसमें खुलासा हो गया कि नशा मुक्ति केंद्र की लाइसेंस अवधि समाप्त हो चुकी है लेकिन इसके बावजूद केंद्र संचालित किया जा रहा है। इस पर टीम सदस्यों ने केंद्र संचालक को नोटिस जारी करके तुरंत प्रभाव से टेंपरेरी रूप से केंद्र को बंद करने के आदेश जारी किए। साथ ही सिविल सर्जन के माध्यम से डीसी को भी रिपोर्ट भेजी गई है। इतना ही नहीं अब ड्रग कंट्रोलर भी नशा मुक्ति केंद्र के दवाओं के रिकॉर्ड की जांच करेंगे।
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डबवाली के चौटाला रोड पर ज्याणी कलावती अस्पताल संचालित है। इस अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र भी चलाया जा रहा है। सिरसा निवासी नरेंद्र गगनेजा ने जिला प्रशासन को शिकायत भेजी। इसमें आरोप लगाया कि इस केंद्र की लाइसेंस अवधि समाप्त हो चुकी है इसके बावजूद केंद्र में इलाज चल रहा है। इतना ही नहीं शिकायतकर्ता ने केंद्र पर प्रयोग होने वाली नशा मुक्ति की दवाओं के प्रयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। इस पर डीसी ने जांच के आदेश दिए। जांच के लिए डीसी ने एसडीएम के नेतृत्व में पांच अधिकारियों की कमेटी गठित की। इसमें एसडीएम राजेश पूनिया, एसएमओ डॉ. एमके भादू, जिला समाज कल्याण अधिकारी नरेश बत्तरा, डॉ. सुरेश कुमार, मनोवैज्ञानिक कृतिका सैनी को शामिल किया गया।
दो बार की छापेमारी, बिना लाइसेंस केंद्र संचालित होने का खुलासा
एसएमओ डॉ. एमके भादू ने बताया कि टीम में शामिल अधिकारियों ने केंद्र पर दो बार जाकर जांच की। इस दौरान केंद्र संचालक डॉक्टर धर्मेंद्र ज्याणी मौके पर नहीं मिले। जो कर्मचारी मिले, उन्होंने लाइसेंस दिखाया, लेकिन उसके अनुसार केंद्र की लाइसेंस की वैधता खत्म हो चुकी थी। इससे खुलासा हो गया कि लाइसेंस अवधि समाप्त होने के बावजूद केंद्र को संचालित किया जा रहा है। इसलिए टीम सदस्यों ने केंद्र संचालक को नोटिस जारी कर आदेश दिए कि केंद्र को टेंपरेरी रूप से बंद कर दिया जाए।
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अब दवाओं के रिकॉर्ड की भी होगी जांच, ड्रग कंट्रोलर को लिखा पत्र
डॉ. भादू ने बताया कि जांच टीम के अधिकारियों ने ड्रग कंट्रोलर को भी पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा है कि नशा मुक्ति केंद्र के दवाओं के रिकॉर्ड की भी जांच की आवश्यकता है। इससे स्पष्ट होगा कि कितनी दवाओं का प्रयोग हुआ और कितनी खरीदी गई। इसलिए उन्होंने जांच की सिफारिश की है। बता दें कि इससे पहले भी जनवरी 2020 में केंद्र संचालक डॉक्टर नशीली के साथ पकड़ा गया था। उनके कब्जे से 12.85 लाख गोलियां मिली थी, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं था। इस मामले में डॉक्टर जेल भी गया और अब फिलहाल जमानत पर बाहर है।
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