मुख्य सचिव से वीसी के माध्यम से बैठक करते हुए उपायुक्त आरपी सिंह ।
सिरसा। मौसम के हाई अलर्ट के बाद रविवार को मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने वीसी के माध्यम से अधिकारियों की बैठक ली। बैठक का मुख्य मकसद किसानों की फसल का सुरक्षित भंडारण करवाना रहा, क्योंकि मौसम के हाई अलर्ट के चलते मंडियों में धीमा उठान प्रदेश भर में देखने को मिल रहा है। ऐसे में उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि उठान के कार्य में कोई देरी न की जाए। तेजी से सरसों की फसल का उठान करवाया जाए, क्योंकि गेहूं की बड़े स्तर पर आवक मंडियों में आनी है।
मुख्य सचिव ने कि इस बार प्रदेश में गेहूं की बंपर पैदावार हुई है। इसलिए मंडियों में बिक्री के लिए अधिक फसल आने की उम्मीद है। अधिकारी मंडी में बंपर पैदावार को देखते हुए अपनी तैयारियां रखें। कोई परेशानी किसानों को नहीं आनी चाहिए। उन्होंने उपायुक्तों से अपने-अपने जिले में मंडियों की व्यवस्थाओं का फीडबैक लेते हुए कहा कि जहां पर भी कोई समस्या आती है तो अपने मंडलायुक्तों तथा स्पेशल नियुक्त किए गए प्रशासनिक सचिवों से मार्गदर्शन लेकर जल्द से जल्द समाधान का प्रयास करें। उन्होंने प्रशासनिक सचिवों को भी समय -समय पर अपने अधीन मंडियों की विजिट करने के भी निर्देश दिए।
मंडी परिसर में सफाई व्यवस्था दुरूस्त रखें
उपायुक्त आरके सिंह ने किसानों की संतुष्टि हमारी प्राथमिकता है। मंडियों में बारदाना की कमी नहीं होनी चाहिए जहां थोड़ी-बहुत कमी पाई गई है, वहां पर जल्द से जल्द उसको पूरा करें। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि मंडी परिसर में सफाई व्यवस्था दुरूस्त रहे। मंडी में फसल बिक्री के लिए किसानों के समक्ष पेयजल आदि की दिक्कत न आए। बिजली की आपूर्ति भी सही हो ताकि रात के समय समस्या अप्रिय घटनाएं न हो। उन्होंने कहा कि बारिश की संभावना को देखते हुए मंडियों में तिरपाल आदि की व्यवस्था की जाए तथा फसल उठान भी सुचारू रूप से करें, ताकि आने वाले दिनों में गेहूं की फसल अधिक आने पर मंडियों में अव्यवस्था न हो।
-जे-फार्म में ही लगता है वक्त
किसानों के जे-फार्म कटने में वक्त लगता है। यही वक्त किसानों की फसल की सुरक्षा के लिए अहम होता है। बता दें कि जब किसान फसल लेकर मंडी आता है। मंडी में आने के बाद वह टोकन कटवाता है और फसल बेचता है। इस दौरान उसकी खुले में रखी फसल की बिना बिके की जिम्मेदारी उसकी व बिकने के बाद आढ़ती की होती है। इस दौरान अन्न की बोरियों भरवाना आढ़ती का कार्य होता है और गोदाम में लगवाने का काम एजेंसी का होता है। जब तक फसल बोरियों में भरकर एजेंसी के गोदाम तक नहीं पहुंचती है तब तक जे फार्म नहीं कटता है। ऐसे में जे फार्म में पहले ही 24 से 48 घंटे लग जाते हैं। वहीं सरकार भी पूर्ण भुगतान के लिए तीन दिन यानि 72 घंटे तक का समय लेती है।