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Sirsa News: 96 छात्राओं पर एक गेस्ट टीचर... बीमार होने पर करनी पड़ती है स्कूल की छुट्टी, डीईओ को जानकारी तक नहीं

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कालांवाली के राजकीय कन्या प्राइमरी स्कूल में बच्चों को पढ़ाती गेस्ट टीचर। संवाद
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रोहित जैन
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कालांवाली। प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने का दावा करती है, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है। गांव कालांवाली का राजकीय कन्या प्राइमरी स्कूल शिक्षा विभाग की अनदेखी का शिकार हो रहा है। राजकीय कन्या प्राइमरी स्कूल सिर्फ एक गेस्ट टीचर वीरा कौर के सहारे चल रहा है।
इस राजकीय स्कूल में 96 छात्राएं पढ़ती हैं। गेस्ट टीचर वीरा कौर ही सभी विषयों की पढ़ाई करवाती हैं। स्कूल में शिक्षक के चार पद स्वीकृत हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्कूल के दो शिक्षकों को डेपुटेशन पर भेज दिया है। ऐसे में गेस्ट टीचर वीरा कौर के बीमार होने या घर का काम होने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ती है। स्कूल में शिक्षकों की कमी और बच्चों की प्रभावित होती पढ़ाई को देखते हुए ग्रामीण व पंचायत ने उपायुक्त को भेजा पत्र है।
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वहीं, इस मामले से शिक्षा विभाग के अधिकारी अंजान हैं। यह हालात तब हैं, जब नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण किया जाता है। ग्राम पंचायत ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल में शिक्षक भेजे जाएं, ताकि सरकारी स्कूल में बच्चे पढ़ सकें। संवाद


स्कूल में शिक्षक के चार पद स्वीकृत

राजकीय स्कूल में सत्र 2024-25 में कुल 96 छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। एक मात्र शिक्षक होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार स्कूल में जेबीटी के चार पद स्वीकृत है। स्कूल में तैनात एक शिक्षक दिसंबर माह में पदोन्नत होने के कारण चले गए। दो टीचर डेपुटेशन पर चले गए हैं। एक टीचर सुनीता रानी आगामी 31 मार्च तक बडागुढ़ा में और एक टीचर रितु रानी आगामी आदेश तक रोड़ी में डेपुटेशन पर चली गई है। ऐसे में सिर्फ एक गेस्ट टीचर वीरा कौर ही स्कूल को संभाल रही है।


सभी काम का भार गेस्ट टीचर पर, बीमार होने पर आना पड़ता है स्कूल

स्कूल में लगी गेस्ट टीचर की स्थिति बेहद विकट है। उन्हें बीमार होने पर भी स्कूल में आना पड़ता है। अगर वे किसी दिन स्कूल नहीं आतीं, तो स्कूल को बंद करना पड़ता है। इससे छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है। पढ़ाई के साथ बच्चों को मिड-डे-मील भी नहीं मिलता है। अकेली शिक्षक को ही मिड-डे-मील, रिकॉर्ड, सरकारी बैठकों का दबाव और राशन लाने आदि का काम करना पड़ता है। क्लर्क या अन्य स्टाफ तक स्कूल में नहीं लगाया गया है। ऐसे में बच्चों को मिड-डे-मील भी नियमित रूप नहीं मिलता।



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वर्जन

स्कूल में शिक्षक लगाने के लिए उपायुक्त को पत्र भेज चुके हैं। पहले भी कई बार उच्चाधिकारियों से स्कूल में शिक्षकों की मांग की थी, आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सरकारी स्कूल में सभी अपने बच्चे पढ़ाना चाहते हैं, कोई निजी स्कूल में बच्चों को नहीं भेजना चाहता। -अजैब सिंह, सरपंच, कालांवाली।



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स्कूल में शिक्षक भेजने के लिए उच्चाधिकारियों को ई-मेल से लेकर पत्राचार 10 से अधिक बार किया जा चुका है। हाई स्कूल के माध्यम से पत्र जाता है। स्कूल में शिक्षकों की कमी ज्यों की त्यों बनी हुई है। - गुरमीत कौर, हेड टीचर, राजकीय कन्या मिडिल स्कूल, गांव कालांवाली।
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उक्त मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसी कोई बात है तो वे अभी बीईओ को निर्देश देकर समस्या का समाधान करवा देंगे। - बूटा राम, जिला शिक्षा अधिकारी, सिरसा।
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