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एक हजार बोतल अवैध शराब बरामद

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शराब ठेका पर कार्रवाई करते अधिकारी। - फोटो : Sirsa
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प्रदेश में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद पुलिस ने अवैध रूप से शराब की बिक्री करने वाले लोगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। इसी के तहत आबकारी व गुप्तचर विभाग ने ओढां पुलिस की मदद से गांव मलिकपुरा व घुंकावाली में शराब ठेकों पर कार्रवाई की। घुंकावाली में शराब ठेका अवैध चलता पाया गया तो वहीं मलिकपुरा में ठेके पर काफी मात्रा में शराब बरामद की गई। ठेकेदार ने इसे वैध बताया तो वहीं आबकारी विभाग ने अवैध बताकर शराब को जब्त कर लिया। इस कार्रवाई को लेकर पुलिस 6 घंटे तक उलझी रही। लंबी पशोपेश के बाद आबकारी विभाग के अधिकारी की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई दर्ज की। विभाग ने दोनों जगहों से करीब 1 हजार बोतल शराब बरामद की है।
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मंगलवार को आबकारी व गुप्तचर विभाग ने ओढां पुलिस को साथ लेकर घुंकावाली व मलिकपुरा में शराब ठेकों पर दबिश दी। घुंकावाली मेें शराब ठेका अवैध पाए जाने पर विभाग ने दो पेटी शराब जब्त कर कारिंदे के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। वहीं मलिकपुरा में विभाग ने जब शराब जब्त करनी चाही तो ठेका संचालक ने इसका विरोध करतेे हुए कहा कि उसकी शराब अवैध नहीं है। इसके लिए उसने विभाग को राशि अदा कर रखी है। ठेकेदार ने राशि की रसीद भी दिखाई। जिसके बाद टीम के अधिकारी काफी देर तक उच्चाधिकारियों से परामर्श करते रहे। गुप्तचर विभाग से सतपाल सिंह के मुताबिक मलिकपुरा व घुंकावाली के ठेके अवैध होने केे बाद कार्रवाई की गई।
हमने 2 लाख भरे हैं : ठेकेदार
ठेकेदार पवन कुमार ने विभाग की कार्रवाई के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उसकी शराब अवैध नहीं है। उसने 19 मई को 2 लाख रुपये की राशि आबकारी विभाग को जमा करवाई थी। जिसकी उसके पास बाकायदा रसीद भी है। पुलिस ने जब रसीद व नक्शा देखा तो वो बिल्कुल सही पाया गया। जिसके बाद कार्रवाई को लेकर अधिकारियों व ठेकेदार के बीच करीब 6 घंटे तक जद्दोजहद चलती रही। आबकारी विभाग ने ठेकेदार की एक न सुनते हुए करीब 973 बोतल शराब जब्त कर थाने में भिजवा दी। ठेकेदार ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि 2 लाख रुपये की राशि भरने के बावजूद भी उसकी शराब जब्त करना विभाग की धक्केशाही है। इस मामले में वे आबकारी विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में जाएंगे।
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अधिकारी बोले- रसीद सबमिट करवाकर रिसिविंग लेनी थी
आबकारी विभाग के अधिकारी निरीक्षक जयवीर सिंह व ईटीओ नरेश कुमार ने कहा कि ठेकेदार ने 2 लाख रुपये की राशि भरी है। वे इससे इंकार नहीं करते। लेकिन ठेकेदार द्वारा नियमानुसार रसीद को कार्यालय मेें सबमिट करवाकर एप्लीकेशन देते हुए रिसिविंग नहीं ली गई। इसलिए इस मामले में विभाग की कोई गलती नहीं है। अधिकारियों ने शराब के साथ-साथ ठेेके को भी अवैध बताया। जिसके बाद विभाग ने 2 गाड़ियों मेें भरकर शराब को थाने में पहुंचा दिया।
कोट
ठेकेदार ने राशि तो जमा करवा रखी है। लेकिन उसने रसीद को सबमिट करवाते हुए कार्यालय में एप्लीकेशन भी देनी चाहिए थी। उसकी राशि व ठेका हमारे रिकॉर्ड में नहीं है। विभागीय प्रावधान अनुसार सरकारी फीस भरने के बाद उसे रिफंड नहीं किया जा सकता। शराब व ठेका दोनों अवैध है।
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-जयवीर सिंह, निरीक्षक आबकारी विभाग।
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