सिरसा। गलियों के एस्टीमेट के आकलन में गलतियां लगातार एक्सईएन के सामने आ रहीं थी। एक्सईएन ने आदेश जारी किए हैं कि वही एस्टीमेट फाइनल माना जाएगा, जिसकी मौके पर पैमाइश होगी। पैमाइश के नक्शे के साथ-साथ वार्ड पार्षद व ड्राफ्टमैन के साइन होंगे। दरअसल, कई पार्षद चेयरमैन से ठेकेदार की ओर से कुछ गलियां नहीं बनाने की शिकायत कर चुके थे।
जब मामले की जांच की गई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। इन गलियों की पैमाइश ही नहीं की गई, गलियों को फोन पर संबंधित वार्ड एरिया के मौअजिज लोगों या पार्षद से बात कर एस्टीमेट बना दिए। यही अनुमानित एस्टीमेट अब पार्षदों के लिए आफत बन गए हैं। टेंडर में होने के बाद भी कई गलियां नहीं बनने के मामले सामने आए हैं।
घर बैठकर अनुमानित आकलन लेकर एस्टीमेट बनाने का चलन अब बंद हो गया है। जेई अब घर बैठे और मौअजिज लोगों से फोन कर जानकारी लेकर एस्टीमेट बनाते हुए नजर नहीं आएंगे। सभी जेई ऑन द स्पोर्ट जाकर गली की पैमाइश कर रहे हैं। इसका लाभ पार्षदों को हो रहा है कि उन्हें पता होता है कि किस गली की पैमाइश हुई है और उसका एस्टीमेट बनाया गयस्हैहैं। कौन सी गलियां रह गई हैं, जिनकी पैमाइश नहीं हुई है। ऐसे में भ्रष्टाचार पर भी नकेल कसी जा सकेगी।
वार्ड छह में होना था चार सीसी गलियों को निर्माण
वार्ड छह के पार्षद गोपीराम सैनी ने बताया कि उनके वार्ड में चार सीसी की गलियों का निर्माण किया जाना था। सभी गलियों का टेंडर लगा दिया और निर्माण कार्य शुरू हो गया। दो गलियों का निर्माण होने के बाद ही ठेकेदार ने कहा कि उनका एरिया पूरा हो गया है, जो बेहद हैरान करने वाला है। 30 लाख रुपये से ज्यादा का टेंडर था और अब गली वाले गलियां नहीं बनाने के आरोप लगा रहे हैं। समझ नहीं आ रहा है कि जेई स्तर के अधिकारी इस तरह की बड़ी लापरवाही कैसे कर सकते हैं। दो गलियों का एस्टीमेट कम होना जांच का विषय है।
वार्ड दो पार्षद ने भी दी थी शिकायत
वार्ड दो की पार्षद चंचल एडवोकेट ने भी अधिकारियों को अपनी शिकायत दी थी कि ठेकेदार ने उनकी मुख्य गली के साथ लगती दूसरी गलियां नहीं बनाई। इस कारण आमजन उन पर गलियां बनाने का दबाव बना रहे हैं। एमई ने उन्हें तकनीकी स्तर पर गलियों के एस्टीमेट बनाने में कमी रही है। बची हुई गलियों को अलग टेंडर लगाकर बनवा दिया जाएगा। यह कहानी दो वार्डों की नहीं हैं। कई वार्डों में इस प्रकार की कहानी सामने आई हैं। इसी के चलते नगर परिषद प्रशासन ने यह नया निर्णय लिया है।
राजनीतिक दबाव व काम की अधिकता में होते हैं टेंडर गलत
अधिकारियों के अनुसार टेंडर जल्द से जल्द लगाने का दबाव बना रहता है। सभी गलियों और वार्ड में जाना कई बार मुनासिब नहीं होता है। इस कारण पूर्व में इस प्रकार के मौखिक आकलन आधारित टेंडर लगा दिए गए थे। राजनीतिक दबाव भी कई बार रहता है।
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मेरे सामने एस्टीमेट में गलियां होने की बात सामने आई थी। पार्षदों ने इस संबंध में बताया था और एक्सईएन से साथ बैठकर यह आदेश जारी करवाए हैं। जेई मौके पर जाकर गली का नक्शा बनाएगा और पार्षद के साइन करवाएगा। इससे न तो टेंडर गलत होगा और पार्षद को भी टेंडर की जानकारी रहेगी।
- वीर शांति स्वरूप, चेयरमैन, नगर परिषद।